पुलिस पाठशाला के बच्चों को मिला आर्थिक सुरक्षा, रेड लाइट इलाके के छात्रों को मिला बैंक FD का तोहफा

बिहार के मुजफ्फरपुर में पुलिस पाठशाला के बच्चों की बचत अब बैंक एफडी तक पहुंच गई है. गुल्लक बैंक में जमा पैसों में सहयोग जोड़कर मेधावी छात्रों के नाम SBI में फिक्स डिपॉजिट कराया गया. बता दें कि कभी पुलिस से डरने वाले बच्चे आज ‘जय हिंद’ बोलते हैं और सामाजिक जागरूकता कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं.

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स्लम के बच्चों के नाम खुली FD.(Photo: Manibhushan Sharma/ITG) स्लम के बच्चों के नाम खुली FD.(Photo: Manibhushan Sharma/ITG)

मणिभूषण शर्मा

  • मुजफ्फरपुर,
  • 17 मई 2026,
  • अपडेटेड 5:22 PM IST

बिहार के मुजफ्फरपुर में रेड लाइट और स्लम इलाके के बच्चों के भविष्य को संवारने की एक अनोखी पहल की गई है. कन्हौली पुलिस नाका में चल रही ‘पुलिस पाठशाला’ के छात्रों का सफर अब गुल्लक बैंक से आगे बढ़कर बैंक एफडी तक पहुंच गया है. इस पहल का उद्देश्य बच्चों को बचपन से बचत की आदत सिखाना और आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है.

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दरअसल, पुलिस पाठशाला में बच्चों को छोटी-छोटी बचत करने के लिए ‘गुल्लक बैंक’ की शुरुआत की गई थी. बच्चे अपनी बचत इसमें जमा करते थे. अब उन्हीं पैसों में पाठशाला की ओर से सहयोग राशि जोड़कर मेधावी बच्चों के नाम से बैंक में फिक्स डिपॉजिट कराया गया है. यह कदम बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

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बच्चों को पासबुक सौंपने के लिए भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के चीफ जनरल मैनेजर अनुराग जोशी स्वयं कार्यक्रम में पहुंचे. इस दौरान बच्चों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी और अधिकारियों ने इस पहल की सराहना की.

पुलिस पाठशाला का बदलता असर

पुलिस पाठशाला की सबसे खास बात यह है कि यहां बच्चों को पुलिसकर्मी ही पढ़ाते हैं. कभी यही बच्चे पुलिस को देखकर डर जाते थे और भाग जाते थे, लेकिन अब वही बच्चे पुलिस कर्मियों का ‘जय हिंद’ बोलकर स्वागत करते हैं. यह बदलाव इस पहल के सामाजिक प्रभाव को दर्शाता है.

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कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने कम उम्र में शादी के खिलाफ नुक्कड़ नाटक भी प्रस्तुत किया. इस नाटक के जरिए बाल विवाह के दुष्परिणामों को दिखाया गया, जिसे कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने काफी सराहा. इससे बच्चों में सामाजिक जागरूकता का संदेश भी सामने आया.

पाठशाला से जुड़ी नशीमा ने बताया कि शुरुआत में यहां केवल 15 बच्चे आते थे, लेकिन अब डेढ़ सौ से अधिक बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि इन बच्चों के सामने सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक असुरक्षा होती है, इसलिए गुल्लक बैंक की शुरुआत की गई थी.

बच्चों के भविष्य के लिए बढ़ता सहयोग

नशीमा ने कहा कि बचत की आदत बच्चों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. गुल्लक बैंक से शुरू हुई यह पहल अब बैंक एफडी तक पहुंच गई है, जो बच्चों के भविष्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि है.

कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने भी बच्चों के प्रयासों और पुलिस पाठशाला की इस पहल की जमकर सराहना की. उनका कहना था कि इस तरह के प्रयास समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं.

अनुराग जोशी ने कहा कि बच्चों को फिक्स डिपॉजिट की पासबुक सौंपते हुए उन्हें बेहद खुशी हो रही है. उन्होंने कहा कि देश के हर वंचित इलाके में ऐसी पहल होनी चाहिए और एसबीआई आगे भी हर संभव सहयोग करेगा.

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