बेंगलुरु के एक टेक प्रोफेशनल की सोशल मीडिया पोस्ट ने इन दिनों रियल एस्टेट और हाउसिंग अफोर्डेबिलिटी पर एक नई बहस छेड़ दी है. हाल ही में एक बड़ी टेक कंपनी से छंटनी का शिकार हुए इस युवक ने साझा किया कि नौकरी जाने के बावजूद उसे कोई 'तत्काल तनाव' नहीं है, क्योंकि उसने ईएमआई (EMI) पर घर खरीदने के बजाय ऑफिस के पास किराए पर रहने का फैसला किया था.
सक्षम होने के बावजूद ₹2 करोड़ का घर न खरीदने के अपने फैसले को सही ठहराते हुए उसने लिखा कि वह एआई (AI) माइग्रेशन की टीम में काम कर रहा था, इसलिए उसे आने वाले 2-3 सालों के खतरों का आभास था. उसने 1 घंटा दूर घर लेकर भारी-भरकम ईएमआई चुकाने के बजाय किराए के घर को चुना, ताकि वह बिना किसी वित्तीय बोझ के अपने करियर के अगले कदम पर ध्यान केंद्रित कर सके.
युवक ने तर्क दिया कि बेंगलुरु में घरों की मांग का एक बड़ा हिस्सा आईटी कर्मचारियों से जुड़ा है, जो आसान कर्ज और लंबी अवधि की आय स्थिरता पर निर्भर हैं. अनुमान के मुताबिक, ऐसे 70-80% खरीदार सर्विस-बेस्ड कंपनियों में कार्यरत हैं, जिनकी भूमिकाएं अगले तीन से पांच वर्षों में तेजी से ऑटोमेशन की चपेट में आ सकती हैं.
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सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
रेडिट पर अन्य यूजर्स ने भी इस पर सहमति जताते हुए कहा कि वैश्विक संघर्ष एआई का बढ़ता प्रभाव और घरों की बढ़ती सप्लाई के कारण कई खरीदार फिलहाल घर खरीदने का फैसला टाल रहे हैं और अगले दो साल तक 'इंतजार करने' की नीति अपना रहे हैं.
रेडिट पर इस चर्चा में शामिल अन्य यूजर्स ने भी अपनी आपबीती और डर साझा किए. एक यूजर ने लिखा, "वैश्विक युद्ध, एआई (AI) का बढ़ता चलन और घरों की भारी सप्लाई इन सब को देखते हुए मैं अगले 2 साल और इंतजार करना बेहतर समझता हूं. अगर कीमतें फिर से बढ़ भी गईं, तो मुझे मलाल नहीं होगा, लेकिन अभी निवेश न करने का सबसे बड़ा फायदा 'मानसिक शांति' है, जो कि घर न खरीद पाने के काल्पनिक डर से कहीं ज्यादा कीमती है."
एक अन्य खरीदार ने भी इसी तरह की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा, "सच कहूं तो मैं भी लगभग ऐसी ही स्थिति में था. मैंने ₹3 करोड़ की एक प्रॉपर्टी फाइनल कर ली थी, लेकिन जिस तरह से एआई (AI) आगे बढ़ा है, मैं साफ देख सकता हूं कि अगर मेरी टीम आधी भी कर दी जाए, तो हमारे काम पर कोई असर नहीं पड़ेगा. इसलिए मैंने फिलहाल रुकने और हालात देखने का फैसला किया है."
वहीं, एक और यूजर ने अपनी आपबीती सुनाते हुए लिखा, "यह बिल्कुल मेरी सोच जैसा है. कुछ महीने पहले मैं घर खरीदने के बेहद करीब था, कानूनी कागजी कार्रवाई भी पूरी हो चुकी थी, लेकिन उसी दौरान मेरी छंटनी हो गई. शुक्र है कि मैंने कदम पीछे खींच लिए और अपने अगले जॉब की तैयारी की, जो मुझे जल्दी मिल भी गई. मैं कल्पना भी नहीं कर सकता कि अगर मेरे सिर पर भारी-भरकम ईएमआई (EMI) का बोझ होता, तो मैं उस समय कितने तनाव में होता.'
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