दफ्तर से दूरी अब मजबूरी नहीं! जानिए WFH ने कैसे बदली होम-बायर्स की पसंद

कोरोना काल के बाद जिस रिमोट वर्किंग को महज एक अस्थायी व्यवस्था माना जा रहा था, वह आज 'हाइब्रिड मॉडल' के रूप में महानगरों की स्थायी जीवनशैली बन चुका है. इसने नौकरीपेशा लोगों को दफ्तर के करीब रहने की पुरानी मजबूरी से पूरी तरह आजाद कर दिया है.

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पीएम मोदी ने लोगों से की थी घर से काम करने की अपील (Photo-Pexels) पीएम मोदी ने लोगों से की थी घर से काम करने की अपील (Photo-Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:23 AM IST

पश्चिम एशिया में बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से पेट्रोल-डीजल बचाने, फिजूलखर्ची रोकने और संभव हो तो घर से ही काम करने की अपील की थी. भले ही इस अपील का तात्कालिक मकसद मौजूदा संकट से निपटना हो, लेकिन यह उस ट्रेंड को और मजबूत कर रहा है, जो पिछले कुछ समय से भारत के होम-बायर्स की पसंद और पूरे रियल एस्टेट मार्केट को चुपके से बदल रहा है.

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कोरोना महामारी के बाद जब दफ्तर दोबारा खुले, तब अधिकांश विश्लेषकों का मानना था कि रिमोट वर्किंग महज एक अस्थायी व्यवस्था थी, हालांकि, समय के साथ 'हाइब्रिड वर्किंग मॉडल' कॉर्पोरेट जगत का एक स्थायी हिस्सा बन गया है. अब यह केवल कर्मचारियों की सहूलियत का साधन नहीं, बल्कि परिचालन लागत घटाने की राष्ट्रीय आवश्यकता बन चुका है. यही कारण है कि यह मॉडल अब सीधे तौर पर भारत, विशेषकर दिल्ली-एनसीआर, के रियल एस्टेट मार्केट के डिमांड और ट्रेंड को पूरी तरह नियंत्रित कर रहा है.

हालिया बाजार सर्वेक्षणों और रियल एस्टेट विशेषज्ञों द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर (नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद) में घर खरीदने वाले लगभग 40 प्रतिशत ग्राहक अब ऐसे आवासों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जहां काम करने के लिए अलग से एक समर्पित जगह या स्टडी रूम हो.

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अब खरीदार केवल बेडरूम और लिविंग रूम की संख्या नहीं देख रहे, बल्कि वे घर के भीतर एक ऐसा पेशेवर और शांत कोना चाहते हैं जहां बिना किसी बाधा के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और आधिकारिक कार्य निपटाए जा सकें. हाइब्रिड मॉडल के कारण कामकाजी पेशेवर सप्ताह का आधा समय घर पर बिताते हैं, जिससे उनकी मानसिक और व्यावसायिक उत्पादकता सीधे तौर पर उनके घर के लेआउट पर निर्भर हो गई है.

2 BHK से 2.5 और 3 BHK का सफर

इस हाइब्रिड जीवनशैली ने मध्यमवर्गीय परिवारों की प्राथमिकताओं को बुनियादी रूप से बदल दिया है, पहले जहां दिल्ली-एनसीआर के मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए 2 BHK सबसे आदर्श और किफायती विकल्प माना जाता था, वहीं अब बाजार में 2.5 BHK और 3 BHK फ्लैटों की मांग में भारी उछाल आया है.

खरीदार अब अपने बजट को थोड़ा बढ़ाकर अतिरिक्त स्पेस में निवेश करने को तैयार हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि लंबे समय में यह निवेश उनके सफर के समय और ईंधन के खर्च को बचाएगा. रियल एस्टेट डेवलपर्स के अनुसार, पिछले दो तिमाहियों में लॉन्च हुए नए प्रोजेक्ट्स में 2.5 BHK और कस्टमाइजेबल 3 BHK के नक्शों को सबसे ज्यादा बुकिंग मिली है.

यह भी पढ़ें: क्या काले धन को खपाने का जरिया है रियल एस्टेट, रेरा पर क्यों नहीं है लोगों को भरोसा!

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हाइब्रिड वर्किंग मॉडल का एक और बड़ा प्रभाव यह हुआ है कि अब घर का मुख्य कमर्शियल हब या दफ्तर के बिल्कुल नजदीक होना अनिवार्य नहीं रह गया है. चूंकि कर्मचारियों को हर दिन दफ्तर नहीं जाना पड़ता इसलिए वे मुख्य शहर की भीड़भाड़ और अत्यधिक महंगी प्रॉपर्टी से दूर उपनगरीय या बाहरी क्षेत्रों में बड़े और किफायती घर खरीदना पसंद कर रहे हैं.

उदाहरण के लिए, दिल्ली-एनसीआर में नोएडा एक्सटेंशन, यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित हो रहे सेक्टर्स और गुरुग्राम के नए उपनगरीय सेक्टर्स में प्रॉपर्टी की सेल तेजी से बढ़ी है. खरीदार समान बजट में शहर के केंद्र में छोटा घर लेने के बजाय, बाहरी इलाकों में बड़ा घर लेना पसंद कर रहे हैं, जो उन्हें बेहतर लाइफस्टाइल और काम के लिए अतिरिक्त स्पेस देता है.

उपभोक्ताओं के इस बदलते व्यवहार को देखते हुए रियल एस्टेट डेवलपर्स और आर्किटेक्ट्स ने भी अपने नए प्रोजेक्ट्स के लेआउट को पूरी तरह री-डिजाइन करना शुरू कर दिया है. अब नए हाउसिंग सोसाइटीज में केवल स्विमिंग पूल या जिम जैसी विलासिता की चीजें ही नहीं दी जा रही हैं, बल्कि कुछ बुनियादी सुविधाओं को अनिवार्य रूप से शामिल किया जा रहा है.

  • हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड और फाइबर कनेक्टिविटी: वर्क फ्रॉम होम को सुचारू बनाने के लिए.
  • 100% पावर बैकअप: ऑनलाइन बैठकों और काम के दौरान बिजली कटौती से बचने के लिए.
  • इन-बिल्ट बिजनेस लाउंज और को-वर्किंग स्पेस: सोसायटी के क्लब हाउस के भीतर ही छोटे वर्किंग पॉड्स या कॉन्फ्रेंस रूम्स का निर्माण किया जा रहा है.

 

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आने वाले समय में रियल एस्टेट मार्केट का रुख पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगा कि संपत्तियां कामकाजी पेशेवरों की इस दोहरी जरूरत को कितनी कुशलता से पूरा करती हैं. 

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