देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक एसबीआई ने छोटे डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए 1,000 रुपये तक के आईएमपीएस तत्काल भुगतान सेवा हस्तांतरण पर शुल्क समाप्त कर दिया है. इससे पहले 1,000 रुपये तक के आईएमपीएस लेनदेन पर देय सेवाकर के साथ स्टेट बैंक प्रति लेनदेन 5 रुपये का शुल्क वसूल रहा था.
आईएमपीएस एक त्वरित अंतरबैंकिंग इलेक्ट्रॉनिक कोष हस्तांतरण सेवा है. इसका उपयोग मोबाइल फोन और इंटरनेट बैंकिंग दोनों माध्यम से किया जा सकता है. बैंक ने कहा, छोटे लेनदेन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उसने 1,000 रुपये तक के आईएमपीएस हस्तांतरण पर शुल्क माफ कर दिया है.
माल एवं सेवाकर जीएसटी लागू होने के बाद वित्तीय लेनदेन पर 18फीसदी की दर से कर लगाए जाने की सूचना देने के दौरान उसने यह जानकारी दी. अब 1,000 रुपये तक के आईएमपीएस हस्तांतरण पर शुल्क माफ होगा जबकि 1,000-1,00,000 रुपये के लेनदेन पर 5 रुपये और 1,00,000 रुपये-2,00,000 रुपये पर 15 रुपये शुल्क देय होगा.
इससे पहले बीते हफ्ते एसबीआई ने 1 साल के लिए 1 करोड़ से कम राशि वाली फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दरों को घटाकर 6.75 फीसद कर दिया था. यह दर 7 साल के निचले स्तर पर है. एसबीआई ने इस महीने की शुरुआत में 15 बेसिस प्वाइंट्स की कटौती की है.
एसबीआई के इस कदम के साथ ही यह ब्याज दर साल 2010 की स्थिति में आ गई है. इस समय तक स्टेट बैंक एक साल की फिक्स्ड डिपॉजिट पर 6.75 फीसद ब्याज दिया करते थे. जुलाई में की गई इस कटौती के बाद 1 साल से लेकर 455 दिनों के बीच की अवधि पर जमा राशि की दर 40 बेसिस प्वाइंट गिरकर 6.5 फीसद हो गई है.
राहुल मिश्र