अब आधार नहीं होगा डेट ऑफ बर्थ का दस्‍तावेज, UIDAI का बड़ा अपडेट!

यूआईडीएआई ने कहा कि आधार कार्ड एक वैलिड डॉक्‍यूमेंट है और इसे पहचान के तौर पर एक्‍सेप्‍ट किया जा सकता है, लेकिन यह डेट ऑफ बर्थ का प्रूफ नहीं हो सकता है. आइए जानते हैं क्‍यों ये डेट ऑफ बर्थ का दस्‍तावेज नहीं माना जा सकता है?

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डेट ऑफ बर्थ का दस्‍तावेज नहीं हो सकता आधार. (Photo: File/ITG) डेट ऑफ बर्थ का दस्‍तावेज नहीं हो सकता आधार. (Photo: File/ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई द‍िल्‍ली,
  • 28 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 12:34 PM IST

आधार कार्ड को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है. UIDAI ने एक लेटर जारी करते हुए कहा कि आधार कार्ड को डेट ऑफ बर्थ का प्रूफ नहीं माना जाना चाहिए. आधार कार्ड से आपकी पहचान तो साबित हो सकती है, लेकिन आपके जन्म की तारीख नहीं.  

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड अथेंटिफिकेशन के माध्यम से पहचान का वैध प्रमाण है, लेकिन इसे जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में नहीं माना जाना चाहिए, भले ही इसमें जन्‍म के बारे में जानकारी मौजूद हो. UIDAI ने ये जानकारी आधार यूजर्स एजेंसी (AUA) और ई-केवाईसी यूजर्स एजेंसियों (KUA) को भेजे क लेटर में दी है.  

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क्‍यों आधार डेट ऑफ बर्थ प्रूफ नहीं?
UIDAI ने कहा कि आधार का उद्देश्य अथेंटिफिकेशन के माध्यम से पहचान स्थापित करना है, न कि किसी व्यक्ति का डेट ऑफ बर्थ बताना. उसने आगे कहा कि आधार कार्ड में डेट ऑफ बर्थ यूजर्स द्वारा नॉमिनेशन या अपडेट के दौरान दी गई जानकारी के आधार पर दर्ज की जाती है. 

इस जानकारी को डेट ऑफ बर्थ, स्‍कूल सर्टिफिकेट, पासपोर्ट या सरकारी अधिकारियों द्वारा जारी किए गए सर्टिफिकेट्स जैसे दस्‍तावेजों के साथ यूज किया जा सकता है. अगर कोई वैध दस्‍तावेज उपलब्‍ध नहीं है, तो डेट ऑफ बर्थ घोषित या अनुमानित तौर पर दर्ज की जा सकती है और ऐसे मामलों में निवासी द्वारा आयु साझा की जाती है और सिस्टम जन्म वर्ष की गणना करता है. फिर जन्म तिथि को डिफ़ॉल्ट रूप से उस वर्ष की 1 जनवरी के रूप में दर्ज किया जाता है. इसलिए आधार को जन्‍मतिथि वाले दस्‍तावेज के तौर पर यूज नहीं किया जा सकता है. 

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सिर्फ पहचान की पुष्टि होती है, उम्र की नहीं 
यूआईडीएआई ने यह भी कहा कि आधार कार्ड केवल इस बात को कंफर्म करता है कि इसे पेश करने वाला व्यक्ति वही व्यक्ति है, जिसने अपने बायोमेट्रिक और डिटेल के साथ रजिस्‍ट्रेशन कराया था. अथेंटिफिकेशन में इस डेटा की मैचिंग सेंटर्स डेटा भंडार से किया जाता है. सफल अथेंटिफिकेशन से पहचान स्थापित हो जाती है, लेकिन जन्मतिथि जैसे अन्य डिटेल्‍स का वेरिफिकेशन नहीं होता है. 

एजेंसियां चाहें तो कर सकती हैं इसका यूज 
यूआईडीएआई ने लेटर में आगे कहा कि अगर AUA और KUA यह तय कर सकते हैं कि जन्मतिथि निर्धारित करने से संबंधित उद्देश्यों के लिए आधार का उपयोग किया जा सकता है या नहीं. इसमें यह भी कहा गया है कि कल्‍याणकारी योजनाओं, सब्सिडी या अन्‍य उददेश्‍यों के लिए आधार का यूज केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों और अन्य निकायों समेत अन्‍य एजेंसियों द्वारा तय किया जाता है. 

पहचान और एड्रेस प्रूफ के लिए मान्‍य 
UIDAI ने दोहराया कि आधार कार्ड के सभी रूपों, जिनमें भौतिक कार्ड, ई-आधार, मास्क्ड आधार, ऑफलाइन XML और QR कोड शामिल हैं, का उपयोग कुछ शर्तों के अधीन पहचान और पते के प्रमाण के रूप में किया जा सकता है. हालांकि, इसने यह स्पष्ट कर दिया कि आधार कार्ड अपने आप में जन्मतिथि का प्रमाण नहीं है. 

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