जानवरों के संरक्षण के लिए काम करने वाले संगठन PETA India ने देश की प्रमुख डेयरी कंपनी Amul से वीगन मिल्क प्रोडक्ट्स के उत्पादन पर शिफ्ट होने का आग्रह किया था, इस पर Amul ने PETA India को करारा जवाब दिया है और पूछा कि क्या वो 10 करोड़ गरीब किसानों की आजीविका छीनना चाहती है.
क्या कहा था था PETA India ने
PETA India ने अमूल के मैनेजिंग डायरेक्टर आर. एस. सोढ़ी को पत्र लिखकर कहा था कि उसे वीगन मिल्क प्रोडक्ट्स का उत्पादन करने के बारे में सोचना चाहिए. को-ओपरेटिव सोसायटी कंपनी अमूल को तेजी से बढ़ रहे वीगन फूड और मिल्क मार्केट का लाभ मिलना चाहिए.
PETA India ने अमूल से वीगन मिल्क प्रोडक्ट कंपनी पर शिफ्ट होने का आग्रह किया था. उसने कहा था कि अमूल को संसाधन बर्बाद करने के स्थान पर पौधों पर आधारित उत्पादों की बढ़ती मांग पर ध्यान देना चाहिए. ये मांग बढ़ ही रही है. अन्य कंपनियां इसका फायदा उठा रही हैं तो अमूल भी उठा सकती है.
अमूल ने दिया ये जवाब
PETA India पर पलटवार करते हुए अमूल के मैनेजिंग डायरेक्टर सोढ़ी ने कहा, ‘‘PETA चाहता है कि अमूल 10 करोड़ गरीब किसानों की आजीविका छीन ले. और वह 75 साल में किसानों के साथ मिलकर बनाए अपने सभी संसाधनों को किसी बड़ी एमएनसी कंपनियों द्वारा जेनिटकली मोडिफाई किए गए सोाया उत्पादों के लिए छोड़ दे, वो भी उन कीमतों पर जिसे औसत निम्न मध्यम वर्गीय परिवार खरीदने में भी समक्षम नहीं.
भूमिहीन हैं डेयरी किसान
सोढ़ी ने कहा कि 10 करोड़ गरीब डेयरी किसानों में से करीब 70% यानी 7 करोड़ लोग भूमिहीन हैं. उनके बच्चों की स्कूल फीस कौन भरेगा. इतना ही नहीं कितने लोग फैक्टरी में केमिकल और सिंथेटिक विटामिन से बने इन महंगे उत्पादों को खरीद पाएगा.
इसी के साथ उन्होंने स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय संयोजक अश्विनी महाजन का ट्वीट भी रीट्वीट किया. इसमें कहा गया है अधिकतर डेयरी किसान भूमिहीन हैं. आपका सुझाव उनके इकलौते आय के साध्धन को खत्म कर देगा. ध्यान रहे, दूध हमारी आस्था, परंपरा, स्वाद और खाने की आदतों का हमेशा से अभिन्न अंग रहा है.
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