War Impact in Iran: कारोबार हुए बंद, लाखों लोग गरीब... अमेरिका से जंग में तबाह हुआ ईरान, अब आगे क्‍या

अमेरिका और ईरान जंग में ईरान को गहरी चोट लगी है. ईरान की अर्थव्‍यवस्‍थ काफी मुश्किल में आ चुकी है. लाखों लोग गरीबी की ओर जा रहे हैं और कंपनियां तेजी से बंद हो रही हैं.

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जंग का ईरान के लोगों पर क्‍या असर हो रहा है? (Photo: File/Reuters) जंग का ईरान के लोगों पर क्‍या असर हो रहा है? (Photo: File/Reuters)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्‍ली,
  • 28 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 6:44 PM IST

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जंग ने दुनिया भर के लिए एनर्जी संकट पैदा तो की ही है. साथ ही कुछ देशों पर महंगाई और आर्थिक तंगी जैसे गंभीर प्रभाव भी हुआ है. खासकार रोजगार के मामले में संकट ज्‍यादा बढ़ गई है. ईरान में बड़े पैमाने पर लोगों की नौकरी जा रही है. लाखों लोग आर्थिक तंगी की ओर बढ़ रहे हैं. साथ ही कारखाने भी तेजी से बंद हो रहे हैं. 

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सीएनएन की रिपोर्ट का दावा है कि इस जंग ने एयरलाइनों से लेकर फ्रीलांसरों और छोटे व्यवसायों तक, सभी की आजीविका को छिन्न-भिन्न कर दिया है. कई ईरानियों के लिए, यह संकट अब बेहद व्यक्तिगत हो गया है. कारोबार बंद होने से अब यहां रोजगार संकट खड़ा हो चुका है.  

खर्च चलाने के लिए भी नहीं पैसा
रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान की एक फ्रीलांसर डिजाइनर ने बताया कि इंटरनेट रुकने से इंटरनेशनल कस्‍टमर्स से संपर्क टूट जाने के बाद उनकी आय खत्‍म हो गई. उन्‍होंने सीएनएन को फोन पर बताया कि कोई नया प्रोजेक्‍ट नहीं, कोई जवाब नहीं. बस ऐसा लगता है कि जैसे सब कुछ रातोंरात रुक गया हो. अब बुनियादी खर्चों को भी पूरा करने के लिए पैसा नहीं बचा है. उन्‍होंने कहा कि रोजगार पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ा है. रिफाइनरियों, कपड़ा कंपनियों, एयरलाइंस, लॉजिस्टिक्स और मीडिया क्षेत्रों के श्रमिक प्रभावित हुए हैं क्योंकि व्यवसायों ने अपने संचालन को कम कर दिया है या बंद कर दिया है. 

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लाखों लोगों पर खतरा 
रोजगारों के नुकसान का पैमाना चौंकाने वाला है. ईरान के उप श्रम और सामाजिक सुरक्षा मंत्री गुलाम हुसैन मोहम्मदी के अनुसार, संघर्ष के कारण डायरेक्‍ट तौर पर दस लाख नौकरियां जा चुकी हैं. ईरानी समाचार पत्र एतेमाद ऑनलाइन के अनुमान के अनुसार, इनडायरेक्‍ट प्रभावों के कारण दस लाख नौकरियां और समाप्त हुई हैं. कुल 20 लाख नौकरियां जा चुकी हैं और अभी खतरा कम नहीं हुआ है. संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो 41 लाख लोग और गरीबी की चपेट में आ सकते हैं. 

क्विनसी इंस्टीट्यूट के अर्थशास्त्री हादी कहलजादेह ने सीएनएन को बताया कि जहाजरानी और व्यापार में व्यवधान संकट को और बढ़ा रहा है. जंग, महंगाई, मंदी और गिरती मांग के संयुक्‍त दबाव के कारण कई कंपनियों ने अपना संचालन बंद कर दिया है. उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इस स्थिति के कारण ईरान में 50% नौकरियां खतरे में हैं और अतिरिक्त 5% आबादी गरीबी की ओर धकेली जा रही है. 

कारोबारों को भारी नुकसान 
इतना ही नहीं जंग में हवाई हमलों के कारण कंपनियों की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिस कारण से कच्‍चे माल पर निर्भर कंपनियों को अपना संचालन बंद करना पड़ा है या प्रोडक्‍शन कम करना पड़ा है. साथ ही इन कंपनियों ने बड़े स्‍तर पर कर्मचारियों को छुट्टी पर भी भेज दिया है. स्टील की कमी के कारण ट्रेलर निर्माता मारल सनत ने 1,500 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया. कपड़ा कंपनी बोरुजेर्द ने 700 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया. पैकेजिंग सामग्री की कमी के कारण डेयरी संयंत्रों में उत्पादन बंद हो गया है. सीएनएन की रिपोर्ट में ईरानी मीडिया के अनुसार, 23,000 से अधिक कारखानों और व्यवसायों को नुकसान पहुंचा है.

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अब आगे कितना बड़ा संकट? 
ईरान की आर्थिक अस्थिरता संघर्ष से पहले से मौजूद थी, लेकिन युद्ध ने इस गिरावट को और तेज कर दिया है. मार्च में महंगाई 72 प्रतिशत तक पहुंच गई, और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में तो और भी ज्यादा तेजी देखने को मिली.  बेरोजगारी भत्ते के लिए आवेदनों में भारी बढ़ोतरी हुई है, पिछले दो महीनों में 147,000 आवेदन दाखिल किए गए हैं, जो पिछले साल से लगभग तीन गुना अधिक है. 

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