भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) होने जा रहा है, जिसके लिए यूरोपीय प्रतिनिधि भी भारत आ चुके हैं. इस बीच यूरोप ने एक बड़ा फैसला लिया है, वह जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रीफरेंस (GSP) को समाप्त कर रहा है, जिसका मतलब है कि भारत को ज्यादातर निर्यात पर मिलने वाले टैक्स छूट खत्म हो जाएंगे और अब ज्यादा इम्पोर्ट ड्यूटी देनी होगी.
चर्चा है कि इसका असर 87 फीसदी निर्यात पर होगा, लेकिन वित्त मंत्रलाय का कहना है कि यह छूट सिर्फ 2.66 फीसदी तक ही सीमित है. अब आगे जानेंगे कि GSP है क्या, यूरोप ने ठीक FTA डील से पहले क्यों खत्म कर रहा है और इससे भारत-यूरोप के बीच डील कितना प्रभावित होगा?
जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रीफरेंस (GSP) क्या है?
GSP एक ऐसा सिस्टम है, जिसके तहत किसी भी विकासशील देश को यूरोप में सामना बेचने के लिए इम्पोर्ट ड्यूटी में छूट देता है, ताकि उन्हें एक सपोर्ट मिल सके. लेकिन अब यूरोपीय संघ ने 1 जनवरी, 2026 से 31 दिसंबर, 2028 तक भारत, इंडोनेशिया और केन्या के लिए इसे हटाने जा रहा है.
डील से ठीक पहले क्यों हटा रहा ये छूट?
उम्मीद की जा रही है कि भारत-यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का ऐलान 27 अगस्त को हो सकता है. इससे पहले ही यूरोप का इस छूट को खत्म करने से पहले एक बड़ी वजह सामने आई है. दरअसल, ईयू के 'ग्रेजुएशन रुल' (Graduation Rules) की वजह से ये छूट खत्म की जा रही है, जिसमें यह दर्ज है कि अगर किसी देश का निर्यात लिमिट से ज्यादा बढ़ता है तो उसके टैक्स में छूट को खत्म किया जाएगा. इसी नियम के तहत भारत के 87 फीसदी प्रोडक्ट्स से इस छूट को वापस ले लिया गया है. अब केवल 13 फीसदी उत्पाद पर ही ये छूट लागू रहेगी. इससे डील पर कोई असर नहीं होगा.
किन उत्पादों पर पड़ेगा असर?
छूट समाप्त करने से खनिज उत्पाद, केमिकल्स, प्लास्टिक, लोहा और इस्पात, रबर, वस्त्र, मोती और कीमती धातुएं, मोटर वाहन, मशीनरी और विद्युत उपकरण समेत अन्य समानों पर असर होगा. अब इन उत्पादों पर ज्यादा टैरिफ लागू होगा.
सिर्फ 2.66% निर्यात पर असर
हालांकि, वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि नया नियम यूरोपीय संघ को भारत के निर्यात के केवल 2.66 प्रतिशत को प्रभावित करता है, न कि 87 प्रतिशत को. मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यूरोपीय आयोग का नया नियम 1 जनवरी, 2026 को लागू हुआ और 31 दिसंबर, 2028 तक लागू रहेगा. इसके तहत कृषि उत्पादों और चमड़े के उत्पाद को वरीयता कैटेगरी में रखा है.
मंत्रालय के अनुसार, 2023 में भारत से यूरोपीय संघ के आयात की कीमत करीब €62.2 बिलियन था. इसमें से केवल €12.9 बिलियन का व्यापार ही यूरोपीय संघ के मानक GSP के तहत लाभ के लिए पात्र था, क्योंकि भारत पहले ही 12 प्रमुख उत्पाद केटेगरी से बाहर निकल चुका है. नए नियम के तहत, अनुमानित €1.66 बिलियन मूल्य का व्यापार GSP व्यवस्था से बाहर हो जाएगा, जिससे 2023 के आंकड़ों के आधार पर पात्र जीएसपी व्यापार मूल्य घटकर लगभग €11.24 बिलियन रह जाएगा.
यह कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं
मंत्रालय ने कहा कि यह प्रक्रिया किसी देश के निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता पर आधारित है और यूरोपीय संघ द्वारा समय-समय पर इसकी समीक्षा की जाती है. समय के साथ कई उत्पादों को इस कैटेगरी से बाहर निकालना दंडात्मक व्यापारिक कार्रवाई नहीं है. यह उसके निर्यात के बढ़ते कंम्पटीशन को दिखाता है.
आजतक बिजनेस डेस्क