'माचिस की डिबिया' जैसा घर और कॉकरोच फ्लैटमेट...बेंगलुरु के किराएदार का दर्द

बेंगुलुरू में बढ़ते किराए से लोग परेशान हैं. लोगों की शिकायत है कि भारी-भरकम किराया देने के बावजूद उन्हें सही फ्लैट नहीं मिलता और सुविधाओं के नाम पर उनसे मोटे पैसे वसूले जाते हैं.

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बेंगलुरु में 2bhk फ्लैट का किराया 80 हजार (Photo-ITG) बेंगलुरु में 2bhk फ्लैट का किराया 80 हजार (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 3:10 PM IST

बेंगलुरु में घर तलाश रहे कई लोगों के लिए, किराए का घर ढूंढना मुश्किल टास्क बन गया है. जैसे-जैसे किराया आसमान छू रहा है, उपलब्ध अपार्टमेंट्स का आकार और गुणवत्ता दोनों ही घटते जा रहे हैं. कई लोग 'माचिस की डिबिया' जैसे 2BHK फ्लैट्स में रहने को मजबूर हैं, जिनमें से कुछ के बारे में तो यह तक कहा जा रहा है कि वहां 'कॉकरोच आपके फ्लैटमेट' बनकर रहते हैं.
 
इन घरों का किराया ₹80,000 जैसी भारी-भरकम राशि मांगी जा रही है, जिससे किराएदार मकान मालिकों की अवास्तविक उम्मीदों से हताश हैं, सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर चर्चा चल रही है कि कैसे छोटे से घरों के लिए लोग मोटा किराया देने को मजबूर हैं.

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एक रेडिट यूजर ने लिखा- "2BHK फ्लैट उपलब्ध है, यह 200 वर्ग फुट का है, घर जर्जर हालत में है, बाथरूम लीक करता है और यहां कॉकरोचों का एक झुंड आपके फ्लैटमेट्स के रूप में साथ रहेगा और शायद पिछले किराएदार की आत्मा यहां भटकती है, क्योंकि यहां प्राकृतिक रोशनी का नामोनिशान नहीं है. अपेक्षित किराया: 80,000 रुपये." 

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सोशल मीडिया पर लोग कर रहे हैं चर्चा

यह रेडिट पोस्ट एक गहरी चिंता को उजागर करती है. बेंगलुरु का रेंटल मार्केट तेजी से उस स्तर से बाहर होता जा रहा है, जिसे किराएदार रहने लायक मानते हैं, पैसे की सही कीमत तो दूर की बात है. रेडिट यूजर्स का कहना है कि मुद्दा सिर्फ किफायत का नहीं है, बल्कि किराए और गुणवत्ता के बीच बढ़ते असंतुलन, लचीलेपन की कमी और किराए के घरों में व्यक्तिगत पसंद पर बढ़ते नियंत्रण का भी है. 

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एक अन्य पोस्ट में रेडिट यूजर्स ने अपार्टमेंट के घटते आकार को एक बड़ी चिंता के रूप में पेश किया है. उनका कहना है कि बेंगलुरु में घरों का किराया तो लगातार बढ़ रहा है, लेकिन रहने की जगह छोटी होती जा रही है. कई यूजर्स ने प्राइम इलाकों में 1BHK फ्लैटों को 'माचिस की डिबिया' जैसा बताया है. इन घरों का क्षेत्रफल अक्सर महज 300-400 वर्ग फुट तक ही सीमित होता है, जबकि इनका किराया ₹30,000 या उससे भी अधिक वसूला जा रहा है.

एक किराएदार ने साझा किया कि अपना बजट बढ़ाकर ₹40,000 करने के बावजूद, उन्हें एक ढंग का घर ढूंढने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. एक अन्य यूजर ने सवाल उठाया कि आखिर ₹30,000 देने के बाद भी क्या मिल रहा है? उनके अनुसार, बाजार में मौजूद कई लिस्टिंग्स उस भारी-भरकम कीमत के लायक ही नहीं हैं. लोगों में इस बात को लेकर गुस्सा है कि मकान मालिक मोटी रकम तो मांग रहे हैं, लेकिन उसके बदले में मिलने वाली सुविधाएं और जगह नहीं के बराबर है.
 

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