अप्रैल के महीने में बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने उत्तर प्रदेश के किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है. गेहूं की पकी हुई फसल सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है. कई जिलों में खेतों में पानी भर गया है, फसलें जमीन पर बिछ गई हैं और दाने खराब होने लगे हैं. किसान चिंतित हैं कि इस साल उनकी आमदनी कितनी घट जाएगी.
प्रदेश में बारिश से फसलों को नुकसान की आशंका के चलते कृषि विभाग ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है. जिसमें कहा गया है कि अगर खेतों में खड़ी फसल भीग गई है तो उसे 1-2 दिन सूखने दें. यदि कटी हुई फसल खेत में पड़ी है तो पानी न रुकने दें. उसे बोझा बनाकर खड़ा कर दें. वहीं, खलिहान में रखी भीगी फसल को खोलकर अच्छी धूप और हवा में सुखाएं, फिर मड़ाई करें. स्टोर करने से पहले ध्यान रखें कि फसल में 10 प्रतिशत से ज्यादा नमी न रहे. ज्यादा नमी से फसल पर फफूंद लग सकती है.
हिमाचल: बेमौसम बारिश-बर्फबारी से सेब की फसल को नुकसान
बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने गुरुवार को राज्य के सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों का हवाई सर्वे किया. उन्होंने बाराबंकी, अयोध्या, अंबेडकरनगर, आजमगढ़, अमेठी, सुल्तानपुर, फतेहपुर, उन्नाव और लखनऊ का जायजा लिया. कृषि मंत्री ने किसानों को भरोसा दिलाया कि संकट की इस घड़ी में सरकार उनके साथ है. फसल नुकसान का सही आकलन कर पीड़ित किसानों को जल्द आर्थिक मदद और हर संभव सहायता दी जाएगी.
किसानों के लिए कृषि विभाग की सलाह
बता दें कि सरसों, चना, मसूर और मटर समेत कई रबी फसलों की कटाई चल रही है. बारिश से गेहूं-सरसों की फसल सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है. कृषि विभाग का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी और सही प्रबंधन से बेमौसम बारिश का नुकसान काफी हद तक कम किया जा सकता है.
आजतक एग्रीकल्चर डेस्क