Warning On Rupee: रुपये को लेकर वार्निंग... एक्सपर्ट बोले- अगर हुआ ऐसा, तो 95 तक लुढ़क जाएगा!

Goldman Sachs Warning On Rupee: भारतीय करेंसी रुपया में गिरावट जारी है और ये बढ़ सकती है. गोल्डमैन सैश के अर्थशास्त्री ने डॉलर के मुकाबले रुपये के 95 तक टूटने की चेतावनी दी है.

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बुधवार को डॉलर के मुकाबले लो-लेवल तक टूटा रुपया. (Photo: Reuters) बुधवार को डॉलर के मुकाबले लो-लेवल तक टूटा रुपया. (Photo: Reuters)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 18 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 9:14 PM IST

अमेरिका-ईरान में युद्ध से ग्लोबल टेंशन चरम (Global Tension High) पर है. क्रूड के दाम स्थिर हैं, लेकिन 100 डॉलर से ऊपर बने हुए हैं और दुनिया में तेल संकट गहराता जा रहा है. इन सबसे बीच भारत के लिए विदेश से एक बुरी खबर आई है, जो भारतीय करेंसी रुपया (India Rupee) से जुड़ी है. दरअसल गोल्डमैन सैश के चीफ इकोनॉमिस्ट ने चेतावनी देते हुए कहा है कि रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95 तक टूट सकता है. 

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अभी तो और टूटेगा रुपया!
ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में Goldman Sachs के चीफ इकोनॉमिस्ट संतनु सेनगुप्ता ने ये आशंका जताई है. उन्होंने कहा है कि अगले एक साल में भारतीय करेंसी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95 तक फिसल सकती है. रुपये को लेकर वार्निंग देते हुए उन्होंने इस गिरावट के पीछे मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का कनेक्शन बताया. 

रिपोर्ट के मुताबिक, सेनगुप्ता ने कहा कि ग्लोबल टेंशन के बीच महंगे होते क्रूड ऑयल और चालू खाते में बढ़ोतरी से रुपये पर दबाव बनता नजर आ रहा है. अगर तेल के दाम ऊंचे रहते हैं, तो ऐसी स्थिति में भारत का आयात बिल बढ़ सकता है और रुपया पर दबाव के चलते ये नया रिकॉर्ड लो लेवल छू सकता है.  

बुधवार को रिकॉर्ड लो पर रुपया
बता दें कि सप्ताह की तीसरे कारोबारी दिन करेंसी मार्केट में रुपया तेजी से गिरा और रिकॉर्ड लो-लेवल पर आ गया. तेल की कीमतों को लेकर गहराई चिंता के बीच रुपया गिरकर 92.63 प्रति डॉलर पर आ गया, जबकि बीते सप्ताह इंडियन करेंसी ने 92.47 का लो-लेवल छुआ था और अब इसे पार कर गया है. 

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गोल्डमैन सैश के इकोनॉमिस्ट ने आगे कहा कि भारत में भले ही अभी महंगाई दर नियंत्रण में है, लेकिन अगर Crude Oil Price लगातार हाई पर पहुंचते रहे, तो फिर रुपया कमजोर होता जाएगा और सीधे तौर पर इसका असर महंगाई के रूप में देखने को मिल सकता है. 

RBI को उठाने होंगे सख्त कदम
रुपया को लेकर ये अनुमान जाहिर करते हुए संतनु सेनगुप्ता ने कहा कि इसे लेकर भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई को सख्त कदम उठाने होंगे. गौरतलब है कि किसी भी देश की करेंसी का टूटना इकोनॉमी के लिए अच्छा नहीं होता है. इससे सबसे बड़ा खतरा महंगाई का होता है. 

डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने से पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स से लेकर विदेशों में पढ़ाई पर होने वाले खर्च तक पर देखने को मिलता है. इसे दूसरे शब्दों में समझें, तो भारत कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक है और अपनी जरूरत का 80% क्रूड आयात करता है. ऐसे में जब रुपया टूटता है, तो तेल खरीदने के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं.

Petrol-Diesel Price Hike का जोखिम बढ़ता है और फ्यूल महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स कॉस्ट में इजाफा होता है. खासतौर पर जो चीजें आयात की जाती हैं, वो महंगी हो जाती हैं. 

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