विदेशी कंपनियों की पहली पसंद बना भारत, ऑफिस स्पेस में रिकॉर्ड तोड़ निवेश

ऑफिस स्पेस की बढ़ती मांग जिस तेजी से बढ़ी है, वह देश की मजबूत आर्थिक स्थिति और वैश्विक कंपनियों के बढ़ते भरोसे का प्रतीक है. अब कंपनियां सिर्फ 'काम करने की जगह' नहीं, बल्कि ऐसे इंटीग्रेटेड कैंपस और ग्रीन बिल्डिंग्स की तलाश में हैं जो कर्मचारियों को बेहतर अनुभव और पर्यावरण के अनुकूल माहौल दें.

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देश के 4 शहरों में सबसे ज्यादा ऑफिस स्पेस लीज पर लिए गए (Photo-ITG) देश के 4 शहरों में सबसे ज्यादा ऑफिस स्पेस लीज पर लिए गए (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 18 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 12:56 PM IST

भारत के रियल एस्टेट सेक्टर से एक बड़ी खबर है. 2026 तक देश में ऑफिस स्पेस का कुल दायरा 100 करोड़ (1 बिलियन) वर्ग फुट के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर सकता है. यह दिखाता है कि भारत में कारोबार और कंपनियों का विस्तार कितनी तेजी से हो रहा है, रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म CBRE की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, 2026-27 के दौरान जितने भी नए दफ्तर बनेंगे, उनमें से करीब 65% से 68% हिस्सेदारी बड़े टेक्नोलॉजी पार्क्स की होगी.

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भारत के कमर्शियल रियल एस्टेट सेक्टर के लिए साल 2025 एक ऐतिहासिक साल साबित हुआ है, यहां ऑफिस स्पेस की डिमांड और सप्लाई दोनों ने अब तक के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. CBRE की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल कुल 8.31 करोड़ वर्ग फुट ऑफिस स्पेस लीज पर लिया गया, जो लगातार तीसरे साल रिकॉर्ड मांग को दर्शाता है.

वहीं, नई सप्लाई भी 10% की सालाना बढ़त के साथ 5.89 करोड़ वर्ग फुट के ऑल-टाइम हाई स्तर पर पहुंच गई है. इस पूरे मार्केट में बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली-एनसीआर और हैदराबाद का दबदबा बरकरार है, क्योंकि कुल लीजिंग एक्टिविटी का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा इन्हीं चार शहरों से आया है.

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विदेशी कंपनियों का दबदबा

भविष्य के रुझानों की बात करें तो अब कंपनियों की पसंद 'क्वालिटी और सस्टेनेबिलिटी' की ओर तेजी से बढ़ रही है. 2026-27 में आने वाली कुल ऑफिस सप्लाई का लगभग 45% हिस्सा 'ग्रेड-ए' संपत्तियों का होगा, जो अपनी विश्वस्तरीय सुविधाओं के लिए जानी जाती हैं. इसके साथ ही, पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता का असर भी साफ दिख रहा है.

साल 2025 में तैयार हुए कुल ऑफिस स्पेस में से 87% 'ग्रीन-सर्टिफाइड' बिल्डिंग्स थीं. यह बदलाव न केवल आधुनिक कार्यशैली को दर्शाता है, बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर में ईको-फ्रेंडली निर्माण की मजबूत पकड़ को भी पुख्ता करता है. 

भारत के ऑफिस मार्केट में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) यानी विदेशी कंपनियों के स्थानीय केंद्रों की भूमिका सबसे अहम रही है. साल 2025 के दौरान कुल लीजिंग में इन सेंटर्स की हिस्सेदारी लगभग 39% रही, जो 3.28 करोड़ (32.8 मिलियन) वर्ग फुट के बराबर है. इसमें भी बेंगलुरु, हैदराबाद और दिल्ली-एनसीआर का दबदबा साफ दिखा, क्योंकि अकेले इन तीन शहरों ने कुल GCC लीजिंग का 69% हिस्सा अपने नाम किया. यह इन शहरों में मौजूद बेहतरीन टैलेंटऔर मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर का ही नतीजा है.

CBRE की रिपोर्ट के अनुसार, अब ये GCCs सिर्फ सामान्य काम नहीं कर रहे, बल्कि इनका ध्यान रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) और प्रोडक्ट ओनरशिप जैसे उच्च-स्तरीय कामों पर बढ़ गया है. दिलचस्प बात यह है कि साल 2020 के बाद से R&D आधारित केंद्रों की संख्या सामान्य केंद्रों के मुकाबले 1.3 गुना तेजी से बढ़ी है. काम करने के तरीके में आ रहे इस बदलाव की वजह से अब ऐसे इंटीग्रेटेड टेक पार्क्स की मांग और बढ़ने वाली है जो बड़े पैमाने पर काम करने की सुविधा, लचीलापन और आधुनिक बुनियादी ढांचा प्रदान करते हैं.
 

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