बिहार विधान परिषद में सोमवार से शुरू हुए हंगामे का सिलसिला मंगलवार को भी जारी रहा. मंगलवार को सदन की कार्यवाही तय समय से 15 मिनट देर से शुरू हुई, लेकिन माहौल पहले से ही गर्म था. विपक्ष ने कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोंकझोंक हो गई और हाथापाई की नौबत आ गई. सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी के बीच कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा के मुद्दे पर तीखी नोकझोंक हुई थी, जिसके कारण सदन की कार्यवाही दोपहर तक स्थगित करनी पड़ी थी.
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोमवार को भारी हंगामे के बाद मंगलवार को जब सदन की कार्यवाही तय समय से 15 मिनट से शुरू हुई. जैसे ही सदन चला, विपक्ष ने कानून-व्यवस्था पर नारेबाजी शुरू कर दी. इसी बीच आरजेडी के विधान पार्षद (MLC) सुनील कुमार सिंह और मंत्री अशोक चौधरी के बीच जमकर भिड़ंत हो गई. बातचीत गाली-गलौज और व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गई.
सुनील सिंह ने सोमवार की घटना के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से माफी मांगने की मांग की, जबकि अशोक चौधरी ने कहा कि सभापति को विशेषाधिकार है कि सदन कब शुरू करें.
'CM को मांगनी चाहिए माफी'
इसके जवाब में सुनील सिंह ने कहा कि कल (सोमवार) सदन में जो घटना हुई, उसके लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को माफी मांगनी चाहिए.
इसके बाद तकरार बढ़ती गई. मंत्री अशोक चौधरी ने आरोप लगाया कि दलित होने के कारण विपक्षी सदस्य उन्हें टारगेट कर रहे हैं. सदन में हंगामा बढ़ता देख सभापति ने विपक्षी सदस्यों को मार्शल आउट करने का आदेश दिया. सभापति ने पूरे दिन के लिए विपक्षी सदस्यों को सस्पेंड कर दिया और मार्शल ने विपक्ष के सदस्यों को सदन से बाहर निकाल दिया.
प्लेकार्ड लेकर पहुंचे सदस्य
बता दें कि ये हंगामा दरभंगा में 6 साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या, खगड़िया में अन्य घटनाओं तथा राज्य में बढ़ते अपराध और महिला सुरक्षा के मुद्दे पर केंद्रित रहा. विपक्ष ने सदन में 'बलात्कार में नंबर वन बिहार' जैसे प्लेकार्ड दिखाए और सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया. सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर असंसदीय व्यवहार और मुद्दों से भटकाने का इल्जाम लगाया. सोमवार को विपक्ष ने इन मुद्दों पर विशेष चर्चा की मांग की थी, जिस पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विपक्ष पर तंज कसा था.
उन्होंने कहा था कि विपक्ष ने कभी कोई काम नहीं किया और राबड़ी देवी को उनके पति के इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री बनाया गया था. राबड़ी देवी ने भी सरकार पर कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का आरोप लगाया था.
मंगलवार को हंगामा इतना बढ़ गया कि सदन में हाथापाई की नौबत तक आ गई. सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर असंसदीय व्यवहार का आरोप लगाया, जबकि विपक्ष ने सरकार पर लापरवाही और मुद्दों से भटकाने का इल्जाम लगाया. सभापति ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाए और विपक्षी सदस्यों को निलंबित कर दिया.
AISA-AIPWA का मार्च
वहीं, विधान परिषद के हंगामे के साथ ही पटना में महिला उत्पीड़न और NEET छात्रा की मौत जैसे मामलों के खिलाफ AISA (ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन) और AIPWA (ऑल प्रोग्रेसिव वूमेन एसोसिएशन) ने विरोध मार्च निकाला. प्रदर्शनकारी गांधी मैदान से विधानसभा घेराव के लिए निकले, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया.
प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़े और जेपी गोलंबर पर भारी बवाल मचा दिया. पुलिस प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करते हुए लाठीचार्ज किया, लेकिन महिलाएं विधानसभा की ओर बढ़ती रहीं.
ये प्रदर्शन राज्य में महिलाओं, छात्राओं और बच्चियों के खिलाफ बढ़ती हिंसा तथा प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ थे. संगठनों ने सरकार से महिला-बाल अपराधों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई और न्याय की मांग की.
शशि भूषण कुमार