अपना घर या 20 साल का 'सिरदर्द', होम लोन लेने से पहले जान ले जरूरी बातें

होम लोन लेते वक्त लोग अक्सर ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो सालों तक उनको कर्ज के दलदल में डाल देता है, लोन लेने से पहले अगर कुछ सावधानियां बरती जाएं तो आपके लाखों रुपये बच सकते हैं.

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होम लोन पर ब्याज कैसे बचाएं (Photo-Pexels) होम लोन पर ब्याज कैसे बचाएं (Photo-Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 31 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 10:28 AM IST

भारत में हर इंसान का सपना होता है अपना घर खरीदने का और इस सपने को पूरा करने के लिए लोग होम लोन का सहारा लेते हैं. यह वित्तीय फैसला एक मध्यमवर्गीय व्यक्ति की जिंदगी के करीब 20-25 साल ले लेता है. ऐसे में अगर लोन प्रक्रिया या चुनाव में कोई भी चूक हुई, तो जिंदगी भर पछताना पड़ सकता है. इसलिए लोन लेने से पहले कुछ जरूरी बातों की जानकारी रखना जरूरी है, नहीं तो आप अनजाने में जिंदगी भर के लिए कर्ज के बोझ तले दब सकते हैं.

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होम लोन लेने से पहले सबसे महत्वपूर्ण कदम अपनी क्षमता का आंकलन करना है. वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, आपकी सभी ईएमआई मिलाकर आपकी मासिक इन-हैंड सैलरी के 35% से 40% से अधिक नहीं होनी चाहिए. अगर आप अपनी आय का बड़ा हिस्सा किस्तों में दे देंगे, तो बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आकस्मिक खर्चों के लिए आपके पास फंड की कमी हो जाएगी, जो आगे चलकर मानसिक तनाव का कारण बनता है.

लोन आवेदन से पहले अपना क्रेडिट स्कोर जांचना और उसे सुधारना बेहद जरूरी है. 750 से अधिक का सिबिल स्कोर आपको बैंक से ब्याज दरों पर डील करने की शक्ति देता है. ब्याज दर में मात्र 0.5% की कमी भी 20 साल की अवधि में आपके लाखों रुपये बचा सकती है. इसके अलावा, हमेशा 'एक्सटर्नल बेंचमार्क लिंक्ड रेट' (EBLR) का चुनाव करें, ताकि आरबीआई द्वारा रेपो रेट कम किए जाने का सीधा लाभ आपको मिल सके.

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डाउन पेमेंट की रणनीति और हिडन चार्जेस

बैंक आमतौर पर संपत्ति की कुल कीमत का 80% तक लोन देते हैं, जबकि 20% आपको डाउन पेमेंट के रूप में देना होता है. कोशिश करें कि डाउन पेमेंट जितना संभव हो उतना अधिक रखें, ताकि मूलधन कम रहे. साथ ही, केवल ब्याज दर न देखें. प्रोसेसिंग फीस, एडमिनिस्ट्रेटिव चार्ज, और लीगल फीस जैसे छिपे हुए खर्चों के बारे में लिखित जानकारी लें. कई बार कम ब्याज दर दिखाने वाले बैंक अन्य शुल्कों के माध्यम से आपसे अधिक वसूली कर लेते हैं.

अक्सर लोग ईएमआई कम रखने के चक्कर में 30 साल जैसी लंबी अवधि का लोन चुन लेते हैं. हालांकि इससे महीने का बोझ कम दिखता है, लेकिन लंबी अवधि में आप मूलधन से कहीं अधिक राशि केवल ब्याज के रूप में बैंक को चुका देते हैं. आदर्श रूप से, लोन की अवधि उतनी ही रखनी चाहिए जितनी आपकी कार्यक्षमता और आयु अनुमति दे. बीच-बीच में 'पार्ट-पेमेंट' करते रहने से लोन की अवधि और कुल ब्याज के बोझ को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

लोन लेने से पहले यह सुनिश्चित करना आपकी जिम्मेदारी है कि संपत्ति विवाद मुक्त हो. हमेशा RERA रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट में ही निवेश करें. बिल्डर से ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) और कंप्लीशन सर्टिफिकेट (CC) की स्पष्ट मांग करें. बैंक केवल आपकी लोन पात्रता की जांच करता है, संपत्ति की गुणवत्ता या भविष्य में होने वाले कानूनी विवादों की पूरी गारंटी बैंक की नहीं होती. इसलिए, किसी स्वतंत्र वकील से प्रॉपर्टी के कागजातों की जांच करवाना एक सुरक्षित भविष्य के लिए अनिवार्य निवेश है.

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