करोड़ों के घर, लेकिन हवा जहरीली... क्या AQI आपके घर की कीमत घटाएगा?

देश के तमाम बड़े शहरों में प्रदूषण की वजह से सांस लेना भी मुश्किल हो गया, लेकिन इन शहरों में प्रॉपर्टी के दाम आसमान छू रहे हैं. ऐसे में लोग सवाल पूछ रह हैं कि आखिर हम खराब हवा में जीने के लिए इतने महंगे घर क्यों ले रहे हैं.

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देश के कई शहरों की हवा है बेहद खराब (Photo-ITG) देश के कई शहरों की हवा है बेहद खराब (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 नवंबर 2025,
  • अपडेटेड 7:31 PM IST

जैसे-जैसे प्रदूषण भारत के शहरों को अपनी चपेट में ले रहा है, एक जरूरी सवाल नागरिकों के गुस्से को भड़का रहा है. जहरीली हवा वाले क्षेत्रों में घरों के लिए करोड़ों रुपये क्यों दिए जा रहे हैं? रियल एस्टेट की कीमतों को AQI से जोड़ने का एक साहसी प्रस्ताव ज़ोर पकड़ रहा है और यह भारत को मजबूर कर सकता है कि वह आखिरकार वायु संकट की असली कीमत का हिसाब लगाए.

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एक यूज़र ने एक्स पर लिखा- "रियल एस्टेट में, AQI एक मुख्य पैमाना होना चाहिए, कम AQI का मतलब ज़्यादा संपत्ति मूल्य होना चाहिए, न कि इसका उल्टा." यह विचार सरल लेकिन विघटनकारी है और तेज़ी से फैल रहा है. ख़रीददार उन क्षेत्रों में घरों के लिए लाखों रुपये क्यों ख़र्च कर रहे हैं, जहां हवा सांस लेने लायक नहीं है? प्रदूषण पर कोई वित्तीय जुर्माना क्यों नहीं लगता, जबकि हरियाली को विलासिता के रूप में बेचा जाता है.

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नितिन कामथ ने उठाया था सवाल

ज़ेरोधा (Zerodha) के सह-संस्थापक नितिन कामथ ने इस विचार को बार-बार आगे बढ़ाया है, जिसमें उन्होंने खराब हवा और पानी की गुणवत्ता वाले इलाकों में "संपत्ति की कीमतों में छूट" दिए जाने की मांग की है. उन्होंने इस साल की शुरुआत में लिखा था, "AQI जितना अधिक होगा, रियल एस्टेट की कीमतें उतनी ही कम होनी चाहिए," इसके साथ ही उन्होंने संपत्ति के मूल्यों को पर्यावरणीय स्वास्थ्य से जोड़ने के अपने 2024 के प्रस्ताव को फिर से उठाया है.

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लेकिन रियल एस्टेट से जुड़े विशेषज्ञ इस विचार से सहमत नहीं हैं. उनका तर्क है कि कीमतें ज़मीन की कमी, बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर और बाज़ार की माग से तय होती हैं न कि हवा की गुणवत्ता से. ANAROCK ग्रुप के प्रशांत ठाकुर ने कहा, "हमने प्रदूषण के स्तर को संपत्ति की कीमतों को प्रभावित करते हुए नहीं देखा है." उन्होंने दिल्ली का उदाहरण देते हुए कहा कि पुरानी वायु प्रदूषण की समस्या के बावजूद, यह भारत के सबसे महंगे बाज़ारों में से एक बना हुआ है, जो इस बात का स्पष्ट विरोधाभास है.

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