सुपरस्टार से राजनेता बने विजय ने तमिलनाडु की राजनीति में भूचाल ला दिया है. साल 2024 में एक नई पार्टी बनाकर थलपति विजय आज राज्य में सबसे ज्यादा सीटें जीतकर सरकार बनाने की तैयारी कर रहे हैं. विजय ने इस चुनाव के दौरान तमिलनाडु की जनता से कई बड़े वादे किए हैं, जिसने विधानसभा चुनाव में TVK को जीत दिलाने में एक बड़ी भूमिका निभाई, लेकिन इन्हें पूरा करना एक बड़ी चुनौती होगी और राजकोष बड़ा दबाव पड़ेगा.
विजय के घोषणापत्र लिस्ट में मुफ्त बिजली, कर्ज माफी, महिलाओं के लिए मंथली कैश और युवाओं के लिए रोजगार योजनाएं आदि शामिल हैं. अगर सब मिलाकर देखें तो सरकारी खजाने पर 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बोझ पड़ेगा, जो तमिलनाडु के लिए सही नहीं है.
क्योंकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह राज्य पहले से ही भारी कर्ज के तले दबा हुआ है और इन वादों का एक छोटा हिस्सा भी पूरा करने में गंभीर आर्थिक परिणाम आ सकते हैं. आइए जानते हैं इन वादों से राज्य पर क्या असर होगा और किन वादों से कितना बोझ बढ़ सकता है?
विजय के चुनावी वादों से तमिलनाडु को कितना नुकसान
अपने घोषणा पत्र में थलपति विजय ने 1.57 करोड़ महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये की सीधी आर्थिक सहायता राशि देने का वादा किया था. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इससे तमिलनाडु सरकार पर सालाना 47,100 करोड़ रुपये का बोझ पड़ सकता है.
उन्होंने 79.4 लाख भूमिधारक किसानों को हर साल 15,000 रुपये की इनकम सपोर्ट का वादा किया है, जिससे 11,910 करोड़ रुपये की लागत आएगी. उन्होंने 1.85 करोड़ परिवारों को हर साल 6 एलपीजी सिलेंडर मुफ्त में देने का भी वादा किया है, जिससे 9,990 करोड़ रुपये की लागत आएगी.
उन्होंने 96 लाख कृषि श्रमिकों को हर साल 10,000 रुपये की श्रम सहायता देने का भी वादा किया, जिससे राज्य सरकार के ऊपर 9,600 करोड़ रुपये का सालाना खर्च बढ़ेगा.
सरकारी स्कूलों में 56.25 लाख लाभार्थियों को हर साल 15,000 रुपये की माता/अभिभावक विद्यालय सब्सिडी देने का वादा किया, जिस पर राज्य सरकार को सालाना 8,438 करोड़ रुपये का खर्च आएगा.
रोजगार और इंटर्नशिप को लेकर युवाओं से क्या किया वादा?
TVK के घोषणापत्र में 5 लाख युवाओं के लिए युवा इंटर्नशिप छात्रवृत्ति देने का भी वादा किया गया है, जिसमें ग्रेजुएशन करने वालों को 10,000 रुपये प्रति माह और आईटीआई/डिप्लोमा होल्डर्स को 8,000 रुपये प्रति माह मिलेंगे. अनुमान है कि इससे तमिलनाडु सरकार पर सालाना 5,400 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा.
विजय के घोषणापत्र में 10 लाख लोगों के लिए 4,000 रुपये प्रति माह के बेरोजगारी अनुदान का भी जिक्र किया गया है, जिस पर सरकारी खजाने पर सालाना 4,800 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा. उन्होंने 1.5 करोड़ परिवारों के स्वास्थ्य बीमा में अतिरिक्त प्रीमियम देने का वादा किया है, जिससे कुल प्रीमियम 849 रुपये से बढ़कर 1,698 रुपये हो जाएगा.
मझुआरों के लिए भी ऐलान
इसके अलावा, उन्होंने मछली पकड़ने के व्यवसाय में शामिल 2.02 लाख परिवारों को प्रति वर्ष 27,000 रुपये की वित्तीय सहायता देने का वादा किया, जिस पर राज्य के खजाने से 545 करोड़ रुपये का खर्च आएगा.
राज्य पर भारी बोझ
इस हिसाब से देखा जाए तो नई सरकार के चुनावी वादों पर राज्य को लगभग 1 लाख करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे, जो कि एमके स्टालिन के लीडरशिप वाली डीएमके सरकार द्वारा 2025-26 में कल्याणकारी योजनाओं और सब्सिडी पर खर्च किए गए 65,000 करोड़ रुपये की तुलना में 52% से अधिक की बढ़ोतरी है.
तमिलनाडु के बजट 2025-26 के लिए रेवेन्यू ₹3.31 लाख करोड़ हैं, जिसमें टीवीके द्वारा प्रस्तावित कल्याणकारी खर्च 29.8% है, जबकि डीएमके का व्यय 19.7% है. इसका मतलब है कि अगर चुनावी वादे पूरी की जाती हैं तो तमिलनाडु पर बड़ा भार पड़ सकता है.
आजतक बिजनेस डेस्क