शील्ड ऑफ जूडा... ईरान पर हमले के लिए इजरायल ने क्यों चुना ये नाम, क्या है इसके मायने

इजरायल ने शनिवार को ईरान पर शील्ड ऑफ जूडा नामक ऑपरेशन के तहत हमला किया जिसमें ईरान के राष्ट्रपति भवन और खुफिया एजेंसी मुख्यालय को निशाना बनाया गया. इस ऑपरेशन का नाम यहूदी इतिहास और धार्मिक प्रतीकों से जुड़ा है, जो सुरक्षा और शक्ति का प्रतीक है.

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इजरायल ने ईरान पर सैन्य ऑपरेशन का नाम 'शील्ड ऑफ जूडा' रखा है इजरायल ने ईरान पर सैन्य ऑपरेशन का नाम 'शील्ड ऑफ जूडा' रखा है

विकास पोरवाल

  • नई दिल्ली,
  • 28 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:03 PM IST

इजरायल ने शनिवार को ईरान पर हमला बोला. इजरायल ने ईरान के राष्ट्रपति भवन को निशाना बनाया है, इसके अलावा ईरानी खुफिया एजेंसी के हेडक्वार्टर को निशाना बनाया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक इस वक्त ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई तेहरान में नहीं है. उन्हें सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया है. इजरायल ने इस ऑपरेशन का नाम शील्ड ऑफ जुडा यानी कि यहूदी की ढाल रखा है. वहीं इजरायल के प्रधानमंत्री ने ईरान पर हमले को शेर की दहाड़ नाम दिया है.

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‘शील्ड ऑफ जूडा’ नाम क्यों पड़ा? ऑपरेशन के पीछे की रणनीति
इजरायल का अपने ऑपरेशन का नाम 'शील्ड ऑफ जूडा' (Shield of Judah) रखना सिर्फ नाम रखना भर नहीं है, बल्कि ये प्राचीनता और परंपरा का गहरा सिंबल है.इसका गहरा धार्मिक और ऐतिहासिक संदर्भ है. 'जूडा' उस जनजाति और वंश का नाम है, जिसका जिक्र बाइबिल में भी आता है. यह वही वंश है जिससे यहूदी पहचान और बाद में इजरायल के राजवंश की नींव भी जुड़ती है. ऐसा यहूदी धार्मिक लोककथाओं में पुरानी और गहरी मान्यता है.

जूडा, पैगंबर याकूब जिन्हें Jacob (जैकब) भी कहा जाता है, उनके बारह बेटों में से एक थे. 'बुक ऑफ जेनेसिस' के मुताबिक जूडा को खास ताकतें मिली थीं, साथ ही ये भविष्यवाणी भी थी कि उनके वंश से ही सत्ता स्थापित होगी. 'जेनेसिस 49:10' में लिखा मिलता है कि “राजदंड जूडा से नहीं हटेगा.” यह कथन जूडा को सत्ता की ताकत दिलाता है और उसे सर्वेसर्वा के तौर पर पहचान दिलाता है. यही वजह है कि बाद में 'किंग डेविड' और 'किंग सोलोमन' का वंश भी जूडा की जनजाति से माना गया.

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लायन ऑफ जूडा’: शेर क्यों बना यहूदी पहचान का प्रतीक
जूडा को 'लायन ऑफ जूडा' के रूप में भी जाना जाता है. जेनेसिस में ही उसकी तुलना शेर से होती मिलती है. ये पॉवर, स्ट्रेंथ के साथ ही लीडरशिप का सिंबल भी है. यही दहाड़ता शेर बाद में यहूदी पहचान का भी सिंबल बन गया. इजरायल के राज्य-चिन्हों और धार्मिक प्रतीकों में शेर की मौजूदगी इसी परंपरा से जुड़ी है.

अब शील्ड पर ध्यान दें तो बाइबिल में भी सुरक्षा और दैवीय संरक्षण के तौर पर शील्ड का जिक्र मिलता है. जैसे कि 'प्साल्म्स 18:2ट में ईश्वर को 'माय शील्ड' (My Shield, मेरे रक्षाकवच) कहा गया है. यह दैवीय सुरक्षा की ढाल है. इस तरह देखें तो 'शील्ड ऑफ जूडा' का अर्थ केवल सैन्य ढाल नहीं, बल्कि दैवीय संरक्षण और ऐतिहासिक विरासत की रक्षा भी है.

राजा सोलोमन की मृत्यु के बाद इजरायल का राज्य दो भागों में बंट गया. उत्तरी राज्य 'इजरायल' और दक्षिणी राज्य 'जूडा' दक्षिणी राज्य जूडा में यरुशलम राजधानी थी और यहीं यहूदी मंदिर भी था. यह राज्य लगभग 586 ईसा पूर्व तक अस्तित्व में रहा, जब बेबिलोन के राजा नबूकदनेजार ने इसे हराकर कब्जे में लिया. इतिहास में 'किंगडम ऑफ जूडा' यहूदी धार्मिक परंपरा और पहचान का केंद्र रहा. बेबिलोन निर्वासन (Babylonian Exile) के बावजूद जूडा की याद और उसकी गरिमा यहूदी चेतना में बनी रही. यही कारण है कि 'ज्यू' (Jew) शब्द भी 'जूडा' से ही निकला माना जाता है.

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आधुनिक इजरायल और बाइबिलीय प्रतीकों का संबंध
आज के इजरायल राज्य की स्थापना 1948 में हुई, लेकिन उसके विचार और उसके कल्चर की जड़ें बाइबिल और जेनेसिस से निकली परंपराओं से जुड़ी हैं. 'लायन ऑफ जूडा' और जूडा की ढाल जैसे प्रतीक राष्ट्रीय अस्मिता, ऐतिहासिक अधिकार और धार्मिक विश्वास को सामने रखते हैं. यह नाम केवल एक जवाबी कार्रवाई नहीं, बल्कि 'इतिहास, आस्था और पहचान की रक्षा' का वचन है.

इस नाम में तीन स्तरों गरिमा छिपी है. धार्मिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक भी. 'शील्ड ऑफ जूडा' नाम केवल सैन्य रणनीति का संकेत नहीं देता, बल्कि यह विरासत को आगे बढ़ाता है. यही 'शील्ड ऑफ जूडा' के असल मायने हैं.

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