वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026 में आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन इसके बाद भी सैलरीड टैक्सपेयर्स के पास वित्त वर्ष 2026-27 में नई टैक्स व्यवस्था के तहत अपने टैक्स बिल को कम कर सकते हैं. यहां तक कि आप चाहे तो 14 लाख रुपये से ज्यादा तक की कमाई पर शून्य टैक्स भर सकते हैं.
आयकर की धारा 87A के तहत बढ़ी हुई छूट के कारण 12 लाख रुपये तक की इनकम पर कोई टैक्स नहीं देना होता है, लेकिन वेतन पाने वाले सावधानीपूर्वक वेतन संरचना के माध्यम से इस सीमा को इससे कहीं अधिक तक बढ़ा सकते हैं. वन फाइनेंस के टैक्स हेड और सीए पराग जैन के अनुसार, वेतनभोगी कर्मचारी EPF और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) जैसी सेवानिवृत्ति योजनाओं में नियोक्ता के योगदान पर 14.65-14.66 लाख रुपये तक पर टैक्स बचा सकते हैं. आइए जानते हैं कैसे...
टैक्स सेविंग कैलकुलेशन
जैन ने बताया कि टैक्स फ्री सैलरी की अधिकतम सीमा तभी हासिल की जा सकती है, जब सैलरी संरचना में ईपीएफ और एनपीएस दोनों शामिल हों. उन्होंने कहा कि न्यू टैक्स रिजीम में अगर कोई कर्मचारी EPF और NPS दोनों का विकल्प चुनता है और बेसिक सैलरी सीटीसी के करीब 50 फीसदी के बराबर है, तो करीब 14.65 लाख रुपये का कुल सैलरी टैक्स फ्री किया जा सकता है.
कैसे टैक्स फ्री हो जाएगी 14.65 लाख की इनकम?
मान लीजिए 7.32 लाख रुपये के बेसिक सैलरी पर नियोक्ता का 12% EPF कंट्रीब्यूशन लगभग 87,900 रुपये बनता है, जिसे टैक्स योग्य इनकम में नहीं जोड़ा जाता है. बाकी सैलरी से 75,000 रुपये की मानक कटौती लागू होती है. इसके अतिरिक्त, नियोक्ता का एनपीएस कंट्रीब्यूशन बेसिक सैलरी के 14% तक या लगभग 1.02 लाख रुपये की धारा 80CCD(2) के तहत कटौती योग्य है. इससे टैक्सेबल इनकम करीब 12 लाख रुपये हो जाता है, जिससे धारा 87A की छूट के तहत टैक्स फ्री हो जाता है.
खास बात यह है कि इस कैलकुलेशन में EPF, NPS और पेंशन फंड्स में नियोक्ता के योगदान पर तय 7.5 लाख रुपये की कुल सालाना सीमा का उल्लंघन नहीं होता है, क्योंकि कुल नियोक्ता योगदान सीमा के भीतर ही रहता है.
आजतक बिजनेस डेस्क