मालिक भी और किरायेदार भी! अपना घर छोड़ क्यों रेंट के फ्लैट में शिफ्ट हो रहे हैं लोग

कल तक जो घर कामयाबी का आखिरी ठिकाना था, आज वह महज एक 'स्मार्ट निवेश' बन गया है. शायद इसीलिए आधुनिक पीढ़ी अपनी रजिस्ट्री वाली दीवारों को किराए पर छोड़कर, किराए की लग्जरी में अपनी नई पहचान ढूंढ रही है.

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अपना घर होते हुए क्यों किराएदार बन रहे हैं लोग (Photo-Pixabay) अपना घर होते हुए क्यों किराएदार बन रहे हैं लोग (Photo-Pixabay)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:26 AM IST

एक दौर था जब घर का मतलब सिर्फ 'सिर पर छत' और चारदीवारी हुआ करता था, लेकिन बदलते वक्त के साथ घर अब सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि हमारी लाइफस्टाइल और पहचान का हिस्सा बन चुका है. आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों की प्राथमिकताएं तेजी से बदली हैं. अब हमें सिर्फ घर नहीं, बल्कि 'स्पेस' और 'लग्जरी' चाहिए.

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अक्सर लोग कड़ी मेहनत की कमाई से अपने लिए एक आशियाना तो खरीद लेते हैं, लेकिन कुछ ही सालों में परिवार की बढ़ती जरूरतों या बेहतर सुविधाओं की चाहत के बीच वही घर छोटा लगने लगता है. ऐसे में एक नया और स्मार्ट ट्रेंड जोर पकड़ रहा है. लोग अपनी उस गाढ़ी कमाई की प्रॉपर्टी को बेचने या उसमें घुट-घुट कर रहने के बजाय, उसे किराए पर चढ़ा रहे हैं और खुद के लिए एक बड़ा और आलीशान घर किराए पर ले रहे हैं. क्यों आज की पीढ़ी अपनी संपत्ति का मालिक होने के बावजूद 'किराएदार' बनना ज्यादा पसंद कर रही है, रियल एस्टेट का बदलता मिजाज क्या है.

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क्या है 'रेंट-वेस्टिंग' का गणित?

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इस ट्रेंड को वैश्विक स्तर पर 'Rentvesting' कहा जाता है. रेंट-वेस्टिंग एक ऐसी वित्तीय रणनीति है, जिसमें आप वहां घर खरीदते हैं जहां आप 'अफोर्ड' कर सकते हैं. अक्सर शहर के बाहरी हिस्से या छोटे आकार का घर, लेकिन आप रहते वहां हैं जहां आपकी 'लाइफस्टाइल' की जरूरतें पूरी होती हैं- जैसे ऑफिस के करीब या बड़े पॉश इलाके में. उदाहरण के लिए मान लीजिए किसी का गुरुग्राम के सेक्टर-92 में अपना 2BHK फ्लैट है. वह उसे ₹25,000 में किराए पर देता है और खुद गोल्फ कोर्स रोड पर ऑफिस के पास ₹45,000 देकर एक 3BHK में किराए पर रहता है. इस शख्स ने अपने घर का किराया और अपनी EMI के बीच एक संतुलन बिठाया है, जबकि वह अपनी पसंद की लोकेशन पर रह रहा है.

क्यों लोकप्रिय हो रहा है यह ट्रेंड? 

बड़े शहरों जैसे बेंगलुरु, मुंबई और दिल्ली-एनसीआर में ट्रैफिक एक बड़ी समस्या है. कई बार लोगों का अपना घर ऑफिस से 2 घंटे की दूरी पर होता है. ऐसे में लोग अपना घर किराए पर देकर ऑफिस के पास किराए पर रहना पसंद करते हैं. इससे उनका समय बचता है और जीवन की गुणवत्ता सुधरती है.

आज की पीढ़ी एक जगह बंधकर नहीं रहना चाहती. जॉब चेंज या शहर बदलने की स्थिति में अपना घर बेचना या उसे खाली छोड़ना मुश्किल होता है. किराए पर रहने से उन्हें 'फ्लेक्सिबिलिटी' मिलती है. 'नाइट फ्रैंक इंडिया' (Knight Frank India) की एक रिपोर्ट के अनुसार, युवाओं में अब 'पजेशन' से ज्यादा 'एक्सेस' की अहमियत है.

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प्रॉपर्टी की कीमतें आसमान छू रही हैं. दक्षिण दिल्ली या दक्षिण मुंबई में 3BHK खरीदना आज एक मिडिल क्लास प्रोफेशनल के लिए सपना हो सकता है, लेकिन वहां ₹60,000-₹80,000 में किराए पर रहना मुमकिन है. अपना छोटा घर किराए पर देकर मिलने वाली रकम इस बड़े घर के किराए का बोझ कम कर देती है.

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