गर्मी का मौसम खेती के लिए चुनौतीपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस दौरान पानी की कमी, तेज धूप और मिट्टी का सूखना किसानों के लिए मुश्किलें बढ़ा देता है लेकिन कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसान सही फसल का चुनाव करें, तो यही मौसम कम समय में ज्यादा मुनाफा देने वाला साबित हो सकता है.
दरअसल, गर्मियों में उगाई जाने वाली शॉर्ट ड्यूरेशन (कम अवधि) फसलें तेजी से तैयार होती हैं और कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती हैं. यही वजह है कि ये फसलें किसानों के जोखिम को कम करती हैं और कम समय में आय का बेहतर जरिया बनती हैं.
क्यों फायदेमंद हैं ये फसलें
कम अवधि वाली फसलें आमतौर पर 30 से 70 दिनों में तैयार हो जाती हैं. इससे किसानों को जल्दी फसल मिलती है और खेत खाली नहीं रहता. साथ ही इन फसलों में पानी की जरूरत भी कम होती है, जिससे सिंचाई का खर्च घटता है और मौसम के जोखिम से भी बचाव होता है.
गर्मियों की कम अवधि वाली प्रमुख फसलें
मूंग
मूंग की फसल करीब 60–70 दिनों में तैयार हो जाती है. यह कम पानी में भी अच्छी तरह उगती है और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में मदद करती है. इसकी बाजार में हमेशा मांग बनी रहती है.
लोबिया
यह फसल गर्म और सूखे मौसम में भी आसानी से उग जाती है. 50–60 दिनों में इसकी फली तैयार हो जाती है और यह मिट्टी को भी बेहतर बनाती है.
खीरा
खीरा एक तेज़ी से बढ़ने वाली फसल है, जो लगभग 45–50 दिनों में तैयार हो जाती है. गर्मियों में इसकी मांग ज्यादा रहती है और सही देखभाल से बार-बार उत्पादन मिलता है.
भिंडी
भिंडी 50–65 दिनों में तैयार हो जाती है और लंबे समय तक उत्पादन देती रहती है. यह अलग-अलग मिट्टी में आसानी से उग जाती है और बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिलती है.
तरबूज और खरबूजा
ये फसलें गर्मियों में सबसे ज्यादा पसंद की जाती हैं. कम समय में तैयार होकर यह किसानों को अच्छा मुनाफा देती हैं और बाजार में इनकी मांग भी ज्यादा रहती है.
कम पानी में ज्यादा फायदा
विशेषज्ञों का कहना है कि इन फसलों को अपनाकर किसान कम पानी में ज्यादा उत्पादन ले सकते हैं. यह फसलें सूखे और गर्म मौसम को सहन कर लेती हैं, जिससे फसल खराब होने का खतरा भी कम रहता है.
किसानों के लिए सुनहरा मौका
गर्मी के मौसम में सही रणनीति अपनाकर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं. कम अवधि वाली फसलों से न सिर्फ जल्दी कमाई होती है, बल्कि अगली फसल के लिए भी समय बच जाता है.
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