भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौता होने के बाद से अमेरिका के भारतीय बाजार में पिछड़ने का खतरा मड़रा रहा है. इस बीच, इकोनॉमिस्ट ने अमेरिका को आइना दिखा दिया है. उन्होंने कहा है कि ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका 90 दिनों में 90 समझौते करेगा, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया है. वहीं भारत ने अमेरिका से 100 फीसदी ज्यादा ट्रेड डील की है.
वेदा पार्टनर्स की मैनेजिंग पार्टनर और आर्थिक नीति अनुसंधान निदेशक हेनरिटा ट्रेज ने कहा कि अमेरिकी अपने व्यापारिक साझेदारों पर टैरिफ लगाने को लेकर भी सतर्क हैं. एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि इस साल भारत के पास डोनाल्ड ट्रंप की तुलना में 100 प्रतिशत अधिक समझौते हैं.
सिर्फ 10 महीने में 2 डील्स
उन्होंने 90 दिनों में 90 समझौतों का वादा किया था, लेकिन 10 महीनों में केवल 2 डील कर पाए है और वह कंबोडिया और मलेशिया के साथ है. उनका यह बयान भारत-यूरोपीय संघ द्वारा एक विशाल व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद आया है, जिसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा जा रहा है.
फ्री ट्रेड डील पर भी टैरिफ
ट्रेज ने कहा कि कई मुद्दों के कारण अमेरिका-दक्षिण कोरिया समझौता भी पूरा नहीं हो पाया है. उन्होंने बताया कि दक्षिण कोरिया अमेरिका के साथ मुक्त व्यापार समझौते के तहत आता है. हालांकि, ट्रंप यूरोपीय संघ, जापान और दक्षिण कोरिया को टैरिफ लगाने की धमकी दे रहे हैं.
उन्होंने कहा कि सांसदों के लिए चिंता की बात यह है कि अमेरिका इन टैरिफ को पसंद नहीं करते हैं. 50 प्रतिशत अमेरिकी चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट इन्हें कैंसिल कर दे. ये व्यापार समझौते और शुल्क अमेरिकी मानसिकता पर भारी पड़ रहे हैं और राष्ट्रपति की लोकप्रियता को कम कर रहे हैं.
अमेरिका का विकल्प तलाश रहे थे यूरोप और भारत
कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत और यूरोपीय संघ अमेरिका के टैरिफ और दबावों से निपटने के लिए उससे अलग होने का रास्ता तलाश रहे थे. ऐसे में भारत-यूरोपीय संघ मुक्त समझौता दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद साबित होगा. भारत पर उच्चतम टैरिफ ब्रैकेट यानी 50 प्रतिशत टैरिफ लागू है, जिसमें रूस से तेल खरीदने पर ट्रंप द्वारा लगाया गया 25 प्रतिशत टैरिफ भी शामिल है. अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि 25 प्रतिशत टैरिफ हटाने की अभी भी संभावना है.
आजतक बिजनेस डेस्क