हनुमान जयंती पर सिनेमा की मोस्ट अवेटेड फिल्म 'रामायणम्' का पहला टीजर आ चुका है. दंगल फेम निर्देशक नितेश तिवारी इस फिल्म को डाइरेक्ट कर रहे हैं और रणबीर कपूर श्रीराम की मुख्य भूमिका में हैं. गुरुवार को जब फिल्म की पहली झलक दिखाई दी तो ये फैंस और ऑडियंस के लिए बड़ा सरप्राइजिंग मोमेंट रहा.
टीजर रिलीज बाद इसकी पहली झलक की ही हर ओर चर्चा है. रणबीर कपूर का लुक, फिल्म की मेकिंग, वीएफएक्स और ग्राफिक्स के अलावा जो एक और बात चर्चा में है वो है टीजर में दिखाया गया पुष्पक विमान.
पुष्पक विमान पर टिक गईं निगाहें
इस पूरे टीजर में फैंस के लिए जो सबसे अधिक फैसिनेटिंग है, वो है पुष्पक विमान. फिल्म में पुष्पक विमान की अच्छी डीटेलिंग देखने को मिलेगी. इसमें पुष्पक विमान को फूल की तरह दिखाया गया है. जो कि इसके पुष्पक नाम से रिलेट करता है. यह इस विमान की पारंपरिक छवि से या अब तक की इसकी देखी गई इमेज से अलग नजर आता है.
हालांकि रामायण और रामचरित मानस में पुष्पक विमान को एक पालकी की तरह बताया गया है, जिसमें हंस के पंख लगे हैं और यह मन की गति से उड़ता है. रामायणम् फिल्म में पुष्पक विमान को देखना एक अलग रोमांच होगा.
पौराणिक कहानियों में कैसा है पुष्पक विमान
पुष्पक विमान का जिक्र पौराणिक महाकाव्य रामायण में आकाशीय विमान के तौर पर होता है. यानी ये बताता है कि इतनी पुरानी कहानी में भी उड़ने वाले विमानों का कॉन्सेप्ट था. रावण इसी विमान से आवाजाही करता था और आकाशीय मार्ग से चलता था.इसी विमान का उल्लेख सीता हरण प्रकरण में भी मिलता है.
रामायण के अनुसार राम-रावण युद्ध के बाद श्रीराम, सीता, लक्ष्मण, राजा विभीषण और बहुत से लोग इसीसे लंका से अयोध्या आये थे.
वैसे ये विमान, धन के देवता कुबेर के पास था. कुबेर को जब ब्रह्माजी ने यक्षों का राजा बनाया और इंद्र ने देवताओं का कोषाध्यक्ष तब उन्हें देवलोक की संपत्ति के तौर पर यह विमान भी मिला था. लेकिन जब रावण ने कुबेर से लंका छीन ली और उन्हें वहां से बेदखल कर दिया तब उसने सोने की लंका सहित पुष्पक विमान पर भी अपना कब्जा जमा लिया था.
विश्वकर्मा, अंगिरा, और ऋषि भारद्वाज, तीनों ने बनाए थे विमान
कई ग्रन्थों में जिक्र आता है कि पुष्पक विमान का स्ट्रक्चर ऋषि अंगिरा ने तैयार किया था. इसका बनाया और सजाया देव-शिल्पी विश्वकर्मा ने था. दावा है कि भारत के प्राचीन हिन्दू ग्रन्थों में लगभग दस हजार वर्ष पहले विमानों का युद्धों में प्रयोग का वर्णन है. इस विमान की खासियत थी कि इसे छोटा या बड़ा किया जा सकता था. ये मन की गति से चलता था. रावण के वध के बाद भगवान राम ने इसे सिर्फ एक बार लंका से अयोध्या आने के लिए ही प्रयोग किया था. इसके बाद उन्होंने इसे कुबेर को ही लौटा दिया था.
श्रीलंका में हुए शोध के मुताबिक, रावण के पास अपने पुष्पक विमान को रखने के लिए चार विमानक्षेत्र थे. इन चार विमानक्षेत्रों में से एक का नाम उसानगोड़ा था. इस हवाई अड्डे को हनुमान जी ने लंका दहन के समय जलाकर नष्ट कर दिया था. अन्य तीन हवाई अड्डे गुरूलोपोथा, तोतूपोलाकंदा और वारियापोला थे जो बच गए थे.
महर्षि भारद्वाज थे विमान विद्या के जानकार
महर्षि भारद्वाज को विमान विद्या का जानकार माना जाता है. ऋगवेद में लगभग 200 से अधिक बार विमानों की बात आती है. इसमें जिन विमानों का उल्लेख है उनमें 'शकुन', 'त्रिपुर', 'सुन्दर' और 'रूक्म' हैं. ये कई तलों के भी हुआ करते थे और यंत्रों से चलते थे. समरांगणसूत्रधार नामके ग्रंथ में विमानों के बारे में और उन से जुड़े विज्ञान की बहुत प्राचीन जानकारियां मिलती हैं. हालांकि, यह एक बहस का विषय है कि प्राचीन ग्रंथों में जो भी जिक्र मिलता है, वो सच है या कल्पना.
वाल्मीकि रामायण में पुष्पक विमान को सोने जैसा चमकीला, बादलों का साथी (यानी बादलों जितनी ऊंची उड़ान वाला) रतन जड़ा, पुष्पों से सजा हुआ था. इसे श्रेष्ठ हंसों द्वारा खींचा जाता था.
तस्य ह्म्यर्स्य मध्यथ्वेश्म चान्यत सुनिर्मितम। बहुनिर्यूह्संयुक्तं ददर्श पवनात्मजः॥ -वाल्मीकि रामायण
विमान को देखकर हनुमान जी भी चौंक गए थे. रावण के महल के पास रखे पुष्पक की लंबाई-चौड़ाई ऐसी थी कि यह अपने आप में किसी महल जैसा ही लगता था. रामायण पर आधारिक सभी फिल्मों, नाटकों, रामलीलाओं में पुष्पक विमान को आकाश में चलने वाले वायुयान जैसा ही दिखाया गया है. देखना ये है कि रामाणय फिल्म में ये कैसा और किस तरह का नजर आने वाला है.
विकास पोरवाल