भारी छूट के बाद भी नहीं मिल रहे घर खरीदार! क्या खत्म हो रही है दुबई की चमक

लोग दुबई की वित्तीय स्थिति बिगड़ने पर चिंता जाहिर कर रहे हैं, क्योंकि इसका सीधा असर दुनिया भर के उन लाखों परिवारों पर पड़ेगा जिनकी आजीविका इस शहर की आर्थिक मजबूती से जुड़ी है.

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मंदी के दावों ने उड़ाई निवेशकों की नींद (Photo-ITG) मंदी के दावों ने उड़ाई निवेशकों की नींद (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 31 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 11:36 AM IST

दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते रियल एस्टेट मार्केट में शुमार 'दुबई' क्या अब अपनी चमक खो रहा है. हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों और प्रॉपर्टी ब्रोकरों के बयानों ने निवेशकों के बीच हलचल मचा दी है. जहां एक तरफ गगनचुंबी इमारतें दुबई की पहचान रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बाजार में छाई सुस्ती की खबरों ने इसे एक 'गंभीर संकट' की ओर धकेलने की चर्चा शुरू कर दी है.

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दुबई वर्तमान में उस स्थिति का सामना कर रहा है जिसे कई लोग "अस्तित्व का संकट" कह रहे हैं. सोशल मीडिया पर वायरल हो रही पोस्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि इस शहर का कभी बेहद तेजी से बढ़ता हुआ रियल एस्टेट मार्केट अब अपनी रफ्तार खो रहा है. एक ब्रोकर के उस हालिया बयान ने इस चर्चा को और हवा दे दी है, जिसमें उन्होंने कहा कि भारी छूट की पेशकश करने के बावजूद वे खरीदारों को आकर्षित करने में विफल रहे हैं. सोशल मीडिया पर बढ़ती इन चर्चाओं और दावों ने बाजार के भविष्य को लेकर एक बड़ी चिंता पैदा कर दी है.

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हालिया आंकड़े दुबई के रियल एस्टेट बाजार में सुस्ती के स्पष्ट संकेत दे रहे हैं, जहां पिछले साल की समान अवधि की तुलना में प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन में भारी गिरावट दर्ज की गई है. DXB Interact के डेटा के अनुसार, 28 फरवरी से 22 मार्च के बीच शहर में केवल 8,157 सौदे हुए, जो पिछले साल इसी अवधि के 12,196 ट्रांजैक्शन के मुकाबले 33 प्रतिशत कम हैं. हालांकि, राहत की बात यह है कि संपत्ति की कीमतें काफी हद तक स्थिर बनी हुई हैं, जो यह दर्शाता है कि बाजार कमजोर जरूर हुआ है, लेकिन अभी पूरी तरह ध्वस्त नहीं हुआ है.

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विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में आई इस गिरावट का सीधा संबंध बढ़ते क्षेत्रीय तनावों, विशेष रूप से अमेरिका-ईरान संघर्ष से है. युद्ध की स्थिति के कारण वैश्विक निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ी है, जिसका सीधा असर उनके भरोसे पर पड़ा है और खरीदार अब कोई भी बड़ा निवेश करने से पहले बहुत अधिक सावधानी बरत रहे हैं. इस भू-राजनीतिक अस्थिरता ने बाजार की उस रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है, जो पिछले कुछ वर्षों से लगातार बनी हुई थी.

सोशल मीडिया पर भी इस स्थिति को लेकर बहस छिड़ी हुई है और यूजर्स की राय काफी बंटी हुई नजर आ रही है. जहां कुछ लोग इसे कोविड-19 के दौरान आई मंदी जैसा बता रहे हैं. जब सब कुछ थम गया था लेकिन बाद में बाजार ने शानदार वापसी की थी. वहीं कुछ का मानना है कि युद्ध और मंदी जैसी स्थितियों पर लोग जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया दे रहे हैं. उनका तर्क है कि इतिहास खुद को दोहराता है और भले ही बाजार तुरंत युद्ध-पूर्व वाली स्थिति में न लौटे, लेकिन समय के साथ यह दोबारा उबर जाएगा.

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