चुनाव नतीजे.. तेल के दाम, ये 3 फैक्टर बताएंगे, किस करवट बैठेगा शेयर बाजार?

Stock Market अगले सप्ताह किस करवट बैठेगा, इसे तीन बड़े फैक्टर तय करने वाले हैं. इनमें सबसे पहले सोमवार को घोषित होने वाले पांच राज्यों के इलेक्शन रिजल्ट होंगे. इसके अलावा क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी.

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शेयर बाजार की अगले सप्ताह चाल तय करेंगे कई फैक्टर. (Photo: Getty) शेयर बाजार की अगले सप्ताह चाल तय करेंगे कई फैक्टर. (Photo: Getty)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 03 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:47 AM IST

शेयर बाजार (Share Market) की चाल कल से शुरू होने वाले सप्ताह में कई फैक्टर्स पर फोकस करेगी, जिनसे सेंसेक्स-निफ्टी की स्थिति में बदलाव देखने को मिल सकता है. इनमें सबसे अहम है बीते दिनों कई राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे, निवेशकों की पैनी नजर इन Election Results पर रहेगी.

इसके अलावा अमेरिका और ईरान (US Vs Iran) में तनातनी कम नहीं हो रही है, शांति वार्ता के लिए ईरानी प्रस्ताव पर ट्रंप संदेह जता रहे हैं, इससे क्रूड की कीमतों में तेज इजाफे का डर सता रहा है, इन चीजों के अलावा तमाम कंपनियों के तिमाही नतीजे भी शेयर बाजार की चाल तय करने वाले साबित होंगे. 

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पहला फैक्टर: चुनावी नतीजों का मार्केट पर असर 
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, एनालिस्ट अगले सप्ताह शेयर बाजार आउटलुक के लिए तमाम फैक्टर्स को जिम्मेदारी बता रहे हैं. उनका कहना है कि मुख्य रूप से विधानसभा चुनावों के नतीजों और वेस्ट एशिया संघर्ष के बीच कच्चे तेल की कीमतों में आने वाला उतार-चढ़ाव शेयर बाजार को प्रभावित कर सकता है. भारत में बीते दिनों संपन्नि हुए 5 राज्यों, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी के चुनावों के नतीजों की गिनती सप्ताह के पहले दिन सोमवार को होगी, जिसका असर भी Sensex-Nifty की चाल पर देखने को मिलेगा. 

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, एनालिस्ट हरिप्रसाद के का कहना है कि सबसे तत्काल असर बाजार पर विधानसभा चुनावों के परिणाम डालेंगे. उन्होंन कहा नजर इस बात पर रहेगी कि क्या केंद्र में सत्तारूढ़ दल पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को हरा सकता है और क्या विपक्ष के शासन वाले केरल व तमिलनाडु जैसे राज्यों में बदलाव देखने को मिल सकता है. 

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दूसरा फैक्टर: Crude Price और होर्मुज पर नजर
Hormuz Strait Closure से जुड़े अपडेट पर निवेशक नजर रख रहे हैं और इनका बाजार की चाल पर असर पड़ सकता है. एनालिस्ट का कहना है कि कच्चा तेल सबसे महत्वपूर्ण व्यापक आर्थिक कारक बना हुआ है. Hormuz Strait को लेकर अमेरिका और ईरान तनाव के बीच Brent Crude Oil Price हाई पर बने हुए हैं, जो महंगाई का जोखिम बढ़ा रहा है. तेल आयात पर निर्भर भारत जैसे इकोनॉमी के लिए तेल की बढ़ती कीमतें बड़ा संकट मानी जाती हैं. बता दें कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 114 डॉलर प्रति बैरल के पार चल रही है. 

तीसरा फैक्टर: कंपनियों के तिमाही नतीजे 
कच्चे तेल और चुनावी नतीजों के साथ ही शेयर बाजार की चाल पर तमाम कंपनियों द्वारा जारी किए जा रहे चौथी तिमाही के नतीजों का भी देखने को मिलेगा. अगले सप्ताह अंबुजा सीमेंट्स, BHEL, हीरो मोटोकॉर्प, M&M और बजाज ऑटो जैसी कंपनियों के तिमाही आएंगे. इनको होने वाला घाटा या मुनाफा निवेशकों के सेंटिमेंट पर असर डालने वाला साबित होगा.

दूसरी ओर विदेशी निवेशकों का रुख भी सेंसेक्स-निफ्टी में बदलाव लाने वाला होगा, जबकि HSBC मैन्युफैक्चरिं PMI (4 मई), सर्विस पीएमआई डेटा (6 मई) और विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े (8 मई) का आएंगे, जो बाजार की चाल बदल सकते हैं. 

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(नोट- शेयर बाजार में किसी भी तरह के निवेश से पहले अपने मार्केट एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें.)

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