उत्तर प्रदेश सरकार ने पशुपालकों को बड़ी राहत देते हुए जानवरों के लिए एंबुलेंस जैसी सुविधा शुरू की है. इसके लिए पशुपालकों को 1962 डायल करना होगा. प्रदेश के अपर मुख्य सचिव पशुपालन मुकेश मेश्राम ने बताया कि हेल्पलाइन नंबर 1962 के तहत पशुपालकों को उनके घर पर ही पशु चिकित्सा की सुविधा दी जाती है.
पशु चिकित्सा वैन जीपीएस से लैस है, जो चलता-फिरता अस्पताल जैसा है. जिसमें पशु चिकित्सक, सहायक, आवश्यक दवाइयां, छोटे ऑपरेशन की सुविधा, कृत्रिम गर्भाधान और बीमार पशुओं को ड्रिप लगाने की व्यवस्था है.
पशुओं को अस्पताल ले जाने की जरूरत नहीं
इस सुविधा के तहत पशुपालकों को अपने पशुओं को अस्पताल ले जाने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि डॉक्टर और आवश्यक दवाइयां उनके दरवाजे पर पहुंच जाती हैं. वहीं, बीमार पशुओं का मुफ्त इलाज किया जाता है.
इसके अलावा इस वैन में पशुओं में होने वाली बीमारियों जैसे खुरपका-मुंहपका (FMD) और गलघोंटू सहित अन्य संक्रामक रोगों से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण की सुविधा भी मिलती है. पशुओं की नस्ल सुधार के लिए कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा भी प्रदान की जाती है.
पशुओं के खून, गोबर समेत जांच के लिए लैब
एसीएस पशुपालन मुकेश मेश्राम बताते हैं कि वैन में पशुओं के खून, गोबर समेत जांच के लिए एक छोटा लैब की सुविधा भी उपलब्ध है. इस एंबुलेंस सेवा में डॉक्टर और स्टाफ गांव तक पहुंचकर पशुओं का इलाज करते हैं. बड़े पशुओं के इलाज के लिए प्रति पशु 150 रुपये का शुल्क लिया जाता है. यह सुविधा खासतौर पर दूरस्थ क्षेत्रों के पशुपालकों के लिए राहत लेकर आई है. किसान 1962 टोल-फ्री नंबर पर कॉल करके बीमार पशुओं के लिए आपातकालीन सेवा का लाभ उठा सकते हैं.
आजतक एग्रीकल्चर डेस्क