केले की खेती से बंपर कमाई का मौका, सरकार दे रही है 50% तक सब्सिडी, जानें डिटेल्स

केले की खेती करने वाले किसानों के लिए बिहार सरकार एक महत्वपूर्ण योजना लेकर आई है. इस योजना के तहत किसानों को केले की कमई करने पर 50% सब्सिड दी जाएगी. वहीं बिहार सरकार की इस योजना का उद्देश्य फलों की खेती को बढ़ावा देना है.

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aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 6:34 PM IST

किसानों के लिए केले की खेती एक लाभकारी कृषि व्यवसाय है. कम लागत में इसमें ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है. वहीं ये रोजगार का एक बेहतर विकल्प भी है. बिहार सरकार केले की खेती करने पर 50 प्रतिशत की सब्सिडी दे रही है, जिससे किसानों को बंपर कमाई का मौका मिलेगा. इस योजना के तहत किसानों को केले की बागवानी करने पर 50% अनुदान राशि दी जाएगी. 

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बता दें कि टिशू कल्चर से खेती करने के दौरान एक हेक्टेयर में 1 लाख 25 हजार की लागत आती है, जिसमें किसानों को 50 प्रतिशत यानि 62,000 हजार रुपये सब्सिडी के तौर पर मिलेंगे. बिहार सरकार की इस योजना का उद्देश्य फलों की खेती को बढ़ावा देना है. 
 


केले की खेती ऐसे करें

1) पहले करें भूमि का चयन

केले की खेती के लिए मिट्टी का चयन बहुत जरुरी है. केले का बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के लिए भूमि की जांच जरुर करवा लेनी चाहिए ताकि भूमि में, जिन पोषक तत्त्वों की कमी हो उसको पूरा किया जा सके. केले की खेती करने के लिए भूमि का पीएच मान 6-7.5 के बीच होना चाहिए. इसके अलावा खेत का चुनाव करते समय इस बात का ध्यान रखें कि वहां हवा जरूर आती हो.

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2) कैसी होनी चाहिए जलवायु 

केले की खेती के लिए 13 डिग्री से 38 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान अच्छा रहता है. इसकी फसल 75-85 प्रतिशत की नमी में अच्छी तरह बढ़ती है. 


3) टिशू कल्चर तकनीक से तैयार किये गए पौधों का करें रोपण 

केले की खेती में समय को बचाने के लिए और जल्दी आमदनी के लिए टिशू कल्चर से तैयार पौधे को ही लगाना चाहिए. टिशू कल्चर से तैयार पौधों की फसल करीब एक साल में तैयार हो जाती है. हालांकि, इसकी फसल को ज्यादा ठंडे और गर्म तापमान से बचाना जरूरी होता है. 

4) खेती के लिए उत्तम किस्में और कैसे करें खेत को तैयार 

केले की खेती के लिए कई उन्नत किस्में मौजूद हैं. इसमें सिंघापुरी के रोबेस्टा नस्ल के केले को खेती के लिए बेहतर माना जाता है. इससे केले की अधिक पैदावार मिलती है. इसके अलावा केले की बसराई, हरी छाल, सालभोग, अल्पान तथा पुवन इत्यादि प्रजातियां भी अच्छी मानी जाती हैं. केला रोपने से पहले ढेंचा, लोबिया जैसी हरी खाद की फसल उगाई जानी चाहिए और उसे जमीन में गाड़ देना चाहिए. ये मिट्टी के लिए खाद का काम करती है. अब केले के खेत तैयार करने के लिए जमीन को 2-4 बार जोतकर समतल कर लेना चाहिए. 

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5) केले के पौधे रोपने के लिए कैसे तैयार करे गड्ढे 

केले की पौध का रोपण करने के लिए 45*45*45 सेमी के आकर के गड्ढे की आवश्यकता होती है. गड्ढों में 10 किलो खाद, 250 ग्राम खली और 20 ग्राम कार्बोफ्युरॉन को गड्ढे में भर दें और उसे खुला छोड़ दें ताकि सूरज की धूप लग सके. 

6) केले की खेती के लिए खाद और उर्वरक का प्रयोग

बारिश का मौसम शुरू होने से पहले यानी जून के महीने में खोदे गए गड्ढों में 8.15 किलोग्राम नाडेप कम्पोस्ट खाद, 150-200 ग्राम नीम की खली, 250-300 ग्राम सिंगल सुपर फास्फेट, 200 ग्राम नाइट्रोजन, 200 ग्राम पोटाश डाल कर मिट्टी भर दें और समय पर पहले से खोदे गए गड्ढों में केले की पौधे लगा देनी चाहिए. 

7) केले की पौधे की रोपाई का समय और सही तरीका

ड्रिप सिंचाई की सुविधा हो तो पॉली हाउस में टिशू कल्चर तकनीक से केले की खेती वर्ष भर की जा सकती हैं. महाराष्ट्र में इसकी खेती के लिए मृग बाग खरीफ रोपाई के महीने जून- जुलाई, कान्दे बहार (रबी) रोपाई के महीना अक्टूबर- नवम्बर महीना महत्वपूर्ण माना जाता है. पारंपरागत रूप से केला  उत्पादक फसल की रोपाई 1.5 मी*1.5 मीटर के साथ करते है. उत्तर भारत के तटीय पट्टों जहां नमी बहुत अधिक हो और तापमान 5-7 तक गिर जाता है वहां रोपाई का अंतराल 2.1 मी * 1.5 मी से कम नहीं  होनी चाहिए. रोपाई करते समय केले पौधे की जड़ीय गेंद को छेड़े बगैर उससे पॉलीबैग को अलग किया जाता है और उसके बाद छह तने को भू-स्तर से 2 सें.मी. नीचे रखते हुए पौधों को गड्ढों में रोपा जा सकता है. पौधों को गहरा नहीं रोपना चाहिए. 

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