बैटरी खत्म होने की नो-टेंशन! चलती इलेक्ट्रिक कार खुद होती है चार्ज, कैसे काम करती हैं REEV गाड़ियां

इलेक्ट्रिक कारों को लेकर लोगों को हमेशा एक डर सताता है कि क्या हो अगर रास्ते में बैटरी खत्म हो जाए. कई बार इन गाड़ियों को चलाते हुए लगता है कि क्या होता अगर एक पावर बैकअप साथ होता. ऐसा ही एक पावर बैकअप रेंज एक्सटेंडर ईवी में मिलता है. ये टेक्नोलॉजी लोगों को ईवी पर स्विच करने में मदद कर सकती है, लेकिन ये हाइब्रिड से काफी अलग है.

Advertisement
रेंज एक्सटेंडर इलेक्ट्रिक कार में बैटरी को चार्ज करने के लिए एक इंजन लगा होता है. (Photo: media.stellantis.com) रेंज एक्सटेंडर इलेक्ट्रिक कार में बैटरी को चार्ज करने के लिए एक इंजन लगा होता है. (Photo: media.stellantis.com)

अभिषेक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 26 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 10:44 AM IST

दुनिया भर में कारों की बेहतर फ्यूल एफिशिएंसी के लिए कई तरह की टेक्नोलॉजी पर काम हो रहा है. इलेक्ट्रिक कारों को फ्यूचर माना जा रहा है. ईवी पर कंपनियों ने बड़ा दांव लगाया, लेकिन सेल के मामले में ये पेट्रोल-डीजल वाली कारों से बहुत पीछे हैं. सेल्स के आंकड़े तो यही बताते हैं कि लोग ईवी पर स्विच करने में हिचकिचा रहे हैं. भारतीय बाजार में मारुति ने सिर्फ एक इलेक्ट्रिक कार लॉन्च की है.

Advertisement

वहीं कुछ कंपनियों के पोर्टफोलियो में एक भी कार नहीं है. ईवी से लोगों की बेरुखी की एक बड़ी वजह रेंज एंजायटी है. राह चलते जाने कहां कार का पहिया रुक जाए और स्क्रीन पर लो बैटरी या 0 बैटरी पावर दिखने लगे. ऐसे में कुछ कंपनियां हाइब्रिड पर काम कर रही हैं. 

ऐसी ही एक टेक्नोलॉजी है रेंज एक्सटेंडर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (Range Extender Electric Vehicles- REEV), जिसे ईवी का एक्सटेंशन भी कहा जा सकता है. हालांकि, ये टेक्नोलॉजी हाइब्रिड कार्स से अलग है. 

क्या होती हैं REEV गाड़ियां?

जहां हाइब्रिड कार इंजन और बैटरी दोनों पर चलती है. वहीं रेंज एक्सटेंडर में कार सिर्फ बैटरी पर चलती है. इसे आप एक तरह की इलेक्ट्रिक कार ही समझें, जिसमें बैटरी को चार्ज करने के लिए एक इंजन भी लगा होता है. ये इंजन कार को चलाता नहीं है बल्कि जनरेटर को पावर देता है जिससे बैटरी चार्ज होती है. 

Advertisement

आसान भाषा में बताएं तो REEV यानी रेंज एक्सटेंडर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स एक ईवी ही होती है. इसमें एक पेट्रोल इंजन होता है. ये इंजन कार में लगे एक जेनरेटर को पावर देता है. ये जेनरेटर ही इलेक्ट्रिसिटी प्रोड्यूस करती है जिसकी मदद से बैटरी चार्ज होती है. इसकी वजह से कार हमेशा बैटरी पर चलती है और जैसे ही एक निश्चित वक्त के बाद बैटरी की पावर कम होती है, इंजन उसे चार्ज करने लगता है. इस कार को आप ईवी की तरह घर पर चार्ज भी कर सकते हैं.

यह भी पढ़ें: Vida VX2 Plus KKR: 142Km रेंज, फटाफट चार्ज! Hero का धांसू इलेक्ट्रिक स्कूटर लॉन्च

कैसे काम करती है ये टेक्नोलॉजी? 

इस तरह की कार को चलाना पूरी तरह से एक इलेक्ट्रिक कार चलाने जैसा अनुभव है. रास्ते पर चलते हुए जब बैटरी को चार्ज करने की जरूरत पड़ती है, तब कार का इंजन ऑटोमेटिक स्टार्ट हो जाता है. रेंज एक्सटेंडर की वजह कार को चार्ज करने के लिए किसी चार्जिंग स्टेशन पर रुकना जरूरी नहीं होता है, जिससे रेंज एंजायटी की समस्या से भी छुटकारा मिलता है.

चूंकि इसमें बैटरी को चार्ज करने के लिए एक बैकअप लगा होता है, तो इससे लंबी दूरी की यात्रा की जा सकती है. साथ ही बैटरी को चार्ज करने के लिए इंजन ऑप्टिमम स्पीड पर चलता है, तो उसकी एफिशिएंसी ज्यादा होती है. ये टेक्नोलॉजी बैटरी + मोटर + इंजन पर काम करती है. 

Advertisement

यह भी पढ़ें: Renault Duster का माइलेज आया सामने, एक लीटर में चलेगी इतने KM

किन लोगों के लिए है ये टेक्नोलॉजी? 

भारत जैसे देश के लिए ये टेक्नोलॉजी कारगर साबित हो सकती है, जहां अभी तक ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह से विकसित नहीं हुआ है. ये उन लोगों को ईवी की तरफ मोड़ सकता है, जो रेंज की वजह से ईवी पर स्विच करने से बचते हैं. ये टेक्नोलॉजी कई देशों में इस्तेमाल हो रही है. 

जर्मनी, यूरोप और चीन में ऐसी कई गाड़ियां हैं, जो इस टेक्नोलॉजी पर काम करती हैं. BMW i3 REx ऐसी ही एक कार है, जिसमें 647सीसी का छोटा इंजन दिया गया है. ये इंजन कार की रेंज को 300 किलोमीटर तक बढ़ा देता है. चीन में इस टेक्नोलॉजी पर काफी तेजी से काम हो रहा है.

इस तरह की कार लीपमोटर (Leapmotor) के पास भी है, जो संभवतः भारत में एंट्री कर सकती है. कंपनी के पोर्टफोलियो में C10 REEV कार है, जिसमें 1.5 लीटर का एक इंजन और 28.4kWh की बैटरी लगी है. कंपनी दावा करती है कि ये कार कम्बाइंड पावर के साथ 1150 किलोमीटर की रेंज ऑफर करती है. इस कंपनी का आधिकार स्टेलांटिस ग्रुप के पास है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement