'लड़का डॉक्टर है, थोड़ा देख लीजिए...', जनसुनवाई के दौरान जब बिहार के डिप्टी सीएम ने रिश्ते की कर दी सिफारिश

बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा हाल ही में भागलपुर में हुई भूमि राजस्व विभाग की जनसुनवाई के दौरान एक निजी सामाजिक मुद्दा उठाकर चर्चा में आए. उनके इस अनौपचारिक अंदाज का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. उन्होंने एक डॉक्टर लड़के की शादी से जुड़े मामले पर डीएम से ध्यान देने को कहा, जिससे मौके पर मौजूद अधिकारी चकित रह गए.

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जनसुनवाई के मंच से शादी की बात करते नज़र आए डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा (Photo: ITG/ Ranjan Rahi) जनसुनवाई के मंच से शादी की बात करते नज़र आए डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा (Photo: ITG/ Ranjan Rahi)

शशि भूषण कुमार

  • पटना,
  • 06 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:46 PM IST

बिहार के उपमुख्यमंत्री और भूमि राजस्व विभाग के मंत्री विजय कुमार सिन्हा इन दिनों अपने एक अलग अंदाज के कारण सुर्खियों में हैं. हाल ही में भागलपुर में आयोजित भूमि राजस्व विभाग की जनसुनवाई के दौरान उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में डिप्टी सीएम जमीन विवाद या राजस्व मामलों की बजाय एक निजी और सामाजिक मुद्दे पर बात करते दिखाई दे रहे हैं.

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भागलपुर की जनसुनवाई में डिप्टी सीएम के साथ जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे. इसी दौरान विजय कुमार सिन्हा ने अचानक मंच से एक लड़के की शादी का मामला उठाया, जो डॉक्टर है और उसी जिले में तैनात है. 

उन्होंने डीएम से कहा कि शादी के मामले में थोड़ा ध्यान दिया जाए. माना जा रहा है कि यह मामला डिप्टी सीएम के किसी परिचित की बेटी से जुड़ा है.

जनसुनवाई जैसे औपचारिक सरकारी कार्यक्रम में इस तरह के व्यक्तिगत मुद्दे का उठना मौके पर मौजूद अधिकारियों को चौंका गया, लेकिन डिप्टी सीएम का सहज और मानवीय लहजा था, जिससे पता चला कि वे इसे एक संवेदनशील आग्रह के रूप में रख रहे थे.

यह भी पढ़ें: नीतीश से ज्यादा अमीर उनके डिप्टी सीएम, सम्राट के पास कैश तो विजय सिन्हा के पास ज्यादा सोना-चांदी

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इस घटना के बाद विभागीय अधिकारियों के बीच सतर्कता का माहौल बना हुआ है क्योंकि विजय कुमार सिन्हा सख्ती और सीधे संवाद के लिए जाने जाते हैं. इस बार उनकी इस मानवीय पहल ने लोगों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं पैदा की हैं. कुछ लोग इसे एक संवेदनशील जनप्रतिनिधि की पहचान बता रहे हैं तो कुछ इसे जनसुनवाई के मंच की गरिमा से जुड़ा सवाल मान रहे हैं.

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