क्या भारतीय पीएम मोदी की बात सुनते हैं, लक्षद्वीप के आंकड़े दे रहे हैं गवाही

क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील भारतीयों का व्यवहार बदल देती है. लक्षद्वीप पर्यटन के रिकॉर्ड आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि जब पीएम मोदी ने राष्ट्रवाद को आर्थिक अपील से जोड़ा, तो मालदीव का बाजार धड़ाम हो गया और लक्षद्वीप का भाग्य बदल गया.

Advertisement
पीएंम ने लोगों को विदेश यात्रा कम करने की अपील की है (Pexels) पीएंम ने लोगों को विदेश यात्रा कम करने की अपील की है (Pexels)

अशोक उपाध्याय

  • नई दिल्ली,
  • 18 मई 2026,
  • अपडेटेड 5:52 PM IST

ईरान युद्ध के कारण पैदा हुई आर्थिक अनिश्चितता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब भारतीयों से गैरजरूरी विदेशी यात्राओं से बचने, ईंधन बचाने और फिजूलखर्ची कम करने की अपील की है, ऐसे में लक्षद्वीप पर्यटन की कहानी इसका एक हालिया उदाहरण पेश करती है कि लोग उनकी सार्वजनिक अपीलों और संदेशों पर कितनी मजबूती से प्रतिक्रिया देते हैं.

इंडिया टुडे द्वारा आरटीआई (RTI) के तहत हासिल किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि लक्षद्वीप में पर्यटकों की संख्या साल 2020 में महज 3,875 थी, जो 2024 में बढ़कर रिकॉर्ड 68,328 पर पहुंच गई. पर्यटकों की संख्या में यह सबसे बड़ा उछाल जनवरी 2024 में पीएम मोदी के द्वीप दौरे के बाद आया, जब उन्होंने वहां के समुद्र तटों और पर्यटन क्षमता को उजागर करने वाली तस्वीरें और वीडियो पोस्ट किए थे.

Advertisement

उनके इस दौरे के बाद तब एक राजनयिक विवाद भी खड़ा हो गया था, जब मालदीव के कुछ मंत्रियों ने इंटरनेट पर पीएम मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां की थीं. इन टिप्पणियों के कारण भारत में भारी आक्रोश फैल गया था, मालदीव के बहिष्कार की मांग उठने लगी थी और एक बड़ा अभियान शुरू हो गया था, जिसमें भारतीयों को विदेशी द्वीपों के बजाय लक्षद्वीप चुनने के लिए प्रेरित किया गया था. आंकड़े बताते हैं कि कई लोगों ने वास्तव में उस संदेश पर ध्यान दिया और उस पर अमल किया है.

भारतीयों का पसंदीदा डेस्टिनेशन बना लक्षद्वीप

लक्षद्वीप में पर्यटकों की संख्या साल 2023 के 46,551 से बढ़कर 2024 में 68,328 हो गई, जो एक साल के भीतर लगभग 47 प्रतिशत का उछाल है. ठीक इसी समय, मालदीव जाने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट देखी गई. मालदीव के पर्यटन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मालदीव पहुंचने वाले भारतीयों की संख्या साल 2023 के 2,09,193 से घटकर 2024 में 1,30,805 रह गई, जो कि 37.5 प्रतिशत की गिरावट है. भारत, जो कभी मालदीव के शीर्ष पर्यटन बाजारों में से एक था, आगंतुकों की हिस्सेदारी के मामले में खिसककर छठे स्थान पर आ गया.

Advertisement

यह विपरीत रुझान हाल के वर्षों में इस बात का सबसे स्पष्ट उदाहरण बन गया कि कैसे पीएम मोदी के सार्वजनिक संदेशों ने उपभोक्ताओं के व्यवहार और यात्रा के विकल्पों को प्रभावित किया. मोदी के लक्षद्वीप पोस्ट के बाद मशहूर हस्तियों, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और ट्रैवल प्लेटफॉर्म्स ने इस अभियान को और बढ़ावा दिया. सोशल मीडिया पर विदेश यात्रा करने के बजाय भारतीय गंतव्यों को तलाशने की अपीलों की बाढ़ आ गई. लक्षद्वीप, जो मालदीव जैसी समानताएं होने के बावजूद लंबे समय तक अपेक्षाकृत अविकसित रहा था, अचानक राष्ट्रीय पर्यटन का एक प्रतीक बन गया.

यह मामला अब इसलिए फिर से चर्चा में है, क्योंकि ईरान युद्ध की वजह से दुनिया भर में जो अनिश्चितता बनी है, उसके बीच पीएम मोदी ने भारतीयों से अपनी आदतें बदलने को कहा है. पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील की है कि वे बिना वजह विदेश यात्रा न करें, पेट्रोल-डीजल कम खर्च करें, सरकारी बसों-ट्रेनों का इस्तेमाल करें और सोने की खरीदारी को कुछ समय के लिए टाल दें, ताकि देश का विदेशी मुद्रा भंडार बचा रहे.

यह भी पढ़ें: होम लोन की EMI नहीं चुका पाए, तो क्या सच में बैंक जब्त कर लेगा आपका घर

लक्षद्वीप के उदाहरण से पता चलता है कि जब मोदी देशहित से जुड़ी कोई अपील करते हैं, तो आम जनता की सोच और आदतों में इसका सीधा असर देखने को मिलता है. एक मजेदार बात यह है कि आरटीआई (RTI) के जवाब में सरकार ने 2024 तक के आंकड़े तो विस्तार से दिए हैं, लेकिन साल 2026 में अर्जी दिए जाने के बावजूद 2025 के आंकड़े शेयर नहीं किए हैं. मोदी के दौरे के बाद पर्यटकों की संख्या में जो भारी उछाल आया था, उसे देखते हुए इस नए डेटा का न मिलना काफी हैरान करने वाला है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement