ईरान युद्ध के कारण पैदा हुई आर्थिक अनिश्चितता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब भारतीयों से गैरजरूरी विदेशी यात्राओं से बचने, ईंधन बचाने और फिजूलखर्ची कम करने की अपील की है, ऐसे में लक्षद्वीप पर्यटन की कहानी इसका एक हालिया उदाहरण पेश करती है कि लोग उनकी सार्वजनिक अपीलों और संदेशों पर कितनी मजबूती से प्रतिक्रिया देते हैं.
इंडिया टुडे द्वारा आरटीआई (RTI) के तहत हासिल किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि लक्षद्वीप में पर्यटकों की संख्या साल 2020 में महज 3,875 थी, जो 2024 में बढ़कर रिकॉर्ड 68,328 पर पहुंच गई. पर्यटकों की संख्या में यह सबसे बड़ा उछाल जनवरी 2024 में पीएम मोदी के द्वीप दौरे के बाद आया, जब उन्होंने वहां के समुद्र तटों और पर्यटन क्षमता को उजागर करने वाली तस्वीरें और वीडियो पोस्ट किए थे.
उनके इस दौरे के बाद तब एक राजनयिक विवाद भी खड़ा हो गया था, जब मालदीव के कुछ मंत्रियों ने इंटरनेट पर पीएम मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां की थीं. इन टिप्पणियों के कारण भारत में भारी आक्रोश फैल गया था, मालदीव के बहिष्कार की मांग उठने लगी थी और एक बड़ा अभियान शुरू हो गया था, जिसमें भारतीयों को विदेशी द्वीपों के बजाय लक्षद्वीप चुनने के लिए प्रेरित किया गया था. आंकड़े बताते हैं कि कई लोगों ने वास्तव में उस संदेश पर ध्यान दिया और उस पर अमल किया है.
भारतीयों का पसंदीदा डेस्टिनेशन बना लक्षद्वीप
लक्षद्वीप में पर्यटकों की संख्या साल 2023 के 46,551 से बढ़कर 2024 में 68,328 हो गई, जो एक साल के भीतर लगभग 47 प्रतिशत का उछाल है. ठीक इसी समय, मालदीव जाने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट देखी गई. मालदीव के पर्यटन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मालदीव पहुंचने वाले भारतीयों की संख्या साल 2023 के 2,09,193 से घटकर 2024 में 1,30,805 रह गई, जो कि 37.5 प्रतिशत की गिरावट है. भारत, जो कभी मालदीव के शीर्ष पर्यटन बाजारों में से एक था, आगंतुकों की हिस्सेदारी के मामले में खिसककर छठे स्थान पर आ गया.
यह विपरीत रुझान हाल के वर्षों में इस बात का सबसे स्पष्ट उदाहरण बन गया कि कैसे पीएम मोदी के सार्वजनिक संदेशों ने उपभोक्ताओं के व्यवहार और यात्रा के विकल्पों को प्रभावित किया. मोदी के लक्षद्वीप पोस्ट के बाद मशहूर हस्तियों, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और ट्रैवल प्लेटफॉर्म्स ने इस अभियान को और बढ़ावा दिया. सोशल मीडिया पर विदेश यात्रा करने के बजाय भारतीय गंतव्यों को तलाशने की अपीलों की बाढ़ आ गई. लक्षद्वीप, जो मालदीव जैसी समानताएं होने के बावजूद लंबे समय तक अपेक्षाकृत अविकसित रहा था, अचानक राष्ट्रीय पर्यटन का एक प्रतीक बन गया.
यह मामला अब इसलिए फिर से चर्चा में है, क्योंकि ईरान युद्ध की वजह से दुनिया भर में जो अनिश्चितता बनी है, उसके बीच पीएम मोदी ने भारतीयों से अपनी आदतें बदलने को कहा है. पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील की है कि वे बिना वजह विदेश यात्रा न करें, पेट्रोल-डीजल कम खर्च करें, सरकारी बसों-ट्रेनों का इस्तेमाल करें और सोने की खरीदारी को कुछ समय के लिए टाल दें, ताकि देश का विदेशी मुद्रा भंडार बचा रहे.
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लक्षद्वीप के उदाहरण से पता चलता है कि जब मोदी देशहित से जुड़ी कोई अपील करते हैं, तो आम जनता की सोच और आदतों में इसका सीधा असर देखने को मिलता है. एक मजेदार बात यह है कि आरटीआई (RTI) के जवाब में सरकार ने 2024 तक के आंकड़े तो विस्तार से दिए हैं, लेकिन साल 2026 में अर्जी दिए जाने के बावजूद 2025 के आंकड़े शेयर नहीं किए हैं. मोदी के दौरे के बाद पर्यटकों की संख्या में जो भारी उछाल आया था, उसे देखते हुए इस नए डेटा का न मिलना काफी हैरान करने वाला है.
अशोक उपाध्याय