भारत के महानगरों में लग्जरी घरों की चाहत अब न केवल महंगी हो गई है, बल्कि निवेशकों की जेब पर भी भारी पड़ रही है. वैश्विक स्तर पर बढ़ती महंगाई और रियल एस्टेट की आसमान छूती कीमतों ने डॉलर की क्रय शक्ति को सीमित कर दिया है, जिससे अब करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी पॉश इलाकों में पहले जैसी बड़ी जगह मिलना मुश्किल हो गया है.
नाइट फ्रैंक के 'प्राइम इंटरनेशनल रेजिडेंशियल इंडेक्स' (PIRI 100) के आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि भारत में लग्जरी घरों का बाजार अब पहले से कहीं अधिक महंगा हो गया है, हालांकि वैश्विक स्तर पर यह अब भी मोनाको, हांगकांग और जिनेवा जैसे शहरों की तुलना में काफी किफायती बना हुआ है.
सालाना आधार पर तुलना करें तो भारत के तीनों प्रमुख शहरों में 10 लाख डॉलर (करीब ₹8.3 करोड़) में खरीदी जा सकने वाली जगह में गिरावट आई है. मुंबई में यह 2024 के 99 वर्ग मीटर से घटकर अब 96 वर्ग मीटर (3% की कमी) रह गई है, जबकि दिल्ली में यह 208 से घटकर 205 वर्ग मीटर और बेंगलुरु में सबसे अधिक 3.5% की गिरावट के साथ 370 से सिमटकर 357 वर्ग मीटर पर आ गई है.
गौर करने वाली बात यह है कि निवेश के दायरे में यह कमी डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में आई 5.4% की गिरावट के बावजूद दर्ज की गई है. सामान्य तौर पर मुद्रा की कमजोरी विदेशी निवेशकों की क्रय शक्ति बढ़ाती है, लेकिन भारत में प्रॉपर्टी की कीमतों में हुई जबरदस्त बढ़ोतरी ने मुद्रा के इस लाभ को पूरी तरह बेअसर कर दिया है.
यह भी पढ़ें: यूपी में टूरिज्म स्टार्टअप शुरू करने का मौका, योगी सरकार का युवाओं को तोहफा
प्रॉपर्टी की कीमतों में तेजी
भारत के प्रमुख शहरों में आवासीय संपत्तियों की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया है. मुंबई में कीमतों में 8.7% और दिल्ली में 6.9% की वृद्धि हुई, जबकि 9.4% की बढ़त के साथ बेंगलुरु इस दौड़ में सबसे आगे रहा. नतीजतन, प्रॉपर्टी की कीमतों में यह बढ़ोतरी मुद्रा की गिरावट से कहीं अधिक तेज रही, जिससे 10 लाख डॉलर में खरीदी जा सकने वाली जगह कम हो गई.
वैश्विक स्तर पर बेंगलुरु का प्रदर्शन सबसे शानदार रहा है. दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते प्राइम रेजिडेंशियल मार्केट्स (PIRI रैंकिंग) में बेंगलुरु ने 32 पायदान की लंबी छलांग लगाई है. यह 2024 के 40वें स्थान से उछलकर 2025 में 8वें स्थान पर पहुंच गया है. शहर के इस दमदार प्रदर्शन का मुख्य कारण वहां का विस्तार लेता टेक ईकोसिस्टम और 'हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स' (HNWIs) यानी अमीरों की बढ़ती तादाद है.
इसी तरह मुंबई ने भी रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार किया है और प्रीमियम व सुपर-प्राइम सेगमेंट में मजबूत मांग के चलते 21वें से 10वें स्थान पर पहुंच गया है. मुंबई में 20 लाख डॉलर (करीब ₹16.6 करोड़) से अधिक कीमत वाले घरों के सौदों में भारी इजाफा देखा गया है, जो बेहद अमीर खरीदारों के बीच लग्जरी घरों के प्रति अटूट आकर्षण को दर्शाता है.
