बेगूसराय के दियारा इलाके में मंगलवार की दोपहर खेतों में मक्के की कटाई चल रही थी. सब कुछ वैसे ही था जैसा गांव में होता है- लोग काम में लगे, बच्चे इधर-उधर, और गर्मी के बीच रोजमर्रा की भागदौड़. लेकिन अचानक ऐसा हुआ कि पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई. झाड़ियों से एक पागल गोल्डन जैकाल निकला और सीधे खेत में काम कर रहे लोगों पर टूट पड़ा.
पहला हमला सविता कुमारी पर हुआ. वह कुछ समझ पातीं, उससे पहले गीदड़ ने उन्हें काट लिया. चीख सुनकर उनके नाना सुरेश शाह दौड़े, लेकिन गीदड़ ने उन्हें भी नहीं छोड़ा. फिर तो जैसे वह बेकाबू हो गया. जिसने बचाने की कोशिश की, उसी पर हमला कर दिया. कुछ ही मिनटों में सात लोग घायल हो चुके थे. खेत, जहां कुछ देर पहले फसल कट रही थी, अचानक चीख-पुकार से भर गया.
गांव वालों के मुताबिक, गीदड़ बिल्कुल पागल की तरह बर्ताव कर रहा था. वह भाग नहीं रहा था, बल्कि लोगों का पीछा कर-करके काट रहा था. लोग जान बचाकर इधर-उधर भागे. कोई मेड़ पर चढ़ गया, कोई खेत छोड़कर दूर भागा. इसी दौरान गुस्साए ग्रामीणों ने डंडे और लाठी लेकर उसे घेर लिया और गीदड़ को पीट-पीटकर मार डाला.
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घायलों को पहले बछवाड़ा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, लेकिन चार लोगों की हालत गंभीर होने पर उन्हें सदर हॉस्पिटल भेजा गया. अस्पताल में घायलों के पहुंचते ही भीड़ जमा हो गई. परिजन परेशान थे, डॉक्टर इलाज में जुटे थे, और गांव से लगातार लोग हालचाल लेने पहुंच रहे थे.
इस पूरे मामले में एक और बात सामने आई. अस्पताल में दवा की कमी की चर्चा थी. कुछ लोगों ने कहा कि एंटी-रेबीज इंजेक्शन तुरंत नहीं मिल रहा था. इस मामले को लेकर सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि दवा की कमी नहीं है. बछवारा से सूचना मिली थी कि गीदड़ के काटने से घायल हुए तीन-चार मरीजों को बेगूसराय भेजा जा रहा है. सभी का इलाज किया जा रहा है. जो लोग गंभीर हैं, उनका भी इलाज बेहतर तरीके से किया जा रहा है.
सौरभ कुमार