वैक्सीन लगने के बाद भारत में ब्लड क्लॉटिंग के मामूली केस, लक्षणों को लेकर एडवाइजरी जारी

कोरोना की दूसरी लहर के बीच भारत में वैक्सीनेशन का काम भी चल रहा है. देश में जिन लोगों को अभी तक वैक्सीन लग गई है, उनमें से बेहद मामूली केस ही ऐसे सामने आए हैं, जिनमें खून का थक्का जमने की शिकायत दर्ज की गई है या टीकाकरण के बाद स्थिति काफी गंभीर रूप में बिगड़ी है.

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कोविशील्ड लगने के बाद बेहद कम आए ब्लड क्लॉटिंग के केस (फोटो: PTI) कोविशील्ड लगने के बाद बेहद कम आए ब्लड क्लॉटिंग के केस (फोटो: PTI)

अशोक सिंघल / मिलन शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 17 मई 2021,
  • अपडेटेड 3:53 PM IST
  • ब्लड क्लॉटिंग को लेकर सरकारी पैनल की रिपोर्ट
  • भारत में ऐसे बेहद कम मामले दर्ज हुए: पैनल

कोरोना की दूसरी लहर के बीच भारत में वैक्सीनेशन का काम भी चल रहा है. देश में जिन लोगों को अभी तक वैक्सीन लग गई है, उनमें से बेहद मामूली केस ही ऐसे सामने आए हैं, जिनमें खून का थक्का जमने की शिकायत दर्ज की गई है या टीकाकरण के बाद स्थिति काफी गंभीर रूप में बिगड़ी है. नेशनल एडवर्स इवेंट फॉलोइंग इम्युनाइजेशन कमेटी द्वारा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को सौंपी गई रिपोर्ट में ये दावा किया गया है. 

बता दें कि इसी साल मार्च में एस्ट्रेजेनेका-ऑक्सफोर्ड वैक्सीन (जो भारत में कोविशील्ड के नाम से उपलब्ध है) उसको लेकर कई देशों ने अलर्ट जारी किया था, क्योंकि कई मामलों में वैक्सीन लगने के बाद खून का थक्का जमने और उसके कारण मौत होने के मामले सामने आए थे. जिसके बाद भारत में इस मसले पर गहरी रिसर्च की गई थी. 

सिर्फ 700 गंभीर मामलों को किया गया दर्ज 

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कमेटी ने पाया कि 3 अप्रैल 2021 तक देश में 7.5 करोड़ वैक्सीन की डोज दी गई थीं, जिनमें से 6.5 करोड़ पहली डोज़ थी और लगभग एक करोड़ दूसरी डोज़ थी. इस दौरान कुल 23 हजार दिक्कत के मामले दर्ज किए गए थे, जो कि देश के 684 जिलों से थे. लेकिन इन 23 हजार में से भी सिर्फ 700 मामले ऐसे थे जो बेहद ही गंभीर थे, जो प्रति मिलियन वैक्सीन डोज़ में मात्र 9.8 केस का औसत है. 

सीरियस मामलों में से कुल 498 केस का कमेटी ने अध्ययन किया, जिसमें से सिर्फ 26 केस ऐसे थे जो कि ब्लड क्लॉट के लक्षण थे, ये लक्षण कोविशील्ड वैक्सीन लगने के बाद ही पैदा हुए थे. हालांकि, कोवैक्सीन लगने के बाद ऐसा कोई भी मामला दर्ज नहीं किया गया. 

कमेटी की रिपोर्ट का दावा है कि भारत में ब्लड क्लॉट की मात्रा काफी कम है लेकिन जिनमें ये केस मिले हैं वो ठोस हैं. भारत में इन मामलों का प्रति दस लाख डोज़ में 0.6 केस था, जबकि यूके में यही प्रति दस लाख पर 4 केस है. 

इन लक्षणों का रखना होगा बेहद ध्यान

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अब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा इसको लेकर एडवाइज़री भी जारी की गई है और हेल्थवर्कर्स और वैक्सीन लेने वाले लोगों को अगर टीका लगने के 20 दिन के अंदर ऐसे कोई लक्षण दिखाई देते हैं, तो वह इस बारे में अस्पताल को सूचित कर सकते हैं...

इनमें छाती में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, हाथ में सूजन या ज्यादा दर्द, टीका लगने वाले जगह पर लाल निशान, पेट में दर्द, लगातार उल्टी आना, लगातार सिर में दर्द, शरीर के किसी अंग या किसी हिस्से में लगातार दर्द, बिना किसी वजह के उल्टी आना, आंखों में दर्द, डबल विज़न दिखना या कोई भी ऐसा लक्षण जो आपको स्वयं गंभीर लगता हो. 

हालांकि, कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में साफ किया है कि कोविशील्ड भारत में इस्तेमाल की जाने वाली एक अच्छी वैक्सीन है, जिसने शानदार नतीजे दिए हैं. ये वैक्सीन कोरोना के कारण होने वाली दिक्कतों को कम करती है. 

 

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