देशभर में बढ़ते तापमान और संभावित लू के असर को देखते हुए कृषि-मौसम विशेषज्ञों ने किसानों के लिए विशेष सलाह जारी की है. गर्म और शुष्क मौसम के कारण फसलों में नमी तेजी से कम हो रही है, जिससे उत्पादन पर असर पड़ सकता है. ऐसे में सिंचाई, मल्चिंग और फसल संरक्षण के उपाय बेहद जरूरी हो गए हैं.
महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में मूंग, सब्जियों और नए लगाए गए सुपारी व नारियल के पौधों की नियमित सिंचाई करने की सलाह दी गई है, जबकि विदर्भ में ग्रीष्मकालीन फसलों जैसे-मूंग, मूंगफली, प्याज, सूरजमुखी, तिल और चारा फसलों में सुबह-शाम हल्की और बार-बार सिंचाई करने को कहा गया है. साथ ही वाष्पीकरण कम करने के लिए पुआल बिछाकर मल्चिंग और नई फसलों पर शेड नेट लगाने की भी सलाह दी गई है.
गुजरात में ग्वार, खीरा, लौकी, तोरई और करेला जैसी फसलों में हल्की सिंचाई जरूरी बताई गई है, जबकि मूंगफली में फूल और गांठ बनने के समय पानी देना महत्वपूर्ण है. ओडिशा में बोरो धान, मक्का, मूंग, उड़द और सब्जियों के साथ आम और काजू के बागानों में मिट्टी की नमी बनाए रखने पर जोर दिया गया है.
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मक्का, मूंगफली, सब्जियों और फलों की फसलों में नियमित सिंचाई के साथ-साथ निराई-गुड़ाई के बाद हल्की सिंचाई करने की सलाह दी गई है. वहीं छत्तीसगढ़ में गेहूं और चने की कटाई पूरी कर सुरक्षित भंडारण सुनिश्चित करने को कहा गया है.
बिहार में किसानों को हल्की और बार-बार सिंचाई के साथ मल्चिंग अपनाने और फलों के पौधों को तेज धूप से बचाने के लिए अस्थायी छायादान का उपयोग करने की सलाह दी गई है. आंध्र प्रदेश में धान, मक्का, ज्वार, चना, मूंगफली, तिल, गन्ना, सब्जियों और बागानों में पर्याप्त नमी बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं.
पंजाब और हरियाणा में ग्रीष्मकालीन मूंग, कपास, सब्जियां, आम, अमरूद और लोकाट जैसी फसलों में नियमित सिंचाई जरूरी बताई गई है. उत्तर प्रदेश में संकर मक्का, जायद चना, हरा चना, सब्जियों और गन्ने की फसलों में हल्की सिंचाई कर मिट्टी की नमी बनाए रखने की सलाह दी गई है.
राजस्थान में जायद मूंग, कपास, भिंडी, तरबूज, खरबूजा, टिंडा और ककड़ी जैसी फसलों के लिए भी यही उपाय सुझाए गए हैं. तेलंगाना में आम के बागानों और सब्जियों की जरूरत के अनुसार सिंचाई करने को कहा गया है.
जिन क्षेत्रों में गर्म और आर्द्र मौसम की स्थिति बनी हुई है, जैसे- तमिलनाडु, केरल, गंगेय पश्चिम बंगाल और तटीय आंध्र प्रदेश में भी ग्रीष्मकालीन फसलों में मिट्टी की नमी बनाए रखने के लिए हल्की सिंचाई और मल्चिंग बेहद जरूरी मानी गई है.
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय सबसे अहम है फसलों को लू और अधिक तापमान के प्रभाव से बचाना. इसके लिए सिंचाई का सही समय (सुबह या शाम), मल्चिंग और छायादान जैसे उपाय अपनाकर किसान नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं.
आजतक एग्रीकल्चर डेस्क