फ्रैक्शनल ओनरशिप: निवेश का नया 'गेम चेंजर', सिर्फ ₹10 लाख में बनें करोड़ों की प्रॉपर्टी के मालिक

रियल एस्टेट की दुनिया में 'फ्रैक्शनल ओनरशिप' एक ऐसी क्रांतिकारी तकनीक बनकर उभरी है, जिसने आम आदमी के लिए करोड़ों की प्रॉपर्टी का मालिक बनने का रास्ता खोल दिया है.

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कम बजट में बनें करोड़ों की बिल्डिंग के मालिक (Photo: Pexels) कम बजट में बनें करोड़ों की बिल्डिंग के मालिक (Photo: Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 28 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:57 AM IST

अगर आपके पास 10–15 लाख रुपये की बचत है, तो क्या आप गुरुग्राम या मुंबई के किसी आलीशान कॉम्प्लेक्स या लग्जरी विला के मालिक बन सकते हैं? कुछ समय पहले तक अगर इस सवाल का जवाब पूछा जाता, तो वह साफ तौर पर ना होता, क्योंकि करोड़ों रुपये की इन संपत्तियों को खरीदना आम आदमी के बस की बात नहीं थी. लेकिन अब वक्त बदल चुका है. निवेश की दुनिया में एक ऐसी नई तकनीक ने दस्तक दी है, जिसने रियल एस्टेट के खेल को पूरी तरह बदलकर रख दिया है. इसे कहते हैं फ्रैक्शनल ओनरशिप.

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जो छोटे निवेशकों के लिए वह दरवाजा खोल रही है, जहां वे कम पूंजी लगाकर भी बड़े-बड़े एसेट्स के कानूनी तौर पर सह-मालिक बन सकते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर यह नया निवेश मॉडल क्या है और कैसे यह आपके लिए मुनाफे का सौदा साबित हो सकता है.

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क्या है फ्रैक्शनल ओनरशिप जो बदल रही है निवेश की परिभाषा

दरअसल, फ्रैक्शनल ओनरशिप का गणित काफी सीधा और असरदार है. इसमें करोड़ों रुपये की किसी संपत्ति को छोटे-छोटे हिस्सों या शेयर में बांट दिया जाता है. इसका मतलब यह है कि अब 50 करोड़ रुपये की किसी बिल्डिंग को खरीदने के लिए आपको खुद 50 करोड़ लगाने की जरूरत नहीं है. बल्कि 100 लोग मिलकर अगर 10–10 लाख रुपये का निवेश करें, तो वे सभी उस संपत्ति के कानूनी सह-मालिक बन सकते हैं.

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खास बात यह है कि यह मॉडल केवल ऑफिस स्पेस तक सीमित नहीं है, बल्कि वाणिज्यिक, औद्योगिक  और आवासीय रियल एस्टेट पर भी लागू होता है. उदाहरण के तौर पर कई ऐसे प्लेटफॉर्म हैं, जो गुरुग्राम, नोएडा, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों के सबसे प्राइम लोकेशन्स पर स्थित 'ग्रेड-ए' प्रोजेक्ट्स पर फोकस करते हैं.  इसका सीधा मतलब यह है कि आम निवेशक भी अब उन पॉश इलाकों और शानदार बिल्डिंग्स में हिस्सेदारी पा सकते हैं, जहां निवेश करना कभी सिर्फ बड़े रईसों या कॉर्पोरेट घरानों का सपना हुआ करता था. 

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टाइमशेयर से बिल्कुल अलग क्यों है यह मॉडल?

अक्सर लोग फ्रैक्शनल ओनरशिप को पुराने टाइमशेयर मॉडल से जोड़कर देख लेते हैं, जबकि दोनों में बड़ा फर्क है. टाइमशेयर में आप सिर्फ कुछ दिनों के लिए प्रॉपर्टी इस्तेमाल करने का अधिकार खरीदते हैं, लेकिन फ्रैक्शनल ओनरशिप में आप उस संपत्ति के कानूनी हिस्सेदार बनते हैं. यहां किराये से होने वाली कमाई सीधे आपके निवेश के अनुपात में मिलती है.

हालांकि, यह समझना भी जरूरी है कि फ्रैक्शनल रियल एस्टेट का मॉडल और उसकी शर्तें अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर अलग हो सकती हैं. यही वजह है कि विशेषज्ञ किसी भी प्लेटफॉर्म पर निवेश करने से पहले पूरी जांच-पड़ताल की सलाह देते हैं. अगर आप सही जानकारी और सावधानी के साथ आगे बढ़ते हैं, तो यह निवेश मॉडल आपकी वेल्थ क्रिएशन की जर्नी में एक गेम चेंजर साबित हो सकता है.

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