हिमाचल प्रदेश, जिसे अब तक केवल अपनी शांत वादियों और पर्यटन के लिए जाना जाता था, अब एक बड़े शहरी बदलाव की दहलीज पर खड़ा है. चंडीगढ़ के समीप और कांगड़ा घाटी में दो आधुनिक 'सैटेलाइट टाउनशिप' विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना है. इसे पहाड़ों के 'गुरुग्राम' और 'नोएडा' के रूप में देखा जा रहा है, जो न केवल हिमाचल की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देंगे, बल्कि पहाड़ों में रहने के पारंपरिक तौर-तरीकों को भी पूरी तरह बदल देंगे.
हिमाचल के पारंपरिक शहर जैसे शिमला, मनाली और धर्मशाला आज आबादी और ट्रैफिक के भारी बोझ तले दबे हुए हैं. तंग सड़कें और अनियंत्रित निर्माण ने इन शहरों की प्राकृतिक सुंदरता और सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. इसी समस्या के समाधान के रूप में हिमाचल प्रदेश शहरी विकास प्राधिकरण (HIMUDA) ने दिल्ली-एनसीआर की तर्ज पर 'सैटेलाइट टाउन' की अवधारणा पेश की है.
चंडीगढ़-परवाणू कॉरिडोर और कांगड़ा के पास प्रस्तावित ये टाउनशिप्स सुनियोजित सड़कों, आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम और व्यावसायिक क्षेत्रों से लैस होंगी. यह कदम राज्य के पुराने शहरों पर से बोझ कम करने की एक सोची-समझी रणनीति है.
कांगड़ा और चंडीगढ़ के पास 'सैटेलाइट सिटी' का खाका
दो स्थानों का चयन किया है जो भविष्य के आर्थिक केंद्र बनेंगे. पहली टाउनशिप चंडीगढ़ के पास सोलन जिले के कंडाघाट या जाबली के आसपास विकसित होगी, जो सीधे तौर पर मोहाली और पंचकुला के आईटी हब से जुड़ी होगी. वहीं, दूसरी टाउनशिप कांगड़ा में प्रस्तावित है, जिसे धर्मशाला और गग्गल एयरपोर्ट के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले विस्तार को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है. ये दोनों ही क्षेत्र भविष्य में न केवल रेजिडेंशियल हब होंगे, बल्कि पर्यटन और कॉर्पोरेट जगत के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेंगे.
'वर्क-फ्रॉम-माउंटेन' और बदलती जीवनशैली
इन टाउनशिप्स के आने से हिमाचल में पहली बार 'लग्जरी अपार्टमेंट कल्चर' की शुरुआत होगी. अब तक पहाड़ों में घर का मतलब केवल एकल मकान होता था, लेकिन अब यहां गुरुग्राम और नोएडा की तरह क्लब हाउस, स्विमिंग पूल, और 24/7 सुरक्षा वाले गेटेड समुदाय विकसित होंगे. यह नई व्यवस्था विशेष रूप से उन पेशेवरों को आकर्षित करेगी जो 'वर्क-फ्रॉम-माउंटेन' संस्कृति को अपनाना चाहते हैं. यहां उच्च गति वाला इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय मानकों की सुविधाएं होंगी, जिससे डिजिटल नोमैड्स और स्टार्टअप्स के लिए पहाड़ों में काम करना आसान हो जाएगा.
हिमाचल के युवाओं के लिए अब तक दिल्ली, नोएडा या गुरुग्राम जैसे शहर ही रोजगार का मुख्य जरिया रहे हैं. इन नई टाउनशिप्स में आईटी पार्क्स, अस्पताल और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के लिए विशेष जोन रखे गए हैं. सरकार की योजना इन शहरों को इस तरह विकसित करने की है कि बड़ी कंपनियां यहां अपने कार्यालय खोल सकें. इससे न केवल राज्य की प्रतिभा का पलायन रुकेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं को अपने घर के पास ही बड़े कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करने का मौका मिलेगा. यह कदम राज्य के राजस्व को बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
aajtak.in