बिल्डर पर न करें भरोसा, प्रॉपर्टी खरीदने से पहले खुद ऐसे करें जांच

रियल एस्टेट में आपका फायदा इस बात पर निर्भर नहीं करता कि बिल्डर ने क्या वादा किया है, बल्कि इस पर निर्भर करता है कि आपने कितनी गहराई से जांच की है. जागरूक खरीदार ही सुरक्षित निवेशक है.

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प्रॉपर्टी खरीदने से पहले जान लें जरूरी बातें (Photo-ITG) प्रॉपर्टी खरीदने से पहले जान लें जरूरी बातें (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:42 PM IST


रियल एस्टेट मार्केट में एक कहावत मशहूर है "जो दिखता है, वो हमेशा वैसा नहीं होता." जब आप किसी आलीशान ब्रॉशर को देखते हैं या किसी 'सैंपल फ्लैट' की सैर करते हैं, तो बिल्डर आपको एक सुनहरे भविष्य के सपने दिखाता है. लेकिन हकीकत अक्सर उन चमक-धमक वाली लाइटों और पेंट के पीछे छिपी होती है. विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रियल एस्टेट मार्केट में 'सेंटीमेंट बाइंग' सबसे ज्यादा होती है और 'रिसर्च' सबसे कम.

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आजतक रेडियो के शो 'प्रॉपर्टी से फायदा' में रियल एस्टेट कंसल्टेंट कमल चंदेल ने उन बारीकियों के बारे में चर्चा की, जिन्हें अक्सर एक आम खरीदार नजरअंदाज कर देता है. अगर आप भी अपनी जिंदगी भर की कमाई किसी लगाने जा रहे हैं, तो ये 'चेकलिस्ट' आपके काम आएगा.

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मार्केटिंग की चकाचौंध में न पड़ें

कमल चंदेल आगाह करते हैं कि प्रॉपर्टी खरीदते वक्त हमेशा सावधान रहें और बिल्डर की लुभावनी बातों में न फंसें. वे कहते हैं, "बिल्डर की मार्केटिंग टीम आपको बताएगी कि वे भविष्य में क्या देने वाले हैं, लेकिन आपका ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि उन्होंने अतीत में क्या दिया है. एक सुरक्षित निवेश के लिए यह जरूरी है कि आप बिल्डर के कम से कम 2-3 पुराने प्रोजेक्ट्स पर खुद जाएं. वहां केवल इमारतों को न देखें, बल्कि वहां रह रहे निवासियों से बात करें. '

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रिटेल निवेशकों की सबसे बड़ी गलती: 'बूम' के पीछे भागना

इस इंडस्ट्री की एक कड़वी सच्चाई यह है कि सबसे ज्यादा नुकसान रिटेल निवेशक ही उठाते हैं. कमल चंदेल के अनुसार, लोग अक्सर तब पैसा लगाते हैं जब मार्केट में 'बूम' होता है और हर तरफ तेजी की खबरें होती हैं. जैसे ही मार्केट थोड़ा डाउन होता है, वे डर के मारे अपना पैसा निकाल लेते हैं या घाटे में सौदा कर बैठते हैं.

रियल एस्टेट कोई 'क्विक मनी' स्कीम नहीं है; यह एक लंबी अवधि का निवेश है. यहां सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि लोग खुद की रिसर्च के बजाय ब्रोकर्स या सेल्स एजेंटों पर निर्भर रहते हैं, जो व्यक्ति आपको प्रॉपर्टी बेच रहा है, वह उसकी कमियां क्यों बताएगा? उसे अपना टारगेट पूरा करना है. इसलिए, जानकारी का स्रोत वह व्यक्ति नहीं होना चाहिए जिसका उस सौदे में आर्थिक हित छिपा हो.

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अक्सर लोग जिससे प्रॉपर्टी खरीदते हैं, उसी से सारी पूछताछ करते हैं. कमल चंदेल का कहना है कि लोगों को बिल्डर पर आंख बंदकर भरोसा करने के बजाय स्वतंत्र जांच करनी चाहिए. आज के दौर में आपके पास 'रेरा' (RERA) जैसा सशक्त कानून है. निवेश से पहले संबंधित राज्य की RERA वेबसाइट पर जाकर प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन नंबर चेक करें. देखें कि बिल्डर पर पहले से कितने कानूनी विवाद या शिकायतें लंबित हैं. एग्रीमेंट फॉर सेल (Agreement for Sale) को किसी स्वतंत्र वकील से जरूर पढ़वाएं.

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रियल एस्टेट एक ऐसा क्षेत्र है जहां आपका पहला अनुभव आपकी भविष्य की निवेश यात्रा तय करता है. अगर आपका पहला अनुभव खराब हो गया तो आप जीवन भर इस सेक्टर से डरेंगे और दोबारा निवेश करने की हिम्मत नहीं जुटा पाएंगे.

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