उत्तर भारत में इस मार्च में मौसम लगातार बदल रहा है. तेज गर्मी के बाद आए पश्चिमी विक्षोभों के चलते पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश और राजस्थान में बार-बार बारिश, तेज हवाएं और आंधी-तूफान हो रहे हैं. यह फसलों के लिए चिंता का सबसे बड़ा कारण बन रहा है, खासकर गेहूं और अन्य खड़ी फसलों के लिए.
बारिश और तेज हवाओं से क्या खतरा है?
लगातार हो रही बारिश से खेतों में जलभराव हो सकता है. पानी की ज्यादा मात्रा से फसल की जड़ें सड़ सकती हैं और पौधों की वृद्धि रुक सकती है. तेज हवाओं से फसल झुक सकती है या पूरी तरह गिर सकती है (लॉजिंग). गिरी हुई फसल के दाने जल्दी खराब होने लगते हैं, जिससे पैदावार घट जाती है. नमी बढ़ने से फसल में रोगों का खतरा बढ़ जाता है, खासकर फंगल रोग जैसे येलो रस्ट और ब्लैक रस्ट.
किसान क्या कदम उठाएं
खेत में जल निकासी सुनिश्चित करें
बारिश के बाद खेत में पानी जमा न होने दें. नालियां साफ करें और खेत में जहां पानी जमा हो, वहां तुरंत निकासी का इंतजाम करें. इससे फसल की जड़ों को नुकसान नहीं होगा और रोगों का खतरा भी कम रहेगा.
गिरी फसल को सहारा दें
अगर तेज हवाओं के कारण गेहूं या अन्य फसल झुक जाए, तो उसे सहारा देने की कोशिश करें. इसके लिए लकड़ी या बांस की छोटी सहारे वाली ढांचियां बनाई जा सकती हैं. इससे दानों के खराब होने की संभावना घटती है.
फंगल और अन्य रोगों से बचाव
नमी और बारिश से फसलों में रोग फैल सकते हैं. समय रहते फफूंदनाशक दवा का छिड़काव करें. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखते ही उपचार शुरू कर दिया जाए.
अतिरिक्त सिंचाई फिलहाल बंद रखें
जब बारिश हो चुकी है, तब कुछ दिनों तक खेत में सिंचाई न करें. मिट्टी में जरूरत से ज्यादा नमी बनने से जड़ें कमजोर हो सकती हैं और रोगों का खतरा बढ़ता है.
मौसम अपडेट पर नजर रखें
आने वाले दिनों में मौसम विभाग के अलर्ट पर ध्यान दें. 25 से 31 मार्च तक लगातार बारिश और तेज हवाओं की संभावना है, इसलिए खेती के काम (जैसे फसल की कटाई, खाद या दवा छिड़काव) उसी के हिसाब से योजना बनाकर करें.
कटाई की तैयारी समय पर करें
जहां फसल पकने के करीब है, वहां मौसम साफ होते ही जल्दी कटाई करें. देर करने से तेज हवाओं या बारिश के कारण फसल गिर सकती है और दाने खराब हो सकते हैं.
फसल सुरक्षा उपाय अपनाएं
छोटे पौधों के लिए सहारा देने वाली ढांचियां या तार का जाल बिछाएं. अगर फसल में पौधों के बीच जगह कम है, तो थोड़ी खाली जगह छोड़कर पानी निकासी सुनिश्चित करें. बड़े किसानों के लिए पंप और ड्रेनेज सिस्टम तैयार रखें, ताकि बारिश के पानी का स्टोरिंग और निकासी दोनों संभव हो.
आजतक एग्रीकल्चर डेस्क