भारत और अमेरिका में व्यापार समझौते (India-US Trade Deal) जल्द होने की उम्मीद है. कॉमर्स सेक्रेटरी का कहना है कि दोनों देशों के बीच डील का पहला चरण पूरा होने के बेहद करीब है. जल्द ही भारत पर लगा रेसिप्रोकल टैरिफ कम होने का ऐलान हो सकता है, लेकिन डील कबतक होगी? इसकी डेट तय नहीं की जा सकती.
15 जनवरी को राजेश अग्रवाल ने कहा कि दिसंबर के आखिरी सप्ताह में भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (UTR) के बीच एक बैठक हुई थी और दोनों देशों की टीमें आम सहमति पर पहुंचने के लिए लगातार बातचीत कर रही हैं. लेकिन हम कोई समय सीमा तय नहीं कर सकते. दोनों देशों के बीच डील होना बेहद करीब है, लेकिन तारीख नहीं बता सकते हैं.
अग्रवाल ने अमेरिका और भारत के बीच व्यापार वार्ता समाप्त होने की सभी अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि दोनों पक्ष समझौते को सुरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध और प्रयासरत हैं. गौरतलब है कि अमेरिका ने भारत के सभी उत्पादों पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है.
दिसंबर में अमेरिकी टीम आई थी भारत
अमेरिकी व्यापार उप प्रतिनिधि (UTR) रिक स्विट्जर के लीडरशिप में एक प्रतिनिधिमंडल 9 से 11 दिसंबर तक नई दिल्ली में था, जिस दौरान फ्रेमवर्क समझौते के साथ-साथ व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर चर्चा हुई थी. टैरिफ को कम करने और व्यापार संतुलन बनाने के लिए अभी तक दोनों देशों के बीच 6 दौर की बातचीत हुई है, लेकिन अभी तक कोई रास्ता स्पष्ट हीं हो सका है.
कब शुरू हुई थी दोनों देश के बीच बातचीत?
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की बातचीत सबसे पहले फरवरी में शुरू हुई, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच एक बैठक के दौरान, द्विपक्षीय व्यापार के लिए एक साहसिक नया लक्ष्य तय किया गया, जिसका उद्देश्य 2030 तक कुल व्यापार को दोगुने से अधिक बढ़ाकर 500 अरब डॉलर करना है.
48.2 अरब डॉलर पर हाई टैरिफ
हालांकि इसके बाद ट्रंप पूरी दुनिया पर टैरिफ थोपने लगे थे. अप्रैल में डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-चीन समेत कई देशों पर टैरिफ लागू कर दिया था. भारत पर तब 25 फीसदी टैरिफ लागू किया गया था, लेकिन बाद में रूसी तेल का हवाला देते हुए इसे बढ़ाकर 50 फीसदी कर दिया गया. भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता महत्वपूर्ण है क्योंकि लगभग 48.2 अरब डॉलर के भारतीय निर्यात पर उच्च टैरिफ लगाए जा रहे हैं.
अमेरिकी निर्यात में इजाफा
अग्रवाल का कहना है कि भारत को उम्मीद है कि अमेरिका को निर्यात पॉजिटिव बना रहेगा, क्योंकि वर्तमान में टैरिफ-मुक्त इलेक्ट्रॉनिक्स शिपमेंट अब तक एक प्रमुख ड्राइव रहे हैं, चाहे ट्रंप का टैरिफ कितना भी ज्यादा हो. हालांकि इसका असर बाकी सेक्टर्स पर दिखा है . सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 के अप्रैल-दिसंबर के दौरान अमेरिका को निर्यात में साल-दर-साल 9.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 65.9 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया.
आजतक बिजनेस डेस्क