देश के बड़े शहरों में मेट्रो ने न सिर्फ लोगों के सफर को आसान बनाया है बल्कि उनको आर्थिक रुप से भी मजबूत किया है. प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) की रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि मेट्रो के पास रहने वाले लोग न केवल समय बचा रहे हैं, बल्कि अपने बैंक लोन और ईएमआई को लेकर भी पहले से कहीं ज्यादा अनुशासित हुए हैं.
अक्सर माना जाता है कि बुनियादी ढांचे के विकास से केवल नौकरियां पैदा होती हैं, लेकिन यह रिपोर्ट एक अलग ही कहानी बयां करती है. रिपोर्ट के अनुसार, मेट्रो कनेक्टिविटी ने परिवारों के आर्थिक व्यवहार ' को बदल दिया है. मेट्रो कॉरिडोर के करीब रहने वाले लोग अब अपने होम लोन की किश्तें समय पर चुका रहे हैं और बड़ी संख्या में लोग अपना कर्ज समय से पहले खत्म कर रहे हैं.
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क्यों कम हो रहा है लोन का बोझ?
रिपोर्ट में ये तर्क दिया गया है कि जब किसी इलाके में मेट्रो आती है, तो निजी वाहनों से आजादी से मिल जाती है, लोग कार या बाइक की जगह मेट्रो का उपयोग करने लगते हैं, जिससे पेट्रोल और डीजल की बचत होती है. गाड़ियों के रखरखाव पर होने वाला मोटा खर्च बच जाता है. यात्रा के खर्च में होने वाली इस बचत को मध्यमवर्गीय परिवार अपने सबसे बड़े वित्तीय बोझ यानी होम लोन को कम करने में लगा रहे हैं.
दिल्ली, बेंगलुरु और हैदराबाद में दिखा असर
इस रिपोर्ट में 'होम-लोन लेवल डेटा' के जरिए तीन प्रमुख महानगरों का विश्लेषण किया गया है. आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में मेट्रो कनेक्टिविटी का सबसे बड़ा असर कर्ज चुकाने की आदतों पर पड़ा है, जहां होम लोन की किश्तों में चूक (Delinquency) में 4.42% की भारी कमी आई है, साथ ही समय से पहले लोन चुकाने के मामलों में भी 1.38% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
इसी तरह, बेंगलुरु में भी लोन प्री-पेमेंट के मामलों में 3.50% का बड़ा उछाल आया है, जबकि लोन चूक के मामलों में 2.40% की गिरावट आई है. हैदराबाद की बात करें तो यहां भी मेट्रो का जादू चला है, जहां लोगों द्वारा समय से पहले कर्ज चुकाने की गतिविधि में 1.80% का इजाफा हुआ है और किश्तें बाउंस होने की दर में 1.70% की कमी देखी गई है. ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि मेट्रो कॉरिडोर न केवल सफर आसान बना रहे हैं, बल्कि शहरी परिवारों की वित्तीय स्थिति को भी मजबूती दे रहे हैं.
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