भारत के प्रमुख महानगरों में रहने वाले औसत खरीदारों के लिए अब 3BHK घर खरीदना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. स्क्वायर यार्ड्स की ताजा रिपोर्ट 'फ्रॉम एस्पिरेशन टू रियलिटी: द कॉस्ट ऑफ ओनिंग ए 3BHK इन इंडिया' के मुताबिक, आवासीय संपत्तियों की कीमतें पारिवारिक आय की तुलना में कहीं अधिक तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे बड़े घरों का मालिकाना हक आम आदमी की पहुंच से दूर होता जा रहा है.
रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि भारत के पांच प्रमुख महानगरों में एक नए 3BHK घर की औसत कीमत अब बढ़कर करीब 2.7 करोड़ रुपये हो गई है. यदि किसी व्यक्ति की सालाना आय लगभग 23 लाख रुपये भी है, तो उसे इस घर को खरीदने के लिए अपनी 12 साल की पूरी कमाई लगानी होगी. यह आंकड़ा आय और आवास की बढ़ती लागत के बीच की गहरी खाई को उजागर करता है. यहां तक कि सालाना 22 लाख रुपये कमाने वाले परिवार, जो देश की टॉप 1% आबादी में आते हैं, उनके लिए भी इन शहरों में घर खरीदना अब आर्थिक रूप से काफी बोझिल हो गया है.
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कैसे तेजी से बढ़ी हैं घर की कीमतें
रिपोर्ट में आर्थिक मानकों के आधार पर भारतीय हाउसिंग मार्केट का वर्गीकरण किया गया है. जिसके मुताबिक घर की कीमत सालाना आय से 3 से 5 गुना तक होनी चाहिए, लेकिन भारत के बड़े शहरों में यह अनुपात 10 के पार जा चुका है, जो गंभीर आर्थिक संकट का संकेत है. विश्लेषण से पता चलता है कि बाजार में उपलब्ध नए 3BHK घरों की कुल सप्लाई का सिर्फ 11% हिस्सा ही आम आदमी की आय के अनुरूप है.
सप्लाई और डिमांड का बिगड़ता संतुलन चिंताजनक बात यह है कि बाजार में मौजूद 89% घर खरीदारों पर भारी वित्तीय दबाव डाल रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, 41% सप्लाई 'इनकम-स्ट्रेच्ड' श्रेणी में है, जबकि 48% सप्लाई 'गंभीर तनाव' या 'संकट' वाली श्रेणी में पहुंच चुकी है. डेवलपर्स का ध्यान अब मध्यम वर्ग के बजाय प्रीमियम और लग्जरी सेगमेंट की ओर ज्यादा है, जिसके कारण बाजार में किफायती बड़े घरों की भारी कमी हो गई है. वर्क-फ्रॉम-होम और बड़े परिवारों की जरूरतों ने 3BHK की मांग तो बढ़ा दी है, लेकिन बढ़ती लागत ने इसे मिडिल क्लास की पहुंच से बाहर कर दिया है.
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मुनाफे का गणित (Profit Margins)
रिपोर्ट में बताया गया है कि बाजार में आए इस असंतुलन की एक बड़ी वजह बिल्डरों का मुनाफा है, दरअसल, लग्जरी और महंगे घरों के प्रोजेक्ट्स में बिल्डरों को 45% से 50% तक का मोटा मुनाफा मिलता है. इसके मुकाबले, सस्ते और किफायती घरों में यह मुनाफा घटकर सिर्फ 15% से 18% रह जाता है. यही कारण है कि बिल्डर अब ज्यादा मुनाफे के चक्कर में महंगे घर ही बना रहे हैं, भले ही आम खरीदार के लिए उन्हें खरीदना मुश्किल होता जा रहा हो.
प्रमुख शहरों का हाल (Trends in Major Markets)
रिपोर्ट अलग-अलग शहरों और इलाकों के बीच के बड़े अंतर को भी साफ करती है. बेंगलुरु सबसे संतुलित मार्केट बनकर उभरा है. यहां लोगों की कमाई और घरों की कीमतों में बढ़ोतरी लगभग बराबर रही है, जिससे यहां घर खरीदना अब भी संभव है. मुंबई (MMR) और दिल्ली-एनसीआर में स्थिति काफी पेचीदा है. यहां एक ही शहर के अलग-अलग इलाकों की कीमतों में जमीन-आसमान का अंतर है. ऐसे में खरीदारों के लिए सही और किफायती इलाका चुनना बहुत बड़ी चुनौती बन गया है.
हैदराबाद बहुत तेजी से आगे बढ़ा है, लेकिन यहां घरों के दाम लोगों की सैलरी के मुकाबले कहीं ज्यादा बढ़ गए हैं. नतीजा यह है कि यहां के ज्यादातर रिहायशी इलाके अब औसत खरीदार की पहुंच से बाहर हो चुके हैं. पुणे के मुख्य शहरी इलाकों में घर इतने महंगे हो गए हैं कि वे अब केवल बेहद अमीर लोगों के लिए रह गए हैं. एक साधारण बजट में 3BHK घर ढूंढने के लिए खरीदारों को अब पुणे के बाहरी इलाकों की ओर जाने पर मजबूर होना पड़ रहा है.
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सही लोकेशन का चुनाव बचा सकता है लाखों रुपये
रिपोर्ट के अनुसार, एक ही शहर के भीतर सही इलाके का चुनाव करने से खरीदार 30 से 60 लाख रुपये तक की बचत कर सकते हैं. शहर के बीचों-बीच स्थित प्रीमियम इलाके अब केवल निवेश करने या अमीरों के रहने की जगह बन गए हैं. इसके विपरीत, शहर के बाहरी और नए विकसित हो रहे इलाके उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प हैं, जो अपना घर खरीदने का सपना पूरा करना चाहते हैं.
यह निष्कर्ष बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई (MMR), दिल्ली-एनसीआर और पुणे के 44 इलाकों में साल 2024-25 के दौरान लॉन्च हुए 10,500 RERA-रजिस्टर्ड 3BHK यूनिट्स के विश्लेषण पर आधारित है. यह रिपोर्ट पहली बार घर खरीदने वालों, अपने घर को अपग्रेड करने वालों और अमीर निवेशकों, सभी के लिए एक मार्गदर्शिका की तरह काम करती है.
स्क्वायर यार्ड्स के संस्थापक और सीईओ (CEO) तनुज शोरी ने कहा- "भारत के रिहायशी बाजार में घरों की कीमतों और लोगों की खरीदने की क्षमता के बीच एक बड़ा असंतुलन पैदा हो गया है. महामारी के बाद लोगों में आधुनिक सुविधाओं वाले बड़े घरों की चाहत बढ़ी है. साथ ही, देश में अमीरों की संख्या में बढ़ोतरी और बिल्डरों का ध्यान केवल महंगे प्रोजेक्ट्स पर होने की वजह से, अब 3BHK घर खरीदना आम आदमी के लिए काफी तनावपूर्ण और कठिन हो गया है".
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