'राहुल नहीं आ रहे हैं,' एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति ने पार्टी कार्यकर्ताओं के ग्रुप की ओर चिल्लाकर कहा. उनकी निराशा साफ झलक रही थी. भीषण गर्मी के बीच, कोझिकोड बीच पर समर्थक विपक्ष के नेता नेता राहुल गांधी का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, जो वहां कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ (UDF) की 'महा रैली' को संबोधित करने वाले थे.
AICC की ओर से इस बात की पुष्टि की गई कि सोनिया गांधी के अस्पताल में भर्ती होने के कारण राहुल गांधी रैली में शामिल नहीं हो पाएंगे. उनकी जगह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे इस कार्यक्रम में शिरकत करेंगे.
जब यह सूचना मिली, उस समय हम कोझिकोड के नवनिर्मित डीसीसी (DCC) ऑफिस में मौजूद थे. कांग्रेस सांसद शफी परम्बिल काफी चिंतित नजर आए क्योंकि शाम के कार्यक्रम के लिए हजारों लोग पहले ही बीच पर पहुंच चुके थे. उन्होंने हमें एक वीडियो दिखाते हुए कहा, "इस वीडियो के व्यूज देखिए," जिसमें वह कांग्रेस कार्यकर्ताओं को इस कार्यक्रम में आमंत्रित कर रहे थे. उन्होंने कहा, "वे निराश होंगे." जैसे ही सभी प्रमुख क्षेत्रीय समाचार चैनलों के टिकर पर यह खबर फ्लैश होने लगी, राज्य नेतृत्व इस बात को लेकर चिंतित हो गया कि क्या अब भी पर्याप्त संख्या में लोग वहां जुटेंगे.
जब हम शाम 4 बजे कोझिकोड बीच पहुंचे, तो लोग धीरे-धीरे जुटने लगे थे और करीब 5 बजे तक कार्यक्रम स्थल पूरी तरह भर चुका था. एक युवा यूडीएफ (UDF) कार्यकर्ता ने कहा, "हम राहुल गांधी को देखना चाहते थे, लेकिन कोई बात नहीं. हमारे अध्यक्ष आ रहे हैं."
वहीं एक अन्य बुजुर्ग पार्टी समर्थक, जिनका उत्साह काफी ऊंचा नजर आ रहा था, उन्होंने कहा, "यह मुद्दा नहीं है कि राहुल गांधी आ रहे हैं या नहीं. हम यहां पार्टी के लिए हैं. हम चाहते हैं कि इस चुनाव में यूडीएफ किसी भी कीमत पर जीत हासिल करे." मल्लिकार्जुन खड़गे नारों की गूंज के बीच वहां पहुंचे और कार्यक्रम की शुरुआत हुई. इस बीच, जमीनी हकीकत और लोगों का मिजाज समझने के लिए मैं समर्थकों के उस हुजूम के बीच पहुंची.
मैंने सवाल किया, "इस चुनाव में वह कौन सा एक सबसे बड़ा फैक्टर है जो लेफ्ट के खिलाफ काम करेगा?
एक कार्यकर्ता ने कहा, "कई मुद्दे हैं, किसी एक का नाम नहीं ले सकते."
सबरीमाला?" मैंने पूछा. उन्होंने जवाब दिया, "सबरीमाला, बढ़ती कीमतें, बेरोजगारी, सब कुछ. यह पिनाराई विजयन के शासन का अंत होगा."
मेरा अगला सवाल एक दूसरे समूह से था जो काफी उत्साहित दिख रहा था, "कांग्रेस को कितनी सीटें मिलेंगी?" उनमें से कई लोग मेरे माइक और कैमरे की ओर चिल्लाते हुए बोले, "110!"
अगला मुख्यमंत्री कौन होगा?
"पहले हमें जीतने दो, मुख्यमंत्री का फैसला बाद में हो सकता है. पिनाराई सरकार को जाना चाहिए. पिनाराई की हार होनी चाहिए," वे चिल्लाए, वहीं एक दूसरे समूह ने "वी.डी. सतीशन" के नाम के नारे लगाए. बीच में टोकते हुए एक बुजुर्ग व्यक्ति ने कहा, "इनमें से कोई भी बात चिंता का विषय नहीं है. पिनाराई की हार हमारी प्राथमिकता है."
पार्टी कार्यकर्ताओं में नेताओं की तुलना में कहीं अधिक समझ नज़र आ रही थी.एक बात जो मैंने गौर की, वह यह थी कि समर्थक एलडीएफ (LDF) सरकार या सीपीआईएम (CPIM) से ज्यादा पिनाराई विजयन का नाम ले रहे थे. ऐसा लग रहा था कि कांग्रेस की प्रतिद्वंद्विता सीधे तौर पर पिनाराई विजयन से है.
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने अपने भाषण और कविताओं से दर्शकों का दिल जीत लिया. दोनों पक्षों के बीच संवाद में एक सहजता थी. जब खड़गे बोलने आए, तो शफी परम्बिल उनके अनुवादक थे. यह एक दुर्लभ दृश्य था जब वक्ता से ज्यादा तालियां और उत्साह अनुवादक के लिए देखने को मिला. केरल के इस हिस्से में शफी परम्बिल की यही छवि है, जिसे उन्होंने अपने सफल लोकसभा अभियान के बाद बनाया है. वह एक 'स्टार राजनेता' हैं, जिन्हें समर्थक सेल्फी और हाथ मिलाने के लिए घेरे रहते हैं.
शफी ने घोषणा की, "हमारे प्रिय राहुल जी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हमसे बात करेंगे." खड़गे और राहुल के भाषण लगभग एक जैसे थे. उन्होंने समान विषयों को छुआ और मुख्य रूप से मुख्यमंत्री पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि सीपीआईएम और भाजपा के बीच एक "अपवित्र सांठगांठ" है, जिसे उन्होंने 'सीजेपी' (कम्युनिस्ट जनता पार्टी) का नाम दिया.
जैसे ही राहुल ने अपना संबोधन समाप्त किया, भीड़ धीरे-धीरे छंटने लगी. हालांकि, बीच पर अब भी काफी भीड़ थी. पिछले 20 से अधिक सालों से कोझिकोड कांग्रेस के लिए एक अनजाना क्षेत्र बना हुआ है, उन्होंने कोझिकोड में एक भी सीट नहीं जीती है और इस जिले से जो भी योगदान मिलता है, वह आईयूएमएल (IUML) के माध्यम से आता है. यहां की कुल 13 सीटों में से 11 फिलहाल सत्तारूढ़ एलडीएफ (LDF) के पास हैं.
'ओह, एक घोषणा है', मंच से एक आवाज गूंजी “इस बार कोझिकोड में हम 13 में से 13 जीतेंगे”, पार्टी के एक नेता ने ऐलान किया.
वहां से निकलते समय मैंने सोचा कि यह घोषणा जितनी आसान है, हकीकत वैसी नहीं है, वहां ऐसे पोस्टर लगे थे जिनमें वी.डी. सतीशन और के.सी. वेणुगोपाल के मुकाबले रमेश चेन्नीथला को प्रमुखता दी गई थी. ये तीनों ही कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं. और यह 'पोस्टर वॉर' उस तीव्र आंतरिक कलह का संकेत है. यही कारण है कि मैंने कहा कि यह मुकाबला इतना आसान नहीं रहने वाला.
शिबिमोल