Economic Survey: कब होगी US से डील? टैरिफ को लेकर नो-टेंशन, इकोनॉमिक सर्वे की बड़ी बातें

India US Trade Deal: रुपया लगातार कमजोर हो रहा है. आर्थिक सर्वे की मानें तो अमेरिकी टैरिफ के दौर में कमजोर रुपया इकोनॉमी के लिए बहुत ज्यादा नुकसानदेह नहीं है. सरकार का फोकस एक्सपोर्ट बढ़ाने पर है.

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आर्थिक सर्वे में टैरिफ और ट्रेड डील का जिक्र. (Photo: ITG) आर्थिक सर्वे में टैरिफ और ट्रेड डील का जिक्र. (Photo: ITG)

अमित कुमार दुबे

  • नई दिल्ली,
  • 29 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:05 PM IST

अमेरिका के साथ ट्रेड डील (Trade Deal) का आर्थिक सर्वेक्षण (Economy Survey) में जिक्र किया गया है. वैसे तो दोनों देशों के बीच लगातार बातचीत चल रही है, लेकिन आर्थिक सर्वे में इस डील पर साल 2026 में मोहर लगने का अनुमान लगाया गया है. 

सबसे अच्छी खबर अर्थव्यवस्था को लेकर है. आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष की तीन तिमाहियों में अमेरिकी टैरिफ का असर एक्सपोर्ट और मैन्यूफैक्चरिंग पर पड़ने के बावजूद ग्रोथ की रफ्तार बनी रही. क्योंकि सरकार की ओर से लगातार टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं. यानी अमेरिकी टैरिफ, कमजोर वैश्विक मांग और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारत की आर्थिक गति पर मामूली असर पड़ा है.

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जीडीपी में मजबूती के पीछे ये कारण 
   
दरअसल, आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में देश की अर्थव्यवस्था की मजबूती को रेखांकित किया गया है. सर्वे के मुताबिक, FY26 के फर्स्ट एडवांस एस्टीमेट में भारत की GDP ग्रोथ 7.4% रही, जो मुख्य रूप से घरेलू मांग के मजबूत बने रहने का नतीजा है.

आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि इन्फ्रास्ट्रक्चर में विस्तार और फिस्कल अनुशासन में सुधार की वजह से भारत की ग्रोथ टिकाऊ बनी हुई है. वित्‍त वर्ष 2026  में वित्‍तीय घाटा जीडीपी का 4.4 फीसदी तक प्रत्‍याशित रहा है, जो पिछले वित्‍त वर्ष में 4.8 प्रतिशत था.

आर्थिक सर्वे के मुताबिक, घरेलू मांग भारत की विकास कहानी की सबसे बड़ी ताकत बनी हुई है. ग्रामीण और शहरी मांग में संतुलन दिख रहा है, जबकि इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में लगातार निवेश से रोजगार और आय के अवसर बढ़े हैं. सड़क, रेलवे, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में सरकार के बढ़ते खर्च ने आर्थिक गतिविधियों को गति दी है. 

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वैश्विक दबाव के बावजूद जोरदार प्रदर्शन 
सर्वे की मानें तो वैश्विक स्तर पर डाउनसाइड रिस्क बने हुए हैं. हालांकि, यह भी कहा गया है कि मौजूदा वैश्विक हालात भारत के लिए तत्काल मैक्रो-इकोनॉमिक संकट पैदा नहीं करते. मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार, स्थिर बैंकिंग सिस्टम और नीति विश्वसनीयता भारत के लिए सुरक्षा कवच बने हुए हैं. 

सरकार का निर्यात पर फोकस
आर्थिक सर्वे के अनुसार, करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) पर निर्भरता के कारण रुपया कुछ हद तक अंडरवैल्यूड है. अमेरिकी टैरिफ के दौर में कमजोर रुपया इकोनॉमी के लिए बहुत ज्यादा नुकसानदेह नहीं है. लेकिन मुद्रा स्थिरता के लिए मैन्युफैक्चरिंग एक्सपोर्ट बढ़ाना जरूरी होगा. खासतौर पर वैल्यू-एडेड और टेक्नोलॉजी आधारित निर्यात पर जोर देने की सिफारिश की गई है. 

इसी कड़ी में पहली बार आर्थिक सर्वे में AI को लेकर एक अलग चैप्टर है, यानी नई टेक्नोलॉजी पर आने वाले दिनों में सरकार को पूरा फोकस रहने वाला है. इसके साथ सोने-चांदी की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी पर भी सरकार की नजरें हैं. कीमतों धातुओं में तेजी के पीछे ग्लोबल कारण बताए गए हैं. 

आर्थिक सर्वे का मानना है कि अगर इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश, निर्यात में बढ़ावा और राजकोषीय अनुशासन इसी तरह बनाए रखे गए, तो भारत वैश्विक अस्थिरता के बीच भी तेज और संतुलित विकास की राह पर बना रह सकता है. 

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इस बीच आर्थिक सर्वे में राज्यों को सलाह दी गई है कि वे कैश ट्रांसफर के बजाय पूंजीगत खर्च (Capex) को प्राथमिकता दें, ताकि अर्थव्यवस्था में निजी निवेश को पीछे धकेलने यानी क्राउडिंग आउट का खतरा न बढ़े.

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