बिहार की राजनीति में बड़ा फेरबदल लगभग तय माना जा रहा है, जहां सत्ता का संतुलन बदलने की तैयारी है. नए समझौते के तहत जेडीयू और बीजेपी के बीच भूमिकाएं उलटने जा रही हैं. अब तक जेडीयू नेतृत्व में चल रही सरकार में बीजेपी ‘बड़े भाई’ की भूमिका में आएगी और मुख्यमंत्री पद उसके खाते में जाएगा.
सूत्रों के अनुसार, इस नई व्यवस्था में जेडीयू को दो उपमुख्यमंत्री पद दिए जाएंगे. सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया जल्द शुरू होने की संभावना जताई जा रही है. इससे राज्य की मौजूदा राजनीतिक संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.
वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 10 अप्रैल से राज्यसभा सदस्य के रूप में अपना नया कार्यकाल शुरू करेंगे. इससे पहले वे मुख्यमंत्री पद और विधान परिषद की सदस्यता छोड़ देंगे. जेडीयू सूत्रों का कहना है कि वे केंद्र सरकार में मंत्री बनने के बजाय राज्यसभा सदस्य के रूप में सक्रिय रहेंगे.
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नई सरकार का फॉर्मूला और मंत्रालयों का बंटवारा
गठबंधन के नए फॉर्मूले के तहत सरकार की संरचना में बदलाव किया जाएगा. बीजेपी के पास मुख्यमंत्री पद के साथ 15 मंत्री पद होंगे, जबकि जेडीयू को दो उपमुख्यमंत्रियों समेत 16 मंत्री पद दिए जाएंगे.
गृह मंत्रालय बीजेपी के पास ही रहेगा और विधानसभा अध्यक्ष का पद भी बीजेपी को मिलेगा. वहीं, विधान परिषद के सभापति का पद जेडीयू को मिलने की संभावना जताई जा रही है.
यह बदलाव न केवल सत्ता संतुलन को प्रभावित करेगा, बल्कि गठबंधन के भीतर शक्ति समीकरण भी पूरी तरह बदल देगा.
निशांत कुमार की एंट्री और भविष्य की रणनीति
इस पूरे घटनाक्रम में सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की सक्रिय राजनीति में एंट्री को अहम माना जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक, उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है, जबकि दूसरे उपमुख्यमंत्री के रूप में जेडीयू के किसी वरिष्ठ नेता को जिम्मेदारी दी जाएगी.
नीतीश कुमार सरकार को मार्गदर्शन देते रहेंगे और पार्टी संगठन को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने पर ध्यान देंगे.
सहयोगी दलों के लिए पहले जैसा फॉर्मूला लागू रहेगा, जिसमें एलजेपी (रामविलास) को दो मंत्री पद, जबकि आरएलपी और ‘हम’ को एक-एक मंत्री पद मिलेंगे. नई सरकार का फोकस चुनावी वादों को पूरा करने और 2029 के लोकसभा तथा 2030 के विधानसभा चुनावों के लिए मजबूत राजनीतिक जमीन तैयार करना होगा.ॉ
नीतीश का सम्राट चौधरी की तरफ इशारा!
बता दें कि बुधवार को जमुई में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी की ओर इशारा करते हुए कहा कि 'ये बिहार को संभालेंगे और राज्य आगे बढ़ेगा.' इससे पहले सहारसा में भी नीतीश कुमार ने सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रखकर एक तरह का राजनीतिक संदेश दिया था. जमुई में दिए गए इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गईं कि सम्राट चौधरी को भविष्य के मुख्यमंत्री के तौर पर देखा जा रहा है.
हालांकि, इन कयासों के बीच जेडीयू ने साफ किया है कि ऐसा कोई संकेत नहीं दिया गया है. पार्टी के वरिष्ठ नेता और मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि नीतीश कुमार ने सम्राट चौधरी को अपना उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया है. इसके बावजूद यह सवाल बना हुआ है कि क्या सम्राट चौधरी आगे चलकर बिहार की कमान संभाल पाएंगे. गौरतलब है कि उन्हें बीजेपी नेतृत्व के करीबी नेताओं में गिना जाता है.
हिमांशु मिश्रा