अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध और इसके चलते होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से कच्चे तेल की कीमतों ने दुनिया को बीते कुछ समय में डराने का काम किया है. लेकिन सोमवार को अचानक ये क्रैश (Crude Oil Price Crash) हो गई और लंबे समय बाद कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई.
ये बड़ी गिरावट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान युद्ध को लेकर आए एक बयान के बाद अचानक देखने को मिली है, जिसमें उन्होंने कहा कि US-Iran शांति समझौते के बेहद करीब पहुंच चुके हैं. इससे पहले बीते सप्ताह भी ट्रंप ने संकेत दिए थे कि आने वाले दिनों में क्रूड के दाम क्रैश हो जाएंगे और इसमें तेज गिरावट देखने को मिली थी.
क्या थमने वाली है US-ईरान जंग?
अमेरिका और ईरान के बीच जंग थमने और होर्मुज स्ट्रेट फिर से ओपन किए जाने के संकेत लगातार डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दिए जा रहे हैं. ताजा अपडेट को देखें, तो Donald Trump ने कहा है कि ईरान के साथ शांति समझौते पर काफी हद तक बात बन चुकी है और इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है. इसके साथ ही Hormuz Strait को फिर से खोला जल्द खोला जाएगा. इससे पहले उन्होंने कहा था कि अपने सलाहकारों के साथ इस संबंध में चर्चा कर रहे हैं.
अचानक 100 डॉलर के नीचे कच्चा तेल
डोनाल्ड ट्रंप की ओर से मिले ईरान युद्ध खत्म होने के सिग्नल का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिला, जो लगातार 100 डॉलर के पार बनी हुई थीं, लेकिन अब क्रैश होकर इस स्तर के नीचे फिसल गई हैं. खबर लिखे जाने तक Brent Crude Price 98 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था, तो वहीं WTI Crude Oil Price 92 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया था.
क्या सस्ता होगा Petrol-Diesel?
अमेरिका-ईरान तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग और दुनिया की तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा पूरा करने के लिए जरूरी होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट का असर दुनिया में फ्यूल प्राइस हाइक के रूप में देखने को मिला है. ब्रिटेन से लेकर पाकिस्तान तक और बांग्लादेश से लेकर श्रीलंका तक में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तगड़ी बढ़ोतरी की गई है.
भारत की बात करें, तो ये भी इस ग्लोबल संकट से प्रभावित हुआ है और चार साल में पहले बार Petrol-Diesel Price Hike In India देखने को मिला. भले ही दूसरे देशों की तुलना में भारत में कीमतों में कम बढ़ोतरी की गई, लेकिन महज 10 दिन में पेट्रोल-डीजल के दाम चार बार बढ़ाए गए हैं. इसकी वजह कच्चा तेल महंगा होने से तेल कंपनियों को हो रहे नुकसान को बताया गया है.
ऐसे में क्रूड ऑयल प्राइस में गिरावट के बाद उम्मीद बढ़ गई है कि ईंधन में बढ़ोतरी का सिलसिला थमेगा. क्योंकि पेट्रोल-डीजल की कीमतों के निर्धारण में अन्य कारकों के साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का अहम रोल होता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमत में 1 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी होने पर देश में पेट्रोल और डीजल के दाम औसतन 50 से 60 पैसे प्रति लीटर बढ़ने की संभावना रहती है और इसकी कीमतों में गिरावट से सस्ता होने की.
आजतक बिजनेस डेस्क