मिडिल ईस्ट में युद्ध अब एक अलग रूप ले रहा है. ईरान ने सऊदी अरब के तेल रिफाइनर्स पर गोले दागे हैं. साथ ही यह भी बड़ा ऐलान कर दिया है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होमुर्ज के रास्ते से कोई भी तेल टैंकर या जहाज गुजरेगा तो उसपर हमला किया जाएगा.
यह वही गलियारा है, जहां से दुनिया 20 फीसदी एनर्जी का आयात करती है और भारत 50 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे में दुनिया भर में तेल संकट गहराता हुआ दिख रहा है, जिस कारण कच्चे तेल के दाम में भी लगातार तेजी देखी जा रही है. सोमवार को कच्चा तेल 10 फीसदी से ज्यादा चढ़ चुका था, जबकि मंगलवार को भी इसमें 2.55 फीसदी की तेजी देखी जा रही है.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह संकट और भी बढ़ा हो सकता है और दुनिया में तेल की कीमतें और भी ज्यादा बढ़ सकती है, जो 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं. इसका मतलब है कि कच्चे तेल को लेकर दुनिया में एक संकट पैदा हो रहा है. हालांकि भारत ने इस मुसीबत से निपटने के लिए लगभग पूरी तैयारी कर चुका है.
भारत की क्या है तैयारी?
इकोनॉमिक्स टाइम्स के मुताबिक, सरकार और इंडस्ट्री के बीच चल रही बातचीत से जुड़े लोगों ने बताया कि भारत कई इमरजेंसी ऑप्शन पर विचार कर रहा है, जिसमें पेट्रोल और डीजल एक्सपोर्ट पर रोक लगाना, रूस से क्रूड ऑयल का इंपोर्ट बढ़ाना, और LPG राशनिंग जैसे डिमांड-मैनेजमेंट उपाय लागू करना शामिल है. ताकि स्ट्रेट ऑफ होमुर्ज के रुकावट के कारण इमरजेंसी में तेल की कमी को पूरा किया जा सके.
तेल के एक्सपोर्ट पर रोक
सबसे पहले सरकार पेट्रोल और डीजल के एक्सपोर्ट पर रोक लगाने पर विचार कर रही है, क्योंकि भारत अपने पेट्रोल का लगभग 1 तिहाई, डीजल का एक चौथाई और एविएशन फ्यूल का लगभग आधा एक्सपोर्ट करता है. सबसे बड़ी दिक्कत LPG है. भारत लगभग दो-तिहाई खपत के लिए इम्पोर्ट पर निर्भर है और उसके पास मामूली इन्वेंटरी है. भारत 85 से 90 फीसदी एलपीजी इम्पोर्ट करता है.
कितने दिनों की बची है खपत
इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक, अगर सप्लाई में रुकावट आती है, तो ऑनशोर इन्वेंटरी और होर्मुज पार कर चुके कार्गो मिलाकर कुल स्टॉक 2 हफ्तों से भी कम का है. वहीं सरकारी रिफाइनर इंडियन ऑयल, HPCL, और BPCL ने कुछ खास पेट्रोकेमिकल इंटीग्रेटेड रिफाइनरियों में LPG का प्रोडक्शन बढ़ाना शुरू किया है. वहीं भारत का क्रूड रिजर्व 20 से 25 दिनों का बताया जा रहा है.
तेल और गैस की कीमतों में उछाल
सोमवार को तेल और गैस की कीमतों में उछाल देखने को मिला था, ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स लगभग 10% बढ़कर $80 प्रति बैरल हो गया और यूरोपियन गैस 40% से ज़्यादा उछल गई, क्योंकि वेस्ट एशिया में बढ़ते विवाद और सऊदी अरब की रास तनुरा रिफाइनरी और कतर के LNG प्लांट पर हमलों के कारण प्रोडक्शन बंद हो गया. वहीं अब स्ट्रेट ऑफ होमुर्ज भी बंद हो चुका है.
कबतक चलेगी ये लड़ाई
एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान के पास मिलिट्री और टेक्नोलॉजी अमेरिका-इजरायल की तुलना में बहुत कम है. ऐसे में यह लड़ाई ज्यादा दिन तक टिकने वाली नहीं है, लेकिन वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि यह वॉर 4 हफ्तों तक चल सकती है.
इधर, ऑयल मिनिस्ट्री ने X पर ऑयल मिनिस्टर हरदीप पुरी के रिव्यू के बाद कहा कि हम लगातार बदलते हालात पर नज़र रख रहे हैं, और देश में बड़े पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की अवेलेबिलिटी और अफ़ोर्डेबिलिटी पक्का करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे.
आजतक बिजनेस डेस्क