गुरुग्राम में रहने वाले एक शख्स की रेडिट (Reddit) पोस्ट इंटरनेट पर खूब वायरल हो रही है. इस शख्स का कहना है कि आज के समय में अगर आपकी घर की कुल कमाई सालाना ₹1 करोड़ भी है, तो भी आप इस शहर में एक अच्छा घर नहीं खरीद सकते. इस पोस्ट ने घर की बढ़ती कीमतों पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है.
यूजर ने गुड़गांव के प्रॉपर्टी बाजार की कड़वी सच्चाई बताते हुए कहा कि यहां कीमतें बहुत ज्यादा हैं, लेकिन घरों की क्वालिटी बहुत खराब है. साथ ही, शहर की सुविधाएं भी इतनी अच्छी नहीं हैं कि उनके लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाएं. यूजर ने लिखा कि वह और उनकी पत्नी मिलकर साल के ₹1 करोड़ कमाते हैं, फिर भी महीनों तक घर ढूंढने के बाद उन्हें हार माननी पड़ी. उनका बजट ₹1.5 करोड़ से ₹1.7 करोड़ तक था, लेकिन उन्हें इस कीमत में एक भी ऐसा घर नहीं मिला जिसे देखकर लगे कि इतने पैसे लगाना सही है.
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दूसरे शहरों के मुकाबले गुरुग्राम में महंगा घर
रेडिट यूजर ने अपनी परेशानी बताते हुए लिखा, "हमारे पास अच्छी-खासी सेविंग्स हैं और हम खुद को भारी-भरकम कर्ज के जाल में नहीं फंसाना चाहते." उन्होंने आगे कहा कि उनके पुणे और नोएडा जैसे शहरों में रहने वाले दोस्तों ने ₹1 करोड़ से कम में अच्छे घर खरीद लिए हैं, जबकि यहां मुझे ऐसा महसूस हो रहा है जैसे मैं बहुत पीछे छूट गया हूं.
उनकी नाराजगी सिर्फ कीमतों को लेकर नहीं थी, बल्कि इस बात को लेकर भी थी कि इतने पैसे देने के बाद बदले में क्या मिल रहा है. यूजर के मुताबिक, गुरुग्राम के ज्यादातर बिल्डर्स बहुत ही औसत दर्जे के प्रोजेक्ट्स बना रहे हैं और उनके निर्माण की क्वालिटी बेहद घटिया है. पोस्ट में सवाल उठाया गया कि जब शहर में बुनियादी सुविधाएं ही नहीं हैं, तो प्रॉपर्टी के दाम आसमान पर क्यों हैं?
सोशल मीडिया पर बहस
यूजर ने लिखा, "मुझे वाकई समझ नहीं आता कि यहां कीमतें इतनी ज्यादा क्यों हैं, जबकि यह शहर बदले में कुछ खास नहीं देता" उन्होंने मानसून के दौरान सड़कों पर पानी भरने, खराब सड़कों और भयंकर वायु प्रदूषण की तरफ इशारा किया. उन्होंने गुड़गांव की तुलना बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहरों से करते हुए कहा कि वे शहर इंफ्रास्ट्रक्चर, नौकरियों और रहने के लिहाज से गुड़गांव से कहीं बेहतर हैं.
इस पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स ने भी अपनी राय दी और गुरुग्राम के कई लोगों ने यूजर की बात से सहमति जताई. कई लोगों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यहां कीमतें वाकई बहुत ज्यादा बढ़ाकर बताई जाती हैं और घरों की क्वालिटी बहुत खराब है. कुछ लोगों का कहना था कि यहां के 'लग्जरी' घर भी उम्मीदों पर खरे नहीं उतरते. वहीं, कुछ का तर्क था कि दिल्ली के करीब होने और बड़े-बड़े ऑफिसों की वजह से यहां घरों की मांग हमेशा बनी रहती है.
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