जायद सीजन में तोरई की खेती करें किसान, सिर्फ 60 रुपये में यहां से खरीदें बेस्ट वैरायटी के बीज

Vegetable Farming: तोरई की काशी रक्षिता वैरायटी कम लागत में अधिक उत्पादन और बढ़िया मुनाफा देती है. ऐसे में किसानों की नकदी कमाई के लिए तोरई की खेती करना अच्छा विकल्प है. नेशनल सीड्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NSC) के अनुसार, काशी रक्षिता किस्म 50-60 दिनों में तैयार हो जाती है.

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सिर्फ 60 रुपये में उपलब्ध हैं 10 ग्राम 'काशी रक्षिता' तोरई के बीज (फाइल फोटो-ITG) सिर्फ 60 रुपये में उपलब्ध हैं 10 ग्राम 'काशी रक्षिता' तोरई के बीज (फाइल फोटो-ITG)

आजतक एग्रीकल्चर डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 14 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 5:49 PM IST

रबी और खरीब के बीच का समय यानी मार्च से जून तक जायद सीजन होता है. इस समय नकदी फसलों की खेती किसानों के लिए फायदेमंद होती है. जायद सीजन में तोरई की खेती किसानों के लिए बेहतर ऑप्शन हो सकती है. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए विकसित की गई तोरई की ‘काशी रक्षिता’ वैरायटी से किसान कम लागत में बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं.

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नेशनल सीड्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NSC) की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, 'काशी रक्षिता' नाम से तोरई की बेस्ट वैरायटी के बीज उपलब्ध हैं. किसान इस किस्म के बीजों की बुवाई करके नकद कमाई कर सकते हैं. वहीं, बागवानी के शौकीन लोग अपने घर की छत पर भी आसानी से तोरई उगा सकते हैं. NSC के ऑनलाइन स्टोर पर 10 ग्राम 'काशी रक्षिता' तोरई के बीज सिर्फ 60 रुपये में उपलब्ध हैं. जिन्हें आप आसानी से घर बैठे ऑर्डर कर सकते हैं.

काशी रक्षिता तोरई की खासियत  
तोरई की काशी रक्षिता एक उन्नत किस्म है, जो अधिक पैदावार और बीमारियों के प्रति सहनशीलता के लिए जानी जाती है. यह मुख्य रूप से भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR) द्वारा विकसित किस्मों का हिस्सा है.इस किस्म की तोरई 50-60 दिनों में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है.

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कैसे उगाएं काशी रक्षिता तोरई?
तोरई की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे बेहतर होती है. 6.5 से 7.5 pH मान वाली मिट्टी में तोरई के बीजों को सामान्य तरीके से बोया जा सकता है. खेत की तैयारी के समय गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट का प्रयोग करें.

फसल की अच्छी बढ़वार के लिए समय-समय पर सिंचाई, निराई-गुड़ाई और सहारा (मचान) देना जरूरी होता है. सही देखभाल और तोरई की फसल 50–60 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे किसान कम समय में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. 

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