यह भी पढ़ें: भारतीय रियल एस्टेट ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, पहली तिमाही में $ 5.1 बिलियन का निवेश
दिल्ली के बाजार में स्थिरता बनी रही, लेकिन इसके बावजूद चुनिंदा लग्जरी माइक्रो-मार्केट्स में मांग और कीमतों में निरंतर वृद्धि के चलते इसकी रैंकिंग में मामूली सुधार हुआ और यह 18वें से 17वें स्थान पर पहुंच गया. नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर शिशिर बैजल ने कहा कि भारत की बेहतर होती रैंकिंग इसके लग्जरी हाउसिंग सेगमेंट की मजबूती को दर्शाती है, जिसे आर्थिक विकास और बढ़ते धन के स्तर से समर्थन मिल रहा है. उन्होंने उल्लेख किया कि, "'हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स' (HNWIs) और 'अल्ट्रा-हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स' (UHNWIs) की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे प्रीमियम आवासीय संपत्तियों के लिए मांग निरंतर बनी हुई है.
मोनाको अब भी सबसे महंगा बाजार
वैश्विक स्तर पर, मोनाको ने दुनिया के सबसे महंगे 'प्राइम रेजिडेंशियल मार्केट' के रूप में अपना दबदबा बरकरार रखा है, जहां 10 लाख डॉलर ($1 million) में मात्र 16 वर्ग मीटर जगह ही खरीदी जा सकती है. इसके बाद हांगकांग (23 वर्ग मीटर) और जिनेवा (28 वर्ग मीटर) का स्थान आता है, जो भारतीय शहरों की तुलना में कीमतों के भारी अंतर को दर्शाता है.
लंदन (33 वर्ग मीटर), न्यूयॉर्क (34 वर्ग मीटर) और सिंगापुर (28 वर्ग मीटर) जैसे अन्य वैश्विक शहर भी भारतीय महानगरों की तुलना में काफी महंगे बने हुए हैं. हालांकि, जैसे-जैसे भारत के लग्जरी मार्केट में तेजी आ रही है, भारतीय शहरों और इन वैश्विक केंद्रों के बीच कीमतों का यह फासला धीरे-धीरे कम होता जा रहा है.
लग्जरी हाउसिंग में वैश्विक रुझानों का अंतर
नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में दुनिया भर के 100 प्रमुख बाजारों में से 73 में कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि 24 में गिरावट देखी गई, जो विभिन्न क्षेत्रों में असमान सुधार को दर्शाता है. वैश्विक स्तर पर प्राइम रेजिडेंशियल कीमतों में औसतन 3.2% की वृद्धि हुई, जिसने लगातार दूसरे वर्ष सामान्य हाउसिंग मार्केट्स (Mainstream Housing) को पीछे छोड़ दिया है.
क्षेत्रीय स्तर पर, मध्य पूर्व 9.4% की वृद्धि के साथ सबसे आगे रहा, जिसका मुख्य कारण दुबई की कीमतों में आया 25.1% का जबरदस्त उछाल है. एशिया-प्रशांत बाजारों में 3.6% और यूरोप में 3.3% की वृद्धि दर्ज की गई. वहीं, उत्तरी अमेरिका एकमात्र ऐसा क्षेत्र रहा जहां कीमतों में 0.9% की गिरावट देखी गई, जिसका कारण कनाडा के कुछ हिस्सों में जारी मंदी है.
नाइट फ्रैंक के ग्लोबल हेड ऑफ रिसर्च, लियाम बेली ने कहा कि दुनिया भर के लग्जरी हाउसिंग मार्केट्स अब व्यापक आर्थिक चक्रों के बजाय संपत्ति सृजन से अधिक प्रभावित हो रहे हैं. उन्होंने बताया, "मजबूत पूंजी प्रवाह और बदलती जीवनशैली की प्राथमिकताओं के चलते कई बाजारों में प्राइम प्रॉपर्टीज सामान्य घरों की तुलना में काफी आगे निकल गई हैं."
10 लाख डॉलर में खरीदी जा सकने वाली जगह में निरंतर कमी भारत में लग्जरी रियल एस्टेट मार्केट के परिपक्व होने का संकेत है. हालांकि वैश्विक केंद्रों की तुलना में भारतीय शहर अब भी काफी किफायती हैं, लेकिन घरेलू संपत्ति और वैश्विक निवेशकों की बढ़ती रुचि के कारण यहां कीमतों में तेजी से बदलाव देखा जा रहा है.
रिपोर्ट: बसुधा दास
aajtak.in