अमरूद की फसल अक्सर किसानों के लिए चिंता का कारण बनती है, खासकर तब जब मौसम और कीटों का प्रकोप बढ़ जाता है लेकिन कई किसान अपनी सूझबूझ और पारंपरिक ज्ञान के दम पर इस चुनौती का सामना करते हैं. वे महंगे रसायनों या आधुनिक तकनीक पर निर्भर हुए बिना अपने बागों की देखभाल करते हैं और फल को कीट-मुक्त रखते हैं. आज भी ये पारंपरिक तरीके आधुनिक तकनीकों के मुकाबले असरदार साबित हो रहे हैं और किसानों को बाजार में बेहतरीन गुणवत्ता वाले फल बेचने का भरोसा दे रहे हैं.
नीम के पत्तों से कीट नियंत्रण
किसान रसायनों के बजाय नीम की पत्तियों का गाढ़ा घोल तैयार कर पेड़ की टहनियों और छोटे फलों पर छिड़कते हैं. नीम के कड़वेपन की वजह से कीट और मक्खियां फलों के पास नहीं आतीं. यह तरीका सस्ता, सुरक्षित और असरदार है.
सड़ी हुई गोबर की खाद से मिट्टी मजबूत
कम से कम एक साल पुरानी सड़ी हुई गोबर की खाद डालकर किसान मिट्टी को पोषण देते हैं. इससे पेड़ मजबूत बनता है, फल का आकार बेहतर होता है और तुड़ने के बाद भी फल लंबे समय तक ताजा रहता है.
साफ-सफाई और रोग नियंत्रण
पेड़ के नीचे गिरे हुए सड़े फल तुरंत हटाए जाते हैं. इससे फफूंदी और कीटों का खतरा कम होता है और पूरे बगीचे की फसल सुरक्षित रहती है.
संतुलित सिंचाई
अमरूद के फल पकते समय हल्की और नियमित सिंचाई की जाती है. ज्यादा पानी देने से फल फट सकता है या अंदर से गल सकता है.
सही समय पर तुड़ाई और भंडारण
फल हल्का पीला होते ही तोड़ा जाता है. इसके बाद फलों को ठंडी, हवादार जगह पर, बांस की टोकरियों या जालीदार बोरों में रखा जाता है. इससे फलों की ताजगी और चमक बनी रहती है और बाजार में अच्छी कीमत मिलती है.
आजतक एग्रीकल्चर डेस्क