कतर के LNG प्लांट पर ईरान के हमले से कोहराम, उधर यूरोप में अचानक हो गया ये बड़ा खेल!

ईरान ने कतर के LNG प्लांट पर हमला कर दुनिया में कोहराम मचा दिया है. साथ ही धमकी दी है कि उसके निशाने पर वो सभी देश हैं, जो कि इस युद्ध में अमेरिका की मदद कर रहे हैं. यानी अब ये युद्ध ऑयल इंफ्रा अटैक में तब्दील होता जा रहा है.

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कतर के LPG प्लांट पर हमले से यूरोप में हाहाकार. (Photo: Reuters) कतर के LPG प्लांट पर हमले से यूरोप में हाहाकार. (Photo: Reuters)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 19 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 4:53 PM IST

ईरान-इजरायल में युद्ध अब भयावह रूप लेता जा रहा है. दो हफ्ते पहले युद्ध शुरू होते ही जिस बात का डर था, वही अब हो रहा है. अमेरिका ने पहले ईरान के ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला किया, जिसके जवाब में ईरान ने कतर के सबसे बड़े LNG प्लांट पर मिसाइल दाग दी. जिससे भारी आर्थिक तबाही का अनुमान लगाया जा रहा है. 

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यही नहीं, ईरान ने अब अमेरिका का समर्थक कर रहे मिडिल-ईस्ट के देशों को धमकी दी है कि उसके निशाने पर सभी ऑयल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर हैं. जिसके बाद मिडिल-ईस्ट में ऑयल और गैस प्रोडक्शन पर संकट का बादल मंडराने लगा है. तमाम प्लांट्स सुरक्षा के मद्देनजर बंद कर दिए गए हैं. जिससे आने वाले दिनों में तेल और गैस की सप्लाई बुरी तरह से प्रभावित हो सकती है.

कतर पर हमले से LNG सप्लाई बाधित

दरअसल, मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने कतर के बड़े LNG हब पर हमले किए, जिसके बाद यूरोप में गैस की कीमतों में अचानक 30% से ज्यादा की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है. क्योंकि कतर के जिस LNG प्लांट पर हमला हुआ है, यह दुनिया के सबसे बड़े गैस निर्यात केंद्रों में से एक है. शुरुआती जानकारी के मुताबिक हमलों के कारण गैस सप्लाई में भारी रुकावट आई है. इस बीच यूरोप के देश कतर में हमले के बाद LNG की पैनिक बॉयिंग कर रहे हैं, और डिमांड में अचानक बढ़ोतरी से कीमतें भी बढ़ गई हैं. 

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यही नहीं, ऑयल और गैस इंफ्रा पर हमले से पूरी दुनिया में तेल और गैस की किल्लतें बढ़ सकती हैं. क्योंकि ईरान के निशाने पर वो सभी देश हैं, जो कि इस युद्ध में अमेरिका की मदद कर रहे हैं. जबकि दुनिया में मिडिल-ईस्ट, खासकर कतर टॉप LNG एक्सपोर्टर है. वैश्विक सप्लाई का बड़ा हिस्सा यहीं से आता है. 

गैस प्लांट पर हमले के बाद LNG का उत्पादन और निर्यात दोनों प्रभावित हुए हैं, जिससे तुरंत ठीक नहीं किया जा सकता. क्योंकि हमले से भारी नुकसान हुआ है. अगर कुछ दिनों में सप्लाई की दिक्कतें आ सकती हैं. इसी कारण से यूरोप में गैस की कीमतों में अचानक 30% से ज्यादा की बढ़ोतरी देखी जा रही है. क्योंकि 2022 के बाद से यूरोप ने रूस पर गैस निर्भरता कम की है, और कतर से बढ़ाई है. लेकिन अब कतर संकट में है. हालांकि अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद कुछ यूरोपीय देश अब भी रूसी LNG खरीदते हैं, जो कि हालिया मुसीबत में बड़ा सहारा साबित हो सकता है.  

यूरोप में गैस की पैनिक बॉयिंग

बता दें, यूरोप अब LNG पर ज्यादा निर्भर है. लेकिन युद्ध ने पूरा सप्लाई चेन बाधित कर दिया है. यही नहीं,  अब यूरोप और एशिया में गैस के लिए होड़ बढ़ेगी. LNG कार्गो महंगे होंगे. कच्चे तेल की कीमतें में भी बढ़ने लगी हैं, क्रूड ऑयल (crude oil) 114 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच गया है. 

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इस बीच भारत के लिए भी चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं, क्योंकि भारत भी कतर से गैस आयात करता है, कतर के सबसे बड़े LNP प्लांट बंद होने से सप्लाई बाधित होगी, फिर देश में CNG और PNG महंगी हो सकती है. यही नहीं, बिजली उत्पादन की लागत बढ़ सकती है. यानी आम आदमी तक महंगाई की मार पहुंचने वाली है. 

हालांकि इस बीच अमेरिका भी गैस का बड़ा एक्सपोर्टर है. कतर संकट के बीच अब यूरोप को अमेरिका से महंगी गैस खरीदनी पड़ेगी, साथ ही अमेरिका पर और ज्यादा निर्भरता बढ़ेगी. यूरोप को LNG सप्लाई करने वाले 5 बड़े देश अमेरिका, कतर, अल्जीरिया, नाइजीरिया और इजिप्ट हैं. ये देश मिलकर यूरोप की गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा पूरा करते हैं.

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