इजरायल-अमेरिका के ईरान पर हमले के बाद नए युद्ध का आगाज हो चुका है, जो अब धीरे-धीरे बड़ा रूप लेता जा रहा है. ईरान पर हमले के बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान ने मिडिल ईस्ट में कई अमेरिका ठिकानों पर मिसाइलें दागी हैं. कुवैत, कतर, दुबई और सऊदी अरब में ईरानी हमले हुए हैं, जिसका जवाब देने के लिए इजरायज और अमेरिका भी कर रहे हैं. ऐसे में यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि ये वॉर कितने दिनों तक चलेगा और अब कितना बड़ा होगा?
दूसरी ओर, यह भी आशंका जताई जा रही है कि ईरान इन अटैक्स के साथ कूटनीतिक तौर पर होर्मुज जलमार्ग को बंद कर सकता है, जहां से दुनिया का लगभग 40 फीसदी तेल आयात होता है. अगर ये रास्ता बंद होता है तो भारत समेत दुनिया भर में कच्चे तेल आपूर्ति की समस्या तो आएगी ही. साथ में इस रास्ते भारत का एक्सपोर्ट भी प्रभावित होगा. आइए समझते हैं कि भारत के लिए यह कितना बड़ा नुकसान हो सकता है...
मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव से भारत के नॉन -ऑयल एक्सपोर्ट के दसवें हिस्से से ज्यादा पर खतरा बढ़ सकता है. भारत के लिए यह घटना जोखिम ऊर्जा सुरक्षा से कहीं ज्यादा बड़ा है. भारत के लिए तीन प्रमुख आपूर्तिकर्ता कच्चे तेल को इसी मार्ग से भेजते हैं, जबकि तेल के अलावा अन्य कई महत्वपूर्ण व्यापार भी इसी रास्ते से होता है.
47 अरब डॉलर से ज्यादा का निर्यात
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने इसी रास्ते से समुद्री मार्गों पर निर्भर खाड़ी देशों को लगभग 47.6 अरब डॉलर की कीमत के कच्चे तेल को छोड़कर अन्य चीजों का निर्यात किया है. यह भारत के कुल गैर-तेल निर्यात का लगभग 13.2 प्रतिशत है और भारत का कुल समुद्री मार्ग से एक्सपोर्ट तेल को छोड़कर करीब 360.2 अरब डॉलर है.
अगर समुद्री मार्ग प्रभावित होता है तो यह एक बड़ा नुकसान हो सकता है. भारत के निर्यात में सबसे बड़ा हिस्सा संयुक्त अरब अमीरात का है, जिसका निर्यात मूल्य 28.5 अरब डॉलर है, इसके बाद सऊदी अरब का स्थान आता है जिसका मूल्य 11.7 अरब डॉलर है. अन्य बाजारों में इराक (2.8 बिलियन डॉलर), कुवैत (2.1 बिलियन डॉलर), कतर (1.7 बिलियन डॉलर) और ईरान (1.25 बिलियन डॉलर) शामिल है.
लागत में हो सकता है इजाफा
ईरान और ओमान के बीच स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री चोक पॉइंट है, जो बड़ी मात्रा में माल व्यापार के साथ-साथ ग्लोबल एनर्जी शिपमेंट का एक बड़ा हिस्सा संभालता है. इस मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट, चाहे वह अस्थायी ही क्यों न हो, माल ढुलाई की लागत बढ़ा सकती है. साथ ही शिपमेंट में देरी हो सकती है और एशिया-यूरोप के व्यापार को कम कर सकती है.
भारत इन रूटों पर क्या-क्या चीजें एक्सपोर्ट करता है?
भारत इस रूट्स से कई खाड़ी देशों को इंजीनियरिंग सामान, रत्न और आभूषण, खाद्य उत्पाद, रसायन और निर्माण सामग्री भेजता है, ये सभी समुद्री मार्ग पर बहुत अधिक निर्भर करते हैं. ऐसे में यह जंग सिर्फ तेल नहीं कई अन्य व्यापार को भी प्रभावित कर सकती है.
आजतक बिजनेस डेस्